बलरामपुर DEO तबादला – साढ़े चार करोड़ की वित्तीय अनियमितता पर सवाल
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बलरामपुर-रामानुजगंज, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता : संतोष यादव
जांच में वित्तीय अनियमितताओं के उल्लेख के बाद मनीराम यादव को DEO पद से हटाकर प्राचार्य बनाया गया, निलंबन या आगे की कार्रवाई पर नजर
बलरामपुर ACGN:- बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव से जुड़ी करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला उनके तबादले के बाद फिर चर्चा में है। 28 सितंबर 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश में मनीराम यादव को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी के पद से हटाकर सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परसा में प्राचार्य पद पर पदस्थ किया गया है। उनके स्थान पर नरेन्द्र कुमार निरापुरे को बलरामपुर-रामानुजगंज का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर किया गया है।

मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मनीराम यादव के कार्यकाल में विभिन्न शैक्षणिक मदों में खरीदी और शासकीय राशि के उपयोग को लेकर शिकायत के बाद जांच कराई गई थी। अगस्त 2026 में सामने आई जांच संबंधी रिपोर्टों में करीब 4.51 से 4.53 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख होने की बात कही गई है। रिपोर्टों के अनुसार जांच समिति ने कार्रवाई और निलंबन की अनुशंसा भी की थी।
जांच में डीएफ मद, सफाई सामग्री, अध्ययन सामग्री, साइकिल वितरण और फर्नीचर खरीदी सहित अलग-अलग मदों में वित्तीय प्रक्रिया और राशि के उपयोग से संबंधित अनियमितताओं का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। बताया गया है कि जांच रिपोर्ट अगस्त में जिला प्रशासन को सौंपे जाने के बाद शासन स्तर पर भेजी गई थी।
इसके बाद 28 सितंबर को जारी शासन के स्थानांतरण आदेश में मनीराम यादव को DEO की जिम्मेदारी से हटाकर प्राचार्य पद पर भेज दिया गया। हालांकि उपलब्ध स्थानांतरण आदेश में उनके निलंबन या किसी अंतिम दंडात्मक कार्रवाई का उल्लेख नहीं है। यही बिंदु अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है कि जांच रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं के उल्लेख के बाद आगे की विभागीय कार्रवाई क्या होगी।
वहीं मनीराम यादव की ओर से लगाए गए आरोपों पर अपना पक्ष भी सामने आया है। उनके अनुसार विभिन्न सामग्रियों की खरीदी, आपूर्ति, गुणवत्ता परीक्षण, भौतिक सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार की गई थी। उन्होंने यह भी कहा है कि शासकीय भुगतान जिला कोषालय स्तर पर परीक्षण के बाद होता है और जांच के अंतिम निष्कर्ष से पहले उन्हें दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
ऐसे में अब पूरे मामले में जांच रिपोर्ट, संबंधित दस्तावेज, खरीदी प्रक्रिया और भुगतान अभिलेखों के आधार पर शासन स्तर पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है, यह महत्वपूर्ण होगा। केवल पद परिवर्तन को मामले का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता, क्योंकि वित्तीय अनियमितता से जुड़े आरोपों पर अंतिम स्थिति सक्षम स्तर की विभागीय कार्रवाई और उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण से ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल मनीराम यादव बलरामपुर-रामानुजगंज के प्रभारी DEO नहीं हैं और उनके स्थान पर नरेन्द्र कुमार निरापुरे को नई जिम्मेदारी दी गई है। अब नजर इस बात पर है कि शासन जांच रिपोर्ट पर आगे कोई विभागीय अथवा अन्य कानूनी कार्रवाई करता है या मामला केवल प्रशासनिक स्थानांतरण तक सीमित रहता है।
प्रदीप मिश्रा
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