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कोरबा पर मंडराया चक्रवाती खतरा! 48 घंटे अहम, किसानों से कटाई रोकने की अपील

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009

मौसम का अलर्ट! 28-29 अक्टूबर को बारिश की आशंका, किसानों से कटाई रोकने की अपील
चक्रवात ‘अर्नब’ के संभावित प्रभाव को लेकर कोरबा प्रशासन अलर्ट; राहत शिविरों, स्वास्थ्य सेवाओं और बिजली व्यवस्था की तैयारियां तेज, आपात स्थिति में इस नंबर पर करें संपर्क: 7759228548

कोरबा ACGN:- बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही चक्रवाती परिस्थितियों के बीच कोरबा जिले में 28 और 29 अक्टूबर को बारिश तथा आंधी-तूफान की आशंका जताई गई है। संभावित मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रहने, जोखिम वाले क्षेत्रों पर नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
वहीं, मौसम की संभावित स्थिति को देखते हुए किसानों को धान, दलहन और तिलहन फसलों की कटाई फिलहाल स्थगित रखने, कटी हुई फसल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने नागरिकों से भी मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने और नदी-नालों तथा जलभराव वाले रास्तों से दूर रहने की अपील की है।


          चक्रवात ‘अर्नब’ को लेकर प्रशासन सतर्क
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में बने दबाव के चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ में परिवर्तित होने की संभावना जताई गई है। इसके प्रभाव से छत्तीसगढ़ में वर्षा की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। पूर्वानुमान के अनुसार 28 और 29 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों में बारिश तथा कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा की आशंका है।


कलेक्टर कुणाल दुदावत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों की बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने राजस्व, पुलिस, नगर निकाय, पंचायत, स्वास्थ्य, विद्युत और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को फोन चालू रखने, क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों की जानकारी रखने और आपात स्थिति में तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
       गांवों में मुनादी, निचले इलाकों पर रहेगी नजर
राजस्व अधिकारियों और तहसीलदारों को कोटवारों के माध्यम से गांवों में मुनादी कराकर लोगों को संभावित बारिश, तेज हवा और जलभराव के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। निचले और जोखिम वाले क्षेत्रों की निगरानी करने तथा जलस्तर बढ़ने की स्थिति में प्रभावित लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने को कहा गया है। प्रशासन ने तेज हवा के दौरान पेड़ गिरने, बिजली गिरने और कमजोर संरचनाओं से दुर्घटना की आशंका को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। आंधी-तूफान के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचने तथा पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े नहीं होने की अपील की गई है।


पुल-पुलियों पर पानी तो रास्ता पार करने का जोखिम न लें
कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने या पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बहने की स्थिति में तत्काल आवागमन रोका जाए। जरूरत पड़ने पर स्थानीय अमले के माध्यम से बैरिकेडिंग कराई जाए, ताकि कोई व्यक्ति या वाहन बहते पानी में प्रवेश न करे।
नागरिकों से अपील की गई है कि पुल-पुलियों पर पानी होने पर मोटरसाइकिल, कार या किसी अन्य वाहन से रास्ता पार करने की कोशिश न करें। प्रशासन द्वारा लगाए गए अवरोधों का पालन करें और सुरक्षित मार्ग का ही उपयोग करें।
        सामुदायिक भवनों में तैयार होंगे राहत शिविर
संभावित जलभराव या अन्य आपात स्थिति से निपटने के लिए जनपद पंचायतों और ग्राम पंचायतों को राहत शिविरों के लिए उपयुक्त स्थान चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। सामुदायिक भवनों को प्राथमिकता देते हुए वहां पेयजल, भोजन, चिकित्सा सुविधा और रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
प्रशासन ने राहत शिविरों के लिए स्कूलों का चयन नहीं करने के निर्देश दिए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जा सके। ग्राम पंचायतों को टॉर्च, रस्सी और अन्य जरूरी सामग्री तैयार रखने तथा बचाव दलों और गोताखोरों को आवश्यक उपकरणों के साथ तैयार रहने को कहा गया है।
  स्वास्थ्य सेवाओं और बिजली व्यवस्था पर विशेष ध्यान
स्वास्थ्य विभाग को 28 और 29 अक्टूबर को प्राथमिक एवं उप-स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी दवाइयां, चिकित्सकीय अमला और उपचार सुविधाएं उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। दूरस्थ और कटाव प्रभावित क्षेत्रों में जिन गर्भवती महिलाओं का प्रसव संभावित है, उन्हें समय रहते स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा गया है। बिजली विभाग को लाइनों का पूर्व निरीक्षण करने, संभावित रूप से बाधा बनने वाली पेड़ों की डालियों की छंटाई कराने तथा मरम्मत दलों और जरूरी उपकरणों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में जल्द बहाली के लिए भी व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
वहीं, नगरीय निकायों को पेड़ गिरने, सड़क अवरुद्ध होने और अंडरब्रिज या सड़कों पर पानी भरने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई कर आवागमन बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों के लिए जरूरी सलाह: कटाई रोकें, फसल सुरक्षित रखें
संभावित बारिश को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने मौसम आधारित कृषि सलाह जारी की है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पकने की अवस्था में पहुंच चुकी धान, दलहन और तिलहन फसलों की कटाई अगले दो से चार दिनों तक स्थगित रखने की सलाह दी है। जिन किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, उन्हें कटी हुई फसल शीघ्र सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करने को कहा गया है। फसलों में रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही कीटनाशक या अन्य दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
रबी फसलों की बुवाई मौसम की स्थिति को देखते हुए नवंबर के प्रथम सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी गई है। तिवरा और अलसी की उत्तेरा फसल लेने वाले किसानों को फिलहाल बुवाई स्थगित रखने को कहा गया है।
सब्जियों, फलदार पौधों और पशुधन की सुरक्षा भी जरूरी
तेज हवा और बारिश की आशंका को देखते हुए किसानों को लौकी और करेला जैसी लता वाली सब्जियों को सहारा देने की सलाह दी गई है। केले के पौधों, विशेषकर जिनमें फूल या फल आ चुके हैं, उन्हें बांस से सहारा देने तथा सब्जियों के खेतों में जल निकासी की व्यवस्था रखने को कहा गया है।
पशुपालकों को पशुओं को सूखे और सुरक्षित स्थान पर रखने, पर्याप्त चारा तथा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है। तेज हवा, बारिश और वज्रपात की आशंका के दौरान पशुओं को खुले स्थानों या पेड़ों के नीचे बांधने से बचने की अपील की गई है।
         आपात स्थिति में इस नंबर पर करें संपर्क
जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन के लिए जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। किसी भी आपात स्थिति में नागरिक दूरभाष नंबर 7759228548 पर संपर्क कर सकते हैं। प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देने और किसी भी खतरे या आपात स्थिति की सूचना तत्काल नियंत्रण कक्ष अथवा स्थानीय प्रशासन को देने की अपील की है।
     प्रशासन की तैयारी, नागरिकों की सतर्कता भी जरूरी
संभावित चक्रवाती प्रभाव के मद्देनजर कोरबा जिले में प्रशासनिक तैयारियां तेज हैं। राहत शिविरों से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं, बिजली बहाली और फसलों की सुरक्षा तक विभिन्न स्तरों पर व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि वास्तविक मौसम की स्थिति पूर्वानुमान के अनुसार बदल सकती है, इसलिए नागरिकों और किसानों के लिए जरूरी है कि वे आधिकारिक चेतावनियों पर नजर रखें और समय रहते सावधानी बरतें। थोड़ी सी सतर्कता संभावित नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


प्रदीप मिश्रा
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