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हाथियों का आशियाना बचाने ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, कोयला खदानों की नीलामी रद्द करने की मांग

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रायगढ़, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संजय जेठवानी धरमजयगढ़

हाथियों के जंगल में कोयला खदानों का विरोध, ग्राम सभा ने खोला मोर्चा

नवागांव ईस्ट-वेस्ट कोल ब्लॉक की नीलामी रद्द करने की मांग, 180 ग्रामीणों और 75 हाथियों की मौत के आंकड़े रखे; केंद्र सरकार को भेजा ज्ञापन


रायगढ़ ACGN:- धरमजयगढ़ के वनांचल में प्रस्तावित कोयला खदानों को लेकर विरोध तेज हो गया है। रायगढ़ जिले की ग्राम पंचायत नवागांव की ग्राम सभा ने 5 अक्टूबर 2026 को बैठक कर नवागांव ईस्ट और नवागांव वेस्ट कोल ब्लॉक की प्रस्तावित नीलामी के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया। ग्राम सभा ने दोनों कोल ब्लॉकों की नीलामी निरस्त करने और खनन से जुड़ी कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।
ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर 9 अक्टूबर को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), धरमजयगढ़ के माध्यम से कोयला मंत्रालय, भारत सरकार को ज्ञापन भेजा गया। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और छत्तीसगढ़ के राज्यपाल को भी मांगों से अवगत कराने की जानकारी दी गई है।


जंगल, हाथियों के आवागमन और ग्रामीणों की आजीविका पर चिंता


ग्रामीणों का कहना है कि धरमजयगढ़ और छाल वन परिक्षेत्र हाथियों की आवाजाही और प्राकृतिक रहवास के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कोयला खनन, पेड़ों की कटाई, भूमि की खुदाई, ब्लास्टिंग और भारी वाहनों की आवाजाही से जंगलों, जलस्रोतों, कृषि भूमि और स्थानीय लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
ग्राम सभा ने आशंका जताई कि खनन गतिविधियों से हाथियों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन मार्ग प्रभावित हो सकते हैं, जिससे मानव-हाथी संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा उनके जीवन, परंपरा और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय है।
180 ग्रामीणों और 75 हाथियों की मौत के आंकड़ों का हवाला
ज्ञापन में मानव-हाथी संघर्ष की गंभीरता बताते हुए मौतों के आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। इसमें दावा किया गया है कि 21 दिसंबर 2001 से 5 जून 2026 तक हाथियों के हमलों और कुचलने की घटनाओं में 180 ग्रामीणों की मौत हुई। वहीं, 3 दिसंबर 2005 से 5 जून 2026 तक विभिन्न कारणों से 75 हाथियों की मौत होने का उल्लेख है।


ज्ञापन में छाल वन परिक्षेत्र में 64 ग्रामीणों और 38 हाथियों की मौत का भी दावा किया गया है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब क्षेत्र पहले से ही मानव-हाथी संघर्ष की समस्या से जूझ रहा है, तब यहां खनन गतिविधियों का विस्तार वन्यजीवों और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिहाज से कितना उचित होगा।
हालांकि, प्रस्तुत आंकड़ों का संबंधित विभागों के आधिकारिक अभिलेखों से स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है।
       पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून का मुद्दा भी उठाया
ग्राम सभा ने अपने ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची और पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 यानी पेसा कानून का उल्लेख किया है। ग्रामीणों की मांग है कि अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा की आपत्तियों और वैधानिक अधिकारों को गंभीरता से लिया जाए तथा स्थानीय समुदायों के हितों की अनदेखी न हो।
ज्ञापन में धरमजयगढ़ और छाल वन परिक्षेत्र में प्रस्तावित कुल 17 कोल ब्लॉकों को लेकर भी चिंता जताई गई है। ग्रामीणों ने 36,041.711 हेक्टेयर क्षेत्र को संरक्षित रखने और प्रस्तावित कोल ब्लॉकों की नीलामी पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि पूर्व में नीलामी या आवंटन की प्रक्रिया में शामिल बताए गए कोल ब्लॉकों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।


                  ग्राम सभा की पांच प्रमुख मांगें
ग्राम सभा ने नवागांव ईस्ट और नवागांव वेस्ट कोल ब्लॉक की प्रस्तावित नीलामी तत्काल निरस्त करने, दोनों ब्लॉकों से जुड़ी नीलामी, आवंटन, सर्वेक्षण, अन्वेषण और खनन संबंधी कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।
इसके साथ ही हाथियों के आवागमन मार्गों और संभावित कॉरिडोर की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच, वन्यजीव विशेषज्ञों से अध्ययन, रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा ग्राम सभा के प्रस्ताव पर की गई कार्रवाई की लिखित जानकारी ग्राम पंचायत को देने की मांग भी रखी गई है।
ज्ञापन के साथ ग्राम सभा का सर्वसम्मत प्रस्ताव, उपस्थित सदस्यों की हस्ताक्षर सूची और मानव-हाथी संघर्ष से संबंधित सूचियां संलग्न किए जाने की जानकारी दी गई है।
                अब केंद्र सरकार के फैसले पर निगाहें
नवागांव ग्राम सभा के प्रस्ताव ने धरमजयगढ़ में कोयला खनन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज कर दी है। ग्रामीण चाहते हैं कि सरकार किसी भी निर्णय से पहले जंगलों, हाथियों के प्राकृतिक आवास, स्थानीय समुदायों के अधिकारों और आजीविका पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का गंभीरता से आकलन करे।
अब देखना होगा कि केंद्र सरकार ग्राम सभा की मांगों और ज्ञापन में प्रस्तुत तथ्यों पर क्या कदम उठाती है। फिलहाल नीलामी रद्द होने या खनन प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।


प्रदीप मिश्रा
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