डिजिटल जाल में फंस रहे लोग, अब साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस का बड़ा संकल्प
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर
1930 हेल्पलाइन से लेकर गांव-गांव जागरूकता तक, विद्यार्थियों को बनाया जाएगा साइबर सुरक्षा का प्रहरी
रायपुर ACGN: तेजी से बढ़ते डिजिटल लेनदेन के साथ साइबर अपराध भी लगातार नए रूप में सामने आ रहे हैं। इसी चुनौती से निपटने और आम लोगों को साइबर ठगी के आधुनिक तरीकों से सावधान करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘साइबर जागृति अभियान’ के तहत 12 सितंबर 2026 को पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के सभागार में विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विश्वविद्यालय और रायपुर के विभिन्न महाविद्यालयों से 500 से अधिक विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

‘साइबर संकल्प’ की शुरुआत, नौ वीडियो मॉड्यूल में मिलेगी डिजिटल सुरक्षा की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा ने ‘साइबर संकल्प’ नामक नौ मॉड्यूल वाले वीडियो पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रत्येक वीडियो की अवधि लगभग 5 से 6 मिनट रखी गई है। इसका उद्देश्य आम नागरिकों को सरल भाषा में साइबर अपराध के बदलते तरीकों, डिजिटल धोखाधड़ी की पहचान और उससे बचाव के उपायों की जानकारी उपलब्ध कराना है।
छत्तीसगढ़ पुलिस का यह अभियान 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है। अभियान के माध्यम से लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

विद्यार्थियों से सीधा संवाद, 1930 पर तत्काल सूचना देने की अपील
विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा ने डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों को गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि भारत में डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ा है और डिजिटल व्यवस्था ने लोगों के जीवन को काफी आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधियों के लिए भी धोखाधड़ी के नए रास्ते खुले हैं।
उन्होंने साइबर ठगी का शिकार होने पर किसी भी प्रकार की देरी न करते हुए तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करने की अपील की। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि साइबर जागरूकता केवल कॉलेज और शहर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

एक करोड़ से अधिक की डिजिटल ठगी, 60 लाख रुपये वापस मिलने की कहानी ने चौंकाया
कार्यक्रम में साइबर अपराध से पीड़ित लोगों ने अपनी आपबीती भी साझा की। एक करोड़ रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी के शिकार डॉ. सेन ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जाल में फंसने का अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किया।
उन्होंने बताया कि समय रहते पुलिस से संपर्क करने के कारण ठगी गई राशि में से 60 लाख रुपये वापस प्राप्त हो सके। इस घटना ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि साइबर ठगी के बाद घबराने या चुप बैठने के बजाय तत्काल पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना बेहद जरूरी है। साइबर अपराध में शुरुआती समय को महत्वपूर्ण माना जाता है और इसी वजह से तत्काल शिकायत करना रकम की रिकवरी में मददगार हो सकता है।

साइबर क्राइम वालंटियर बनकर लोग भी बन सकते हैं जागरूकता अभियान का हिस्सा
केंद्रीय गृह मंत्रालय एवं i4C द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए साइबर क्राइम वालंटियर की पहल भी की जा रही है। इसका उद्देश्य लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को बढ़ावा देने में नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करना है।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों को साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बताने तथा जागरूकता अभियान का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताए साइबर अपराध के बदलते तरीके
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्तवार्ता) श्री अमित कुमार ने साइबर अपराधों के नए तरीकों से सावधान रहने तथा ऑनलाइन सुरक्षा मानकों का पालन करने की सलाह दी। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त श्री गौरव मंडल ने विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों और उनसे बचने के व्यवहारिक उपायों की जानकारी विद्यार्थियों को दी।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला ने कहा कि साइबर अपराध तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों का जागरूक होना बेहद जरूरी है। उन्होंने साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए इस तरह के कार्यक्रमों को महत्वपूर्ण बताया।

पुलिस और विश्वविद्यालय के अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्तवार्ता) श्री अमित कुमार, पुलिस आयुक्त रायपुर डॉ. संजीव शुक्ला, पुलिस महानिरीक्षक (तकनीकी सेवाएं) श्री प्रशांत अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रायपुर श्री अमित तुकाराम कांबले, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला एवं कुलसचिव श्री शैलेंद्र पटेल सहित पुलिस एवं विश्वविद्यालय के अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में पुलिस आयुक्त रायपुर डॉ. संजीव शुक्ला ने मुख्य अतिथि, विश्वविद्यालय प्रशासन, पुलिस अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और उपस्थित नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

सवाल सिर्फ ठगी का नहीं, जागरूकता का भी है
साइबर अपराधी रोज नए तरीके अपना रहे हैं। कभी डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराया जाता है, कभी बैंक अधिकारी बनकर जानकारी मांगी जाती है तो कभी लिंक, ओटीपी, केवाईसी और निवेश के नाम पर लोगों को निशाना बनाया जाता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हर मोबाइल उपयोगकर्ता इन खतरों को पहचानने के लिए तैयार है?

‘साइबर जागृति अभियान’ और ‘साइबर संकल्प’ के माध्यम से पुलिस ने इसी सवाल का जवाब जागरूकता के रूप में देने की कोशिश की है। जरूरत इस बात की है कि साइबर सुरक्षा की जानकारी केवल कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि परिवार और समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचे।
प्रदीप मिश्रा
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