बारिश में डटे ग्रामीणों से तीन दिन चला संवाद, टेंट रुकवाने से भूमिपूजन तक पहुंचा छाल का मामला
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रायगढ़, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
छाल खदान विस्तार जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों की मांगों पर बनीसहमति – 13 मांगों को लेकर ग्रामीणों ने रोकी थी जनसुनवाई की तैयारी, लिखित-मौखिक आश्वासन के बाद 29 सितंबर की जनसुनवाई को समर्थन; अब मांगों के अमल पर रहेगी नजर
रायगढ़ ACGN:- धरमजयगढ़ क्षेत्र की छाल खुली खदान के विस्तार को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच का गतिरोध आखिरकार तीन दिनों तक चली लगातार बातचीत के बाद फिलहाल समाप्त हो गया।

जिस जनसुनवाई स्थल पर बारिश के बीच ग्रामीण टेंट-पंडाल लगाने का काम रुकवाकर अपनी मांगों को लेकर डटे हुए थे, उसी स्थान पर सहमति बनने के बाद पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चार के बीच भूमिपूजन किया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रबंधन की ओर से दिए गए लिखित एवं मौखिक आश्वासन के बाद 29 सितंबर 2026 को प्रस्तावित जनसुनवाई में सहयोग करने पर सहमति जताई है।

एसईसीएल की छाल खुली खदान की उत्पादन क्षमता को 60 लाख टन से बढ़ाकर 1.20 करोड़ टन किए जाने के प्रस्ताव के बीच खेड़ापाली, बांधापाली सहित प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने 13 सूत्रीय मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की थी। ग्रामीणों का कहना था कि खदान विस्तार का सवाल केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जमीन, मकान, खेती, रोजगार, पुनर्वास, पेयजल, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय लोगों की सुरक्षा जैसे कई सीधे सवाल जुड़े हुए हैं।
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प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले जब स्थल पर टेंट और पंडाल लगाने की तैयारी शुरू हुई तो ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग मौके पर पहुंचे और तैयारियां रुकवा दीं। ग्रामीणों का कहना था कि पुरानी और लंबित मांगों पर ठोस निर्णय तथा आश्वासन के बिना जनसुनवाई की तैयारी स्वीकार नहीं की जाएगी। सूचना के बाद पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत शुरू की।

ग्रामीणों की चिंता केवल नई परियोजना को लेकर नहीं थी, बल्कि पहले से खदान और रेलवे परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों की समस्याओं को लेकर भी थी। खेदापाली के ग्रामीणों के अनुसार गांव की करीब 80 प्रतिशत जमीन पहले ही एसईसीएल की छाल उपक्षेत्र परियोजना और रेलवे के लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया में जा चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि बची हुई जमीन खदान, रेलवे लाइन और सिंचाई जलाशय के बीच सीमित होकर ऐसी स्थिति में पहुंच गई है, जिसे वे लगभग टापू जैसी स्थिति बताते हैं। ग्रामीणों ने शेष भूमि का भी उचित तरीके से अधिग्रहण कर प्रभावित परिवारों के समुचित पुनर्वास और मुआवजे की मांग रखी।

ग्रामीणों ने खदान में होने वाली ब्लास्टिंग से मकानों में दरार और नुकसान होने का दावा करते हुए मकानों की सुरक्षा जांच और दोबारा सर्वे कराने की मांग की। इसके साथ ही कोयला परिवहन के दौरान उड़ने वाली धूल, खदान की गहराई बढ़ने के साथ भूजल स्तर पर पड़ने वाले कथित असर, कृषि भूमि की उत्पादकता और भारी वाहनों की आवाजाही से दुर्घटना के खतरे का मुद्दा भी उठाया गया। ग्रामीणों ने कहा कि खनन और परिवहन गतिविधियां बढ़ने की स्थिति में किसानों, स्थानीय लोगों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था जरूरी है।

बांधापाली के ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याओं को प्रमुखता से सामने रखा। उनके अनुसार पेयजल, बिजली, सड़क और स्कूल बस जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है। अधूरे मकान सर्वे को दोबारा कराने, वर्तमान में वयस्क हो चुके प्रभावित परिवारों को पुनर्वास का लाभ देने और जिन परिवारों को अब तक पुनर्वास नहीं मिला है, उन्हें निर्धारित व्यवस्था के अनुसार जमीन या मुआवजा देने की मांग रखी गई। कम रकबे वाले प्रभावित भू-स्वामियों को रोजगार, संयुक्त खाते की पूरी जमीन अधिग्रहित होने की स्थिति में प्रभावित परिवार के सदस्यों को रोजगार तथा भूमिहीन प्रभावित परिवारों के लिए भी रोजगार की मांग सामने आई।
ग्रामीणों के अनुसार बांधापाली में करीब 60 से 70 एकड़ निजी जमीन का मामला भी लंबित है, जिसे एसईसीएल द्वारा अब तक अधिग्रहित नहीं किया गया है। ग्रामीणों ने इस मामले का समाधान करने के साथ प्रस्तावित पुनर्वास स्थल को लेकर भी आपत्तियां रखीं।
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मामला जमीन और रोजगार से आगे बढ़कर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचा। प्रभावित बच्चों के एसईसीएल संचालित डीएवी स्कूल में प्रवेश की समस्या, एंबुलेंस और स्वास्थ्य सुविधा, पेयजल, बिजली, सड़क, स्कूल बस तथा क्षेत्र की कुछ खराब स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा उठाया गया। ग्रामीणों ने स्थानीय स्तर पर सीएसआर और सामुदायिक विकास कार्यों को लेकर भी अपनी असंतुष्टि व्यक्त की और क्षेत्र के विकास के लिए अपेक्षित कार्य किए जाने की मांग रखी।

ग्रामीणों ने पूर्व में हुई कार्रवाई और पत्राचार का हवाला देते हुए तहसीलदार छाल के आदेश क्रमांक 699/2022 दिनांक 27 अक्टूबर 2022 तथा एसईसीएल उपक्षेत्रीय प्रबंधन के पत्र क्रमांक 3001/2022 दिनांक 12 दिसंबर 2022 से जुड़े मामलों के निराकरण की मांग भी सामने रखी। इन मुद्दों के समाधान के बिना जनसुनवाई को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बना हुआ था।
तीन दिन की बातचीत ने बदली तस्वीर
ग्रामीणों के विरोध के बाद प्रशासन ने मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने की दिशा में प्रयास तेज किए। प्रशासन, पुलिस, ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच लगातार बैठकों का दौर चला। करीब तीन दिनों तक मांगों और उनके संभावित निराकरण को लेकर चर्चा होती रही।
शनिवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में धरमजयगढ़ एसडीएम, छाल तहसीलदार लोमेश मिरी, खरसिया एसडीओपी, छाल थाना प्रभारी अनवर अली खान, सीसीएल महाप्रबंधक रायगढ़ मनोज कुमार तथा छाल उपक्षेत्रीय प्रबंधक के.सी. सुरेंद्रनाथ सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में ग्रामीणों की मांगों को बिंदुवार सुना गया और नियमानुसार उनके निराकरण को लेकर चर्चा हुई।

बातचीत के बाद प्रशासन और प्रबंधन की ओर से ग्रामीणों को लिखित और मौखिक आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई। ग्रामीणों के अनुसार प्रमुख मांगों में नौकरी की मांग स्वीकार किए जाने तथा अन्य मांगों के निराकरण की दिशा में सहमति बनी। इसके बाद ग्रामीणों ने 29 सितंबर को प्रस्तावित जनसुनवाई में सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की।

जहां विरोध में रुका था टेंट, वहीं हुआ भूमिपूजन
सहमति बनने के बाद जनसुनवाई स्थल का माहौल भी पूरी तरह बदलता नजर आया। जिस मैदान में कुछ समय पहले ग्रामीण बारिश के बीच डटे हुए थे और टेंट लगाने की तैयारी रुकवा दी थी, वहीं बाद में स्थानीय परंपरा के अनुसार देवी-देवताओं का आवाहन कर पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चार किया गया।
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इसके बाद एसईसीएल महाप्रबंधक रायगढ़ मनोज कुमार, छाल उपक्षेत्रीय प्रबंधक के.सी. सुरेंद्रनाथ तथा वरिष्ठ ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से श्रीफल फोड़कर भूमिपूजन किया। इस दौरान क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति तथा 29 सितंबर को प्रस्तावित जनसुनवाई के शांतिपूर्ण और सफल आयोजन के लिए प्रार्थना की गई।
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भूमिपूजन कार्यक्रम में जनसुनवाई के नोडल अधिकारी के.के. भोई, एरिया कार्मिक विभाग से ए.डी. टंडन, छाल कार्मिक विभाग से रामा कृष्ण, राजस्व विभाग से सेठी, सिविल विभाग से मिश्रा, सुरक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा मजदूर संगठनों की ओर से यूनियन प्रतिनिधि डी.एल. ग्वालबंसी, आशीष पटेल, सुरेश सिंह, नानकी साहू, रिपु पांडे, बेनू गबेल और घनश्याम सिदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

अब 29 सितंबर पर टिकी नजर
छाल खदान विस्तार को लेकर बारिश में टेंट रुकवाने से शुरू हुआ विरोध अब तीन दिन की बातचीत, लिखित-मौखिक आश्वासन और ग्रामीणों की सहमति तक पहुंच चुका है। 29 सितंबर 2026 को प्रस्तावित जनसुनवाई में परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, रोजगार, मकान, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क सुरक्षा और अन्य स्थानीय समस्याओं से जुड़े मुद्दे सामने आने की संभावना है। ग्रामीणों के लिए यह जनसुनवाई अपनी आपत्तियां, सुझाव और मांगें आधिकारिक रूप से रखने का मंच होगी। वहीं प्रबंधन और प्रशासन का पक्ष भी इसी प्रक्रिया में सामने आएगा। तीन दिनों की बातचीत के बाद फिलहाल गतिरोध जरूर समाप्त हुआ है, लेकिन जिन मांगों पर आश्वासन दिया गया है, उनका वास्तविक निराकरण और समयबद्ध क्रियान्वयन आगे महत्वपूर्ण रहेगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट किया है कि छाल खदान विस्तार का मामला केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसके साथ जमीन, पुनर्वास, रोजगार, पर्यावरण, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय लोगों की सुरक्षा जैसे सवाल भी जुड़े हुए हैं। अब 29 सितंबर की जनसुनवाई में इन मुद्दों पर ग्रामीणों, प्रशासन और प्रबंधन की बात आधिकारिक रूप से सामने आएगी।
अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़ द्वारा इस मामले में प्रशासन और प्रबंधन की आधिकारिक जानकारी तथा आगे होने वाली कार्रवाई को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
प्रदीप मिश्रा
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