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54 दिन गायब रहा आरक्षक, 51 बार चेतावनी भी बेअसर… आखिर पुलिस सेवा से बाहर!

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बिलासपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009


बार-बार गैरहाजिरी और सजा के बाद भी नहीं सुधरा आचरण, विभागीय जांच में दोनों आरोप प्रमाणित होने पर गृह विभाग ने उठाया कड़ा कदम

बिलासपुर ACGN:- पुलिस विभाग में अनुशासन को लेकर एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। रक्षित केन्द्र बिलासपुर में पदस्थ आरक्षक क्रमांक 343 दिनेश प्रधान को विभाग ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दंड दिया है। विभागीय अंतिम आदेश में उसके खिलाफ लगाए गए दोनों आरोप प्रमाणित पाए गए हैं। आदेश के अनुसार आरक्षक अलग-अलग मौकों पर कुल 54 दिनों तक बिना किसी सूचना के कर्तव्य से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहा। लंबे सेवाकाल में कई बार दंड और चेतावनी मिलने के बावजूद उसके आचरण में अपेक्षित सुधार नहीं आने को भी विभाग ने गंभीरता से लिया।
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार आरक्षक दिनेश प्रधान की पहली बड़ी अनुपस्थिति 30 नवंबर 2023 से 3 जनवरी 2024 तक 32 दिनों की रही। उसे 29 नवंबर 2023 को जिला बीजापुर में डाक वितरण ड्यूटी के लिए रवाना किया गया था और डाक वितरण के बाद उसे वापस लौटना था। निर्धारित समय पर वापस नहीं आने पर रक्षित केन्द्र में उसकी गैरहाजिरी दर्ज की गई। करीब 32 दिन बाद 3 जनवरी 2024 को उसके ड्यूटी पर लौटने की आमद दर्ज की गई।
इसके बाद सितंबर 2024 में एक बार फिर आरक्षक की अनुपस्थिति का मामला सामने आया। उसे पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र मैनपाट में पीपी कोर्स के लिए रवाना किया गया था। आदेश में उल्लेख है कि उसके द्वारा पीपी कोर्स करने में असमर्थता जाहिर करने के बाद उसे 10 सितंबर 2024 को मूल इकाई बिलासपुर वापस किया गया। इसके बाद वह बिना किसी सूचना के अनुपस्थित रहा और 3 अक्टूबर 2024 को वापस रक्षित केन्द्र बिलासपुर पहुंचा। इस अवधि को 22 दिनों की अनधिकृत गैरहाजिरी माना गया। दोनों अवधियों को मिलाकर कुल 54 दिन की अनुपस्थिति दर्ज की गई।


इस पूरे मामले की प्राथमिक जांच रक्षित निरीक्षक बिलासपुर भूपेन्द्र गुप्ता से कराई गई। जांच में यह पाया गया कि आरक्षक ने बिना सूचना के लगातार कर्तव्य से दूरी बनाई और पुलिस रेग्युलेशन में निर्धारित अनुशासनात्मक प्रावधानों का उल्लंघन किया। विभागीय जांच में इसे कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही, उदासीनता और अनुशासनहीनता के रूप में देखा गया।
मामला यहीं तक सीमित नहीं था। विभागीय आदेश में दर्ज सेवा इतिहास के मुताबिक आरक्षक दिनेश प्रधान पुलिस विभाग में 20 अगस्त 1987 को भर्ती हुआ था। उसके पूरे सेवाकाल में 44 ईनाम, 21 छोटी सजा और 4 बड़ी सजा का उल्लेख किया गया है। अनधिकृत अनुपस्थिति के मामलों में भी उसके खिलाफ कई बार एलआर-24 की कार्रवाई की गई। आदेश में यह संख्या 51 बार बताई गई है। विभाग का कहना है कि सेवा आचरण में सुधार का पर्याप्त अवसर मिलने के बाद भी उसके व्यवहार में अपेक्षित परिवर्तन नहीं आया।
इसी सेवा इतिहास और हाल की 54 दिनों की अनधिकृत अनुपस्थिति के आधार पर उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। जांच में दो मुख्य आरोप लगाए गए। पहला आरोप 54 दिनों तक बिना सूचना कर्तव्य से अनुपस्थित रहने और पुलिस रेग्युलेशन की कंडिका 64(2) का उल्लंघन करने से संबंधित था। दूसरा आरोप पूर्व में बार-बार एलआर-24 और बड़ी सजाएं मिलने के बावजूद अपने आचरण में सुधार नहीं लाने तथा पदीय कर्तव्यों के निर्वहन के लिए अनुपयुक्तता से जुड़ा था।
विभागीय जांच अधिकारी उप पुलिस अधीक्षक अनिताप्रभा मिंज और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी निरीक्षक मानकुँवर सिदार की ओर से जांच की कार्यवाही पूरी की गई। विभागीय जांच में दोनों आरोप प्रमाणित पाए गए। इसके बाद जांच उपपत्ति की प्रति आरक्षक को उपलब्ध कराते हुए अपना पक्ष रखने के लिए अवसर दिया गया। आदेश के अनुसार निर्धारित अवधि में अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया। बाद में 25 अगस्त 2026 को पुनः अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद आरक्षक की ओर से कोई प्रभावी बचाव प्रस्तुत नहीं किया गया।
विभाग ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि आरक्षक को बचाव के लिए न्यायसंगत और पर्याप्त अवसर दिए गए, लेकिन उसका रवैया असहयोगात्मक रहा। विभागीय जांच के दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के पुनः परीक्षण के बाद दोनों आरोपों को पूर्ववत प्रमाणित माना गया।
दंड तय करने से पहले विभाग ने आरक्षक के लंबे सेवाकाल और पूर्व सेवा इतिहास पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार किया। हालांकि विभागीय आदेश में कहा गया कि पूर्व में दी गई बड़ी सजाओं के बावजूद उसके आचरण में सुधार नहीं आया और लगातार सेवा नियमों के विपरीत आचरण सामने आता रहा। इसी आधार पर उसके कृत्य को गंभीर और अक्षम्य मानते हुए पुलिस सेवा में बने रहने की उपयुक्तता पर सवाल उठाया गया।
अंततः पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के हस्ताक्षर से जारी अंतिम आदेश में आरक्षक क्रमांक 343 दिनेश प्रधान को आदेश प्राप्त होने की तारीख से अनिवार्य सेवा निवृत्ति (Compulsory Retirement) का दंड दिया गया है। साथ ही 30 नवंबर 2023 से 3 जनवरी 2024 तथा 11 सितंबर 2024 से 3 अक्टूबर 2024 तक की कुल 54 दिनों की अनधिकृत अनुपस्थिति अवधि को एलआर-24 के तहत “No Work, No Pay” के आधार पर निराकृत करने का आदेश दिया गया है। आदेश के विरुद्ध अपील के लिए 45 दिनों की अवधि निर्धारित की गई है।
यह कार्रवाई पुलिस जैसे अनुशासित बल में ड्यूटी से अनधिकृत अनुपस्थिति और लगातार अनुशासनहीनता को लेकर विभाग के सख्त रुख को भी सामने लाती है। हालांकि अंतिम आदेश में विभाग ने आरक्षक को अपना पक्ष रखने के पर्याप्त अवसर दिए जाने का उल्लेख किया है, वहीं अब अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश के बाद इस मामले का अगला कानूनी या विभागीय चरण अपीलीय प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।


प्रदीप मिश्रा
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