बस्तर दशहरा में राष्ट्रपति की एंट्री! 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार में होंगी द्रौपदी मुर्मु
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :-सौरभ साहू
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निमंत्रण पर राष्ट्रपति ने स्वीकार किया आमंत्रण, जगदलपुर में होने वाले मुरिया दरबार में रहेंगी मौजूद
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और लोक परंपराओं की पहचान बन चुके बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में इस बार देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की मौजूदगी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निमंत्रण पर राष्ट्रपति ने 23 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर में आयोजित होने वाले मुरिया दरबार में शामिल होने का आमंत्रण स्वीकार कर लिया है। इस संबंध में राष्ट्रपति को मुख्यमंत्री का निमंत्रण पत्र सौंपे जाने के अवसर पर केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर लोकसभा सांसद महेश कश्यप तथा संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन मौजूद रहे। इस कार्यक्रम की जानकारी 28 सितंबर को सार्वजनिक हुई।

मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की मौजूदगी क्यों खास
मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट जनजातीय परंपराओं, लोक आस्था और सामुदायिक सहभागिता के लिए जाना जाता है। राष्ट्रपति मुर्मु ने फरवरी 2026 में जगदलपुर में बस्तर पंडुम के शुभारंभ के अवसर पर बस्तर दशहरा को जनजातीय संस्कृति और भाईचारे का अनूठा उदाहरण बताया था। उन्होंने अपनी विरासत को संरक्षित रखते हुए आधुनिक विकास को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।
ऐसे में 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की प्रस्तावित मौजूदगी बस्तर की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने वाला अवसर होगी।
बस्तर की परंपरा में मुरिया दरबार की अलग पहचान
मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल है। इसे बस्तर की सामाजिक और सामुदायिक व्यवस्था से जोड़कर देखा जाता है, जहां परंपरागत सामाजिक पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय के बीच संवाद की परंपरा दिखाई देती है।
बस्तर की पारंपरिक व्यवस्था में मांझी और चालकी जैसे पदों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राष्ट्रपति मुर्मु ने जुलाई 2026 में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर बात की थी। राष्ट्रपति भवन की वेबसाइट पर इस मुलाकात का संबोधन भी दर्ज है।

बस्तर की संस्कृति से राष्ट्रपति का जुड़ाव
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर से जुड़ाव इस वर्ष उनके कई कार्यक्रमों में दिखाई दिया है। फरवरी में उन्होंने जगदलपुर में बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ किया था। उस दौरान उन्होंने बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपातों और गुफाओं को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि बस्तर की समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक विकास को आगे बढ़ाना जरूरी है।
जुलाई में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी उन्होंने जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय परंपराओं के संरक्षण से जुड़े विषयों पर बात की थी।
संस्कृति मंत्री ने बताया गौरव का अवसर
छत्तीसगढ़ के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की ऐसी सांस्कृतिक परंपरा है, जिसकी पहचान प्रदेश से बाहर भी है। उनके अनुसार मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की मौजूदगी बस्तर की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए विशेष अवसर है।
उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति यहां के जनजीवन, लोक आस्था, कला, परंपराओं और प्रकृति से गहराई से जुड़ी है। राज्य सरकार का प्रयास है कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन के माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसर भी बढ़ाए जाएं।
23 अक्टूबर को जगदलपुर में होने वाला मुरिया दरबार इसलिए भी खास रहेगा क्योंकि इस आयोजन में राष्ट्रपति की प्रस्तावित उपस्थिति बस्तर की पारंपरिक सांस्कृतिक व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर देखने का अवसर देगी। अब बस्तर की नजर 23 अक्टूबर को होने वाले इस आयोजन पर है।
प्रदीप मिश्रा
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