श्री महावीर हॉस्पिटल में इलाज के नाम पर लाखों वसूली का आरोप, युवक की मौत के बाद अस्पताल पर उठे गंभीर सवाल
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अंबिकापुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संतोष यादव अंबिकापुर, सरगुजा
आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद 6 से 7 लाख रुपये लेने का आरोप, मेडिकल रिकॉर्ड नहीं देने की शिकायत; कलेक्टर, SP और CMHO से विशेष मेडिकल बोर्ड जांच की मांग
अंबिकापुर ACGN:- अंबिकापुर के श्री महावीर हॉस्पिटल में इलाज के दौरान 24 वर्षीय युवक की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन और इलाज की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सुभाषनगर निवासी आशुतोष दास के परिजनों ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को शिकायत देकर इलाज में लापरवाही, आयुष्मान कार्ड के बावजूद लाखों रुपये लिए जाने तथा मौत के बाद मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने जैसे आरोप लगाए हैं। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने और दोष सिद्ध होने पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों के अनुसार आशुतोष दास को 13 जून 2026 को सड़क दुर्घटना के बाद गंभीर हालत में श्री महावीर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिवार का दावा है कि उनके पास वैध आयुष्मान भारत कार्ड था, इसके बावजूद अस्पताल में इलाज के दौरान नगद और ऑनलाइन माध्यम से करीब 6 से 7 लाख रुपये लिए गए। परिवार ने इसे अवैध वसूली बताते हुए पूरे भुगतान और उपचार से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग की है।
परिजनों ने इलाज की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि 11 अगस्त को डिस्चार्ज होने के बाद 30 अगस्त को मरीज को फॉलोअप के लिए दोबारा अस्पताल लाया गया। परिवार का कहना है कि इस दौरान मरीज की हालत में सुधार होने के बजाय स्थिति लगातार बिगड़ती गई और फेफड़ों में गंभीर संक्रमण तथा Lung Abscess यानी फेफड़ों में फोड़े जैसी स्थिति सामने आई।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि परिजनों के बार-बार अनुरोध के बावजूद संबंधित चिकित्सक डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता को मरीज को देखने के लिए नहीं बुलाया गया। परिवार के अनुसार 2 सितंबर को मरीज की Tracheostomy Tube निकाल दी गई, जिसके बाद उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई।
परिजनों का आरोप है कि 3 सितंबर की रात करीब 11 बजे मरीज को रायपुर रेफर करने की बात कही गई, लेकिन कागजी प्रक्रिया और CT Scan सहित अन्य प्रक्रियाओं में कई घंटे लग गए। परिवार का कहना है कि सुबह करीब 5:30 बजे मरीज को अत्यंत गंभीर हालत में रायपुर के लिए रवाना किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
आशुतोष की मौत के बाद मामला और गंभीर तब हुआ, जब परिजनों ने अस्पताल से CT Scan की CD या फिल्म, X-Ray, Transfer Summary और Death Summary सहित उपचार से जुड़े मूल दस्तावेज मांगे। परिवार का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने मांगे गए सभी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए और केवल अधूरी Case Sheet दी गई। इसी को लेकर परिजनों ने मेडिकल रिकॉर्ड के संरक्षण और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
NMC के Registered Medical Practitioner (Professional Conduct) Regulations, 2023 में मरीज या अधिकृत परिचारक द्वारा मेडिकल रिकॉर्ड मांगे जाने पर संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का प्रावधान है। नियमों के अनुसार ऐसे दस्तावेजों की मांग को विधिवत स्वीकार कर पांच कार्य दिवस के भीतर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
हालांकि किसी अस्पताल द्वारा रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में कथित कमी और इस मामले में इलाज में लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच का विषय है। इसी वजह से परिवार ने सीधे आरोपों को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है, ताकि उपचार के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया, मरीज की वास्तविक मेडिकल स्थिति, दवाओं और जांच रिपोर्ट तथा रेफरल में लगे समय की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके।
परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि श्री महावीर हॉस्पिटल से मरीज की मूल मेडिकल फाइल, CT Scan, X-Ray, जांच रिपोर्ट, उपचार से संबंधित दस्तावेज, बिल और भुगतान का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित कराया जाए। परिवार का कहना है कि इन दस्तावेजों की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि आयुष्मान कार्ड के बावजूद कितनी राशि ली गई, किस मद में ली गई और मरीज के उपचार में कौन-कौन सी चिकित्सा प्रक्रिया अपनाई गई।
परिजनों ने मामले में विशेष मेडिकल बोर्ड गठित कर निष्पक्ष जांच कराने, सभी मूल मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित कराने और जांच में यदि किसी चिकित्सक या अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही अथवा अन्य अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार FIR एवं दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।
फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक या चिकित्सकीय जांच का परिणाम सामने नहीं आया है। अस्पताल प्रबंधन या संबंधित चिकित्सकों का पक्ष भी सामने आना बाकी है। इसलिए आशुतोष दास की मौत के वास्तविक कारण, इलाज की गुणवत्ता, भुगतान की वैधता और मेडिकल रिकॉर्ड को लेकर उठे सवालों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
प्रदीप मिश्रा
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