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युवा रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें : मुख्यमंत्री साय

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009

संवाददाता:- अनादि पांडेय

यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव में युवाओं से सीधा संवाद, स्टार्टअप-निपुण योजना के लिए 500 करोड़ का प्रावधान; नई औद्योगिक नीति के बाद 8.23 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव का दावा



रायपुर ACGN:- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति प्रदेश के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं को केवल नौकरी तलाशने तक सीमित रहने के बजाय अपने कौशल, नवाचार और उद्यमिता के जरिए नए रोजगार पैदा करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवा, नवाचारकर्ता और स्टार्टअप महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्यमंत्री मंगलवार को राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव-2026 में प्रदेशभर से पहुंचे विद्यार्थियों, युवा नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप उद्यमियों से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के विचारों को नवाचार और नवाचार को सफल उद्यम में बदलने के लिए आवश्यक वातावरण, अधोसंरचना, तकनीकी सहयोग और नीतिगत प्रोत्साहन उपलब्ध कराने पर काम कर रही है।
स्टार्टअप और निपुण योजना के लिए 500 करोड़ का प्रावधान
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि युवाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं निपुण योजना पर काम किया जा रहा है, जिसके लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना सहित केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति-2024 में भी नए उद्यमियों के लिए कई प्रोत्साहन दिए गए हैं। महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांगजनों सहित विभिन्न वर्गों की उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रावधान किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से नई औद्योगिक नीति का अध्ययन कर उसमें उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में नए औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं और सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए उद्योग लगाने की प्रक्रियाओं को आसान बनाने का प्रयास किया गया है।


       8.23 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिलने का दावा
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ को अब तक लगभग 8 लाख 23 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उनके अनुसार इनमें से अनेक परियोजनाओं पर धरातल पर काम भी शुरू हो चुका है।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक उद्योगों के साथ ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल और अन्य उभरते क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं। प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, ऊर्जा क्षमता, भौगोलिक स्थिति और सड़क, रेल तथा हवाई कनेक्टिविटी को उन्होंने निवेश और उद्यमिता के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया।


            2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का संकल्प रखा है और इसी दिशा में छत्तीसगढ़ भी विकसित राज्य बनने की ओर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2047 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लगभग 75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल सरकार के प्रयासों से हासिल नहीं होगा। इसके लिए युवाओं, किसानों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और आम नागरिकों की भागीदारी जरूरी है। नई पीढ़ी को टेक्नोलॉजी, रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप के क्षेत्र में आगे आने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर-विशाखापट्टनम सहित महत्वपूर्ण सड़क और अन्य कनेक्टिविटी परियोजनाओं के विस्तार से छत्तीसगढ़ की देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों तक पहुंच बेहतर होगी। इसका असर उद्योग, व्यापार, कृषि, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में दिखाई दे सकता है।


    किसान परिवार से आने का अनुभव भी साझा किया
युवाओं से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री साय ने अपने किसान परिवार और बगिया गांव से जुड़े अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और स्वयं खेती-किसानी, हल चलाने तथा पशुपालन से जुड़े रहे हैं। इसलिए कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं को वे नजदीक से समझते हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान प्रदेश है और आधुनिक तकनीक तथा नवाचार को कृषि से जोड़कर युवाओं के लिए उद्यमिता के नए रास्ते खोले जा सकते हैं। कृषि के अलावा जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए अवसर हैं।
            वन और कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास खनिज, वन संपदा और कृषि जैव विविधता की बड़ी संपदा है। जरूरत इस बात की है कि इन संसाधनों का बेहतर वैल्यू एडिशन हो और इसका अधिक लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचे।
उन्होंने बस्तर सहित वन क्षेत्रों में उपलब्ध इमली, महुआ, सीताफल और औषधीय पौधों का उदाहरण देते हुए कहा कि आधुनिक प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए युवा इनसे नए उद्यम खड़े कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और वनांचल की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है।
सुगंधित चावल के निर्यात से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। उन्होंने जवाफूल, विष्णुभोग, हनुमानभोग और शीतलचीनी जैसी सुगंधित धान की किस्मों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा धान की हजारों किस्मों का संरक्षण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, वैल्यू एडिशन और निर्यात की पूरी श्रृंखला विकसित करने की जरूरत है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ कृषि आधारित स्टार्टअप्स के लिए भी बाजार तैयार हो सकते हैं।
         युवाओं ने फंडिंग से फिल्म सिटी तक पूछे सवाल
कॉन्क्लेव में युवाओं ने मुख्यमंत्री से स्टार्टअप फंडिंग, लोन में कोलेटरल, सरकारी योजनाओं से सहयोग, रोजगार सृजन, हॉर्टिकल्चर विद्यार्थियों के कौशल, सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर इकोसिस्टम तथा प्रस्तावित फिल्म सिटी से बनने वाले अवसरों को लेकर सवाल किए।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से उपलब्ध योजनाओं और अवसरों का लाभ उठाने तथा उद्यमिता की दिशा में आगे आने को कहा। उन्होंने कहा कि रोजगार और व्यवसाय की प्रकृति तेजी से बदल रही है। सरकार बदलती तकनीक और युवाओं की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित करने पर काम कर रही है।
उन्होंने युवाओं को असफलता से नहीं घबराने और नए प्रयोग करने का साहस रखने की बात कही। उनके अनुसार किसी नए विचार को बदलाव का माध्यम बनाने के लिए परिश्रम, कौशल और उद्यमिता को साथ लेकर चलना जरूरी है।
सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का अवलोकन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में नवनिर्मित सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का भी अवलोकन किया। उन्होंने अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक उपकरणों और स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली तथा वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से चर्चा की।
उन्होंने बायोसेफ्टी लेवल लैब, एनिमल कल्चर लैब, माइक्रोबियल सेल और प्लांट टिश्यू कल्चर लैब सहित विभिन्न प्रयोगशालाओं को देखा। सेंटर में स्टार्टअप्स के लिए इन्क्यूबेशन स्पेस, ड्राई एवं वेट लैब, प्लग एंड प्ले ऑफिस, कॉमन इंस्ट्रूमेंटेशन लैब, एनालिटिकल टेस्टिंग तथा बेसिक से हाई-एंड उपकरणों की सुविधाएं विकसित की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सेंटर विद्यार्थियों, शोधार्थियों और स्टार्टअप्स के लिए आइडिया से इनोवेशन और इनोवेशन से एंटरप्राइज तक की यात्रा में महत्वपूर्ण मंच बन सकता है। यहां युवाओं को अपने विचारों को अनुसंधान, उत्पाद विकास और उद्यम में बदलने का अवसर मिलेगा।
सेंटर के माध्यम से स्टार्टअप्स को मेंटरिंग, हैंडहोल्डिंग, तकनीक हस्तांतरण, उत्पाद विकास और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। विद्यार्थियों को डिसर्टेशन और इंटर्नशिप के अवसर भी मिलेंगे।
          ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत पौधरोपण
मुख्यमंत्री ने इन्क्यूबेशन सेंटर परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत मौलश्री का पौधा भी लगाया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने और लगाए गए पौधों के संरक्षण पर जोर दिया।
       एग्रीटेक से एआई और डीप-टेक तक दिखे नवाचार
तीन दिवसीय यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव में कृषि एवं एग्रीटेक, खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, जैव प्रौद्योगिकी, ग्रामीण उद्यमिता, डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप-टेक, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों से जुड़े स्टार्टअप्स अपने नवाचार और उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं।
कॉन्क्लेव में विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, नवाचारकर्ताओं, स्टार्टअप्स, निवेशकों और उद्योग जगत को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। यहां नए विचारों को तकनीक, बाजार और निवेश से जोड़ने को लेकर संवाद हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं में प्रतिभा और सामर्थ्य की कमी नहीं है। जरूरत उन्हें सही अवसर और मंच देने की है। उन्होंने कहा कि युवाओं की प्रतिभा और नवाचार को अवसर मिलने से प्रदेश में नए रोजगार और उद्यम के रास्ते खुल सकते हैं।
इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल सहित वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, युवा उद्यमी, स्टार्टअप प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


प्रदीप मिश्रा
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