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जटगा पंचायत के नौ बोर, दो जांच रिपोर्ट और कई सवाल! जीएसटी से लेकर जनपद की रिपोर्ट तक, आखिर कहां उलझा मामला?

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कोरबा छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009


विनय ट्रेडर्स का जीएसटी पंजीयन निरस्त होने और मौके पर दुकान नहीं मिलने का दावा, जनपद की जांच में नौ बोर के कार्य पूर्ण और वित्तीय गड़बड़ी नहीं मिलने का उल्लेख; शिकायतकर्ता दीपक कुमार गुप्ता ने दोबारा निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

कोरबा ACGN:- कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत जटगा में पेयजल मद और 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए बोर खनन कार्यों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर जनपद पंचायत की जांच रिपोर्ट में नौ बोर के कार्य पूर्ण होने और वित्तीय अनियमितता नहीं मिलने का उल्लेख बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता दीपक कुमार गुप्ता ने जांच की निष्पक्षता, विनय ट्रेडर्स के बिलों, बोर खनन के वास्तविक स्थानों और जांच दल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ता ने 26 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन देकर जिला स्तर पर उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। अब इस मामले में जीएसटी विभाग के सत्यापन और जनपद पंचायत की जांच के निष्कर्षों का मिलान महत्वपूर्ण हो गया है।


जीएसटी विभाग की रिपोर्ट में विनय ट्रेडर्स को लेकर क्या सामने आया?
शिकायत में जीएसटी विभाग की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, विनय ट्रेडर्स का जीएसटी नंबर 22CKOPM6950P1ZE है और उसका जीएसटी पंजीयन 15 सितंबर 2022 से निरस्त बताया गया है। 9 अक्टूबर 2026 को किए गए भौतिक सत्यापन तथा 16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि संबंधित पते पर दुकान नहीं मिली और वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने के प्रमाण नहीं मिले। रिपोर्ट से जुड़े विवरण में बिलों की तारीख, प्राप्तकर्ता, एचएसएन/एसएसी कोड, जीएसटी दर और कर राशि जैसी प्रविष्टियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।


शिकायतकर्ता का आरोप है कि विनय ट्रेडर्स का संबंध सरपंच परिवार से है। इसी आधार पर उन्होंने फर्म के बिलों, सामग्री की आपूर्ति और पंचायत की राशि से हुए कथित भुगतान की जांच की मांग की है। कि पंचायत ने इस फर्म से किस सामग्री की खरीदी दिखाई, सामग्री वास्तव में प्राप्त हुई या नहीं, बिलों का सत्यापन किसने किया और भुगतान किस अधिकारी की स्वीकृति से हुआ। इसके लिए संबंधित अवधि के लेन-देन और अन्य अभिलेखों की जांच आवश्यक है।
       जनपद पंचायत की रिपोर्ट में क्या लिखा गया?
जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा द्वारा कराई गई जांच का उल्लेख जांच प्रतिवेदन क्रमांक 3042/2026 के रूप में किया गया है। शिकायत में उपलब्ध विवरण के अनुसार, जांच दल में टी.एस. मरावी, राम कुमार लकड़ा और उप अभियंता दीपक साहू शामिल थे। 7 अक्टूबर 2026 को स्थल निरीक्षण किए जाने के बाद जनपद की जांच रिपोर्ट में नौ बोर खनन कार्यों को पूर्ण बताया गया और वित्तीय अनियमितता नहीं मिलने की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर शिकायतकर्ता दीपक कुमार गुप्ता का आरोप है कि जांच में महत्वपूर्ण तथ्यों का समुचित सत्यापन नहीं किया गया और कुछ स्थानों तथा बोर खनन कार्यों की वास्तविक स्थिति को सही ढंग से दर्ज नहीं किया गया।


शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि निरीक्षण के समय टी.एस. मरावी और राम कुमार लकड़ा मौके पर उपस्थित थे, जबकि उप अभियंता दीपक साहू की मौके पर उपस्थिति को लेकर संदेह है। इसके बावजूद अंतिम प्रतिवेदन में उनके हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति, हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता और जांच प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
जटगा में किन-किन स्थानों पर कराए गए नौ बोर?
शिकायत में बोर खनन से जुड़े नौ स्थानों का उल्लेख किया गया है।समर सिंह के घर के पास: 19 सितंबर 2025 — ₹1,32,500।
राम प्रसाद के घर के पास: 22 सितंबर 2025 — ₹1,02,550।
जमन सिंह के घर के पास: 22 सितंबर 2025 — ₹1,05,350।
राम मंदिर के पास: 15 अक्टूबर 2025 — ₹1,02,750।
पुरानी धान मंडी के पास: वर्ष 2025, तारीख का उल्लेख नहीं — ₹1,03,000।
रामवीर कोर्राम के घर के पास: 16 अक्टूबर 2025 — ₹1,00,650।
बजरंग मोहल्ला में अन्नू तंवर के घर के पास: 16 अक्टूबर 2025 — ₹1,35,200।
आदेश के घर के पास: 30 अक्टूबर 2025 — ₹1,03,850।
नई धान मंडी के पास: 30 अक्टूबर 2025 — ₹1,32,000।
इन नौ मदों में दर्ज राशियों का कुल जोड़ ₹10,17,850 होता है, जबकि जनपद पंचायत की जांच रिपोर्ट के संबंध में उपलब्ध विवरण में कुल राशि ₹9,17,850 बताई गई है। इस प्रकार दोनों राशियों के बीच एक लाख रुपये का अंतर है।

शिकायतकर्ता की मांग है कि इन सभी स्थानों का दोबारा भौतिक सत्यापन कराया जाए और प्रत्येक बोर की वास्तविक स्थिति, निर्माण कार्य, भुगतान तथा संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जाए।
शिकायत में सुरेश्वर सिंह ठाकुर के बोर खनन से जुड़ी जानकारी जांच प्रतिवेदन में शामिल नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। वहीं निखिल ढाबा के पास स्थित बोर को धान मंडी के पास का बताकर दर्ज किए जाने पर आपत्ति जताई गई है। इन दोनों बिंदुओं पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित बोर के स्थान, कार्यादेश, भुगतान अभिलेख और निरीक्षण रिपोर्ट का आपस में मिलान जरूरी है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि शिकायत में बताए गए स्थानों और जनपद की रिपोर्ट में दर्ज स्थानों का विवरण एक-दूसरे से मेल खाता है या नहीं।


शिकायत से जुड़े कार्यवार विवरण में कुल राशि को लेकर भी अंतर सामने आने की जानकारी है। एक विवरण में 10 लाख 17 हजार 850 रुपये, जबकि दूसरे विवरण में 9 लाख 17 हजार 850 रुपये का उल्लेख बताया गया है। इस अंतर का कारण उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट नहीं है। इसलिए प्रत्येक बोर के कार्यादेश, स्वीकृत राशि, बिल, भुगतान वाउचर और वास्तविक खर्च की जांच कर सही कुल राशि सार्वजनिक करना होगा।


          जांच में अन्य लोगों की भूमिका पर भी सवाल
दीपक कुमार गुप्ता ने शिकायत में सुनील खैरवार, जिन्हें पप्पू गुरु जी के नाम से भी जाना जाता है और जो पोड़ी उपरोड़ा में बीआरसी पद पर पदस्थ बताए गए हैं, तथा कोमल खैरवार, जो आवास मित्र के रूप में कार्यरत बताए गए हैं, इनकी भूमिका की जांच की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन दोनों ने निर्धारित दायित्व से अलग जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया।
शिकायतकर्ता ने नवीन मित्तल और कीर्ति कुमार प्रजापति को 7 अक्टूबर के स्थल निरीक्षण के समय मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के रूप में उल्लेखित किया है। उनका कहना है कि मौके पर देखी गई स्थिति और जांच प्रतिवेदन में दर्ज तथ्यों के बीच अंतर है। उन्होंने दोनों के बयान दर्ज कराने और उनकी मौजूदगी में दोबारा निरीक्षण कराने की मांग की है। इसके अलावा सरपंच, सचिव और सरपंच पति की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की गई है। सरपंच परिवार और विनय ट्रेडर्स के बीच कथित संबंध की पुष्टि होने पर संबंधित लेन-देन में हितों के टकराव या नियमों के उल्लंघन की स्थिति की भी पड़ताल की जा सकती है।
           शिकायत के बाद धमकी देने का भी आरोप
मामले का एक और गंभीर पहलू शिकायतकर्ता को कथित रूप से धमकियां मिलने का है। दीपक कुमार गुप्ता का आरोप है कि पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत करने के बाद उन्हें और उनके परिवार को धमकाया जा रहा है। उनका कहना है कि सरपंच पति और उनके परिवार की ओर से उन्हें एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी भी दी जा रही है।

           अब प्रशासन के सामने असली चुनौती
दीपक कुमार गुप्ता ने जनदर्शन में जांच प्रतिवेदन क्रमांक 3042/2026 की समीक्षा और निरस्तीकरण, जिला स्तर पर स्वतंत्र जांच समिति गठित करने, नौ बोर के स्थलों का दोबारा भौतिक सत्यापन कराने तथा सरपंच, सचिव, सरपंच पति, विनय ट्रेडर्स, सुनील खैरवार, कोमल खैरवार, उप अभियंता दीपक साहू और जांच दल के अन्य संबंधित सदस्यों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होने पर कानूनी कार्रवाई और धमकी के आरोपों की जांच कर सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी रखी है।
अब सबसे अहम सवाल यही है कि जीएसटी विभाग के सत्यापन में सामने आए तथ्यों और जनपद पंचायत की जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के बीच कोई वास्तविक विरोधाभास है या नहीं। इसके लिए मूल जीएसटी रिपोर्ट, विनय ट्रेडर्स के बिल, पंचायत के भुगतान अभिलेख, नौ बोर के कार्यादेश, स्थल निरीक्षण के दस्तावेज और जांच दल के हस्ताक्षरों की स्वतंत्र समीक्षा जरूरी है। प्रशासन की निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी राशि का उपयोग नियमों के अनुसार हुआ या कहीं अनियमितता हुई है।
सरकारी राशि जनता की अमानत है। उसका हिसाब पारदर्शी होना चाहिए और शिकायत करने वाले व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई मिलनी चाहिए। फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।


प्रदीप मिश्रा
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