लाखों मामलों का निपटारा, फिर भी 398 प्रकरण बाकी- लोक अदालत में जीपीएम की बड़ी उपलब्धि
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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
2.53 लाख से अधिक प्रकरणों में 2,52,967 का निराकरण, बंटवारे और नामांतरण के मामलों में भी दिखी तेजी
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ACGN:- राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने राजस्व प्रकरणों के निराकरण में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। जिला प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार लोक अदालत के लिए राजस्व न्यायालयों में कुल 2 लाख 53 हजार 365 प्रकरण रखे गए थे, जिनमें से 2 लाख 52 हजार 967 मामलों का निराकरण किया गया। यानी अधिकांश प्रकरणों का समाधान होने से बड़ी संख्या में पक्षकारों को लंबी प्रक्रिया से राहत मिली।
राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों का निराकरण पक्षकारों की सहमति, आपसी सुलह और सरल प्रक्रिया के माध्यम से किया गया। लंबे समय से लंबित मामलों को एक साथ समाधान का अवसर मिलने से नागरिकों का समय और संसाधन बचा, वहीं राजस्व न्यायालयों पर लंबित मामलों का दबाव भी कम हुआ।
बंटवारे के मामलों में भी हुआ समाधान
लोक अदालत में खातेदारों के बीच आपसी बंटवारे से जुड़े 23 मामले रखे गए थे, जिनमें 22 का निराकरण किया गया। वारिसों के बीच बंटवारे के 19 मामलों में से 18 और कब्जे के आधार पर बंटवारे के 7 मामलों में से 6 मामलों का समाधान हुआ।
धारा 145 से संबंधित सभी 10 प्रकरणों का निराकरण किया गया। रेंट कंट्रोल एक्ट से संबंधित एकमात्र प्रकरण भी पूरी तरह निपटाया गया। वहीं विक्रय पत्र, दानपत्र और वसीयतनामा के आधार पर नामांतरण के 73 मामलों में से 72 का निराकरण किया गया।
अन्य राजस्व मामलों में भी बड़ी संख्या में निपटारा
आंकड़ों के अनुसार अन्य प्रकृति के 2,152 प्रकरण लोक अदालत में रखे गए थे, जिनमें से 2,139 मामलों का समाधान किया गया। इसके अलावा अन्य विभागों से संबंधित 2 लाख 51 हजार 80 प्रकरणों को भी लोक अदालत में रखा गया था। इनमें से 2 लाख 50 हजार 699 प्रकरणों का निराकरण किया गया।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि लोक अदालत के दौरान बड़ी संख्या में मामलों को एक ही प्रक्रिया के माध्यम से समाधान तक पहुंचाया गया। हालांकि कुल 2,53,365 मामलों में से 398 प्रकरणों का निराकरण नहीं हो सका, जिन पर आगे नियमानुसार प्रक्रिया जारी रहना अपेक्षित है।
सहमति से समाधान ने आसान की न्याय की राह
राष्ट्रीय लोक अदालत का मूल उद्देश्य पक्षकारों को आपसी सहमति और सुलह के माध्यम से त्वरित, सरल और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। सामान्य न्यायिक प्रक्रिया में लंबे समय तक चलने वाले मामलों में यदि दोनों पक्ष सहमति से समाधान के लिए तैयार हों, तो लोक अदालत उनके लिए समय और खर्च बचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
जीपीएम में बड़ी संख्या में राजस्व मामलों के निराकरण से उन नागरिकों को राहत मिली है, जो लंबे समय से बंटवारे, नामांतरण, कब्जे या अन्य राजस्व विवादों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे थे।
न्याय व्यवस्था का बोझ घटाने में मदद
लोक अदालत में इतने बड़े पैमाने पर प्रकरणों के निराकरण से राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम करने में भी मदद मिली है। साथ ही पक्षकारों के बीच आपसी सहमति और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की भावना को बढ़ावा मिला।
जीपीएम जिले की यह उपलब्धि त्वरित और सुलभ न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब जरूरत इस बात की है कि लोक अदालतों के माध्यम से जिन मामलों में समाधान संभव है, उन्हें समय पर चिन्हित कर पक्षकारों को इस वैकल्पिक व्यवस्था का अधिक से अधिक लाभ दिलाया जाए, ताकि छोटे और सहमति योग्य विवाद लंबे समय तक लंबित न रहें।
प्रदीप मिश्रा
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