स्वीपर पद की नियुक्ति में 50 हजार की कथित डील? वायरल ऑडियो से शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू,
पठारीटोला स्कूल के प्राचार्य पर रिश्वत मांगने का आरोप; वायरल ऑडियो में ऊपर तक रकम पहुंचाने की कथित बातचीत का दावा, जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच और कार्रवाई की बात कही।
सूरजपुर ACGN:- सूरजपुर जिले के बिहारपुर क्षेत्र में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उस समय सवाल खड़े हो गए, जब अवन्तिकापुर के पठारीटोला स्थित शासकीय स्कूल में स्वीपर पद पर नियुक्ति से जुड़ा एक कथित ऑडियो सामने आया। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर नियुक्ति के लिए राशि की मांग और 50 हजार रुपये ऊपर तक पहुंचाने की बातचीत होने का दावा किया जा रहा है।

वायरल ऑडियो में स्कूल के प्राचार्य नोखेलाल जायसवाल की आवाज होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, ऑडियो में सुनाई देने वाली आवाज और बातचीत की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल
स्वीपर पद की नियुक्ति का उद्देश्य स्कूल में साफ-सफाई की व्यवस्था बनाए रखना और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। ऐसे में नियुक्ति से पहले कथित लेन-देन की बातचीत सामने आने के बाद सरकारी नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
यदि जांच में रिश्वत मांगने के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह गंभीर मामला माना जाएगा और संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

जांच के निर्देश, रिपोर्ट का इंतजार
मामला सामने आने के बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच अभी पूरी नहीं हुई है। इसी वजह से अब जांच की गति और उसकी निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
सरकारी पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में वायरल ऑडियो के मामले में जल्द तथ्य सामने लाने की मांग उठ रही है।

जिला शिक्षा अधिकारी ने लिया संज्ञान
मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कथित ऑडियो की जांच कराने तथा जांच में तथ्य सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि वायरल ऑडियो वास्तविक है या नहीं, उसमें सुनाई दे रही आवाज किसकी है और बातचीत का वास्तविक संदर्भ क्या था।
ऑडियो की तकनीकी जांच से सामने आ सकती है सच्चाई
फिलहाल वायरल ऑडियो में लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच के लिए ऑडियो की तकनीकी जांच, बातचीत में शामिल लोगों की पहचान और संबंधित प्राचार्य का पक्ष सामने रखना महत्वपूर्ण होगा।
वहीं, कथित बातचीत में यदि ऊपर के अधिकारियों तक रकम पहुंचाने का उल्लेख हुआ है, तो जांच में इस दावे की भी अलग से पड़ताल की जानी जरूरी होगी।
फिलहाल इस मामले में सबकी नजर विभागीय जांच पर टिकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल ऑडियो में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
प्रदीप मिश्रा
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