नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 7647981711 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , डिग्री बांटना नहीं, भविष्य बनाना है! राज्यपाल डेका ने निजी विश्वविद्यालयों को दिखाई शिक्षा की नई राह – Anjor Chhattisgarh News

Anjor Chhattisgarh News

सच की तह तक

डिग्री बांटना नहीं, भविष्य बनाना है! राज्यपाल डेका ने निजी विश्वविद्यालयों को दिखाई शिक्षा की नई राह

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर

NAAC ग्रेडिंग से लेकर PhD की गुणवत्ता तक समीक्षा, रोजगारपरक पाठ्यक्रम और सामाजिक जिम्मेदारी पर राज्यपाल का जोर

रायपुर ACGN:- विद्यार्थियों का कल्याण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाली संस्थाएं नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और समाज की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र हैं। यह बात राज्यपाल श्री रमेन डेका ने निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक में कही।
राज्यपाल ने गुरुवार को निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ बैठक कर शिक्षा, शोध, पाठ्यक्रम, विद्यार्थियों की संख्या, NAAC ग्रेडिंग और विश्वविद्यालयों के सामाजिक दायित्वों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की। उन्होंने विश्वविद्यालयों को शिक्षा की गुणवत्ता के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।


राज्यपाल ने निजी विश्वविद्यालयों को NAAC में बेहतर ग्रेडिंग प्राप्त करने के लिए आवश्यक तैयारियां करने को कहा। उन्होंने शिक्षक और विद्यार्थियों के अनुपात को संतुलित रखने के साथ विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया। प्रत्येक विश्वविद्यालय में कम से कम 1000 विद्यार्थियों की संख्या सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने को कहा गया।
            PhD की गुणवत्ता पर रहेगी नजर
राज्यपाल श्री डेका ने PhD की उपाधि प्रदान करने की प्रक्रिया को पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री प्रदान करना विश्वविद्यालयों का उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे शोध कार्यों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए जिनका समाज और देश के विकास में वास्तविक योगदान हो।
उन्होंने PhD के लिए होने वाले पंजीयनों की विशेषज्ञों के माध्यम से रैंडम चेकिंग कराने की बात कही, ताकि शोध की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
       रोजगार देगा वही पाठ्यक्रम, जिसकी जरूरत होगी
राज्यपाल ने कहा कि कोई भी नया पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले संबंधित क्षेत्र में सर्वेक्षण कर विद्यार्थियों की रुचि और रोजगार की संभावनाओं का आकलन किया जाना चाहिए। जिन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की रुचि नहीं है, उन्हें बंद करने पर भी विचार किया जाए।
उन्होंने अनावश्यक रूप से पाठ्यक्रमों की संख्या बढ़ाने के बजाय रोजगार और भविष्य की संभावनाओं वाले विषयों को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई। एनवायरनमेंटल साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा देने पर भी राज्यपाल ने जोर दिया।
          गांवों की जिम्मेदारी भी विश्वविद्यालयों की
राज्यपाल श्री डेका ने निजी विश्वविद्यालयों से अपने आसपास के गांवों को गोद लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नियमित कार्यक्रम चलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने सामाजिक दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करना चाहिए।
गोद लिए गए गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों के साथ ब्रेस्ट कैंसर सर्वे जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी विश्वविद्यालयों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही गई।
    विद्यार्थियों के जीवन में योग और ध्यान को मिले जगह
राज्यपाल ने विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग एवं ध्यान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विश्वविद्यालयों से प्रत्येक विद्यार्थी तक योग पहुंचाने का प्रयास करने को कहा, ताकि योग केवल किसी कार्यक्रम का हिस्सा न रहकर विद्यार्थियों की दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बन सके।
         छत्तीसगढ़ी भाषा पर शोध को मिले बढ़ावा
राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए विश्वविद्यालयों को शोध एवं अकादमिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा से जुड़े विषयों पर शोध विश्वविद्यालयों के माध्यम से भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
         फार्मेसी की पढ़ाई में प्रैक्टिकल प्रशिक्षण जरूरी
फार्मेसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता को लेकर भी राज्यपाल ने गंभीरता दिखाई। उन्होंने कहा कि फार्मेसी सीधे मानव स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है, इसलिए विद्यार्थियों को बेहतर व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
इसके लिए फार्मेसी संचालित करने वाले विश्वविद्यालयों को प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ टाई-अप करने और पाठ्यक्रम की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
नशे से युवाओं को दूर रखने में विश्वविद्यालय निभाएं भूमिका
राज्यपाल ने युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से जागरूक करने के लिए विश्वविद्यालयों से नशा मुक्ति अभियानों में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रेरित करने में शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
राज्यपाल ने निजी विश्वविद्यालयों से शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, रोजगारपरक शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया, ताकि विश्वविद्यालयों से निकलने वाले विद्यार्थी केवल डिग्रीधारी न हों, बल्कि सक्षम, जिम्मेदार और समाज के लिए उपयोगी नागरिक बन सकें।
बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, उच्च शिक्षा सचिव श्री अविनाश चंपावत, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष श्री वी. के. गोयल सहित विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित रहे।

प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़।
आपके क्षेत्र में भी कोई महत्वपूर्ण खबर, जनसमस्या या जनहित का मुद्दा हो तो हमें इस नंबर पर भेजें।               7647981711, 9303948009।

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now