नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 7647981711 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , वंदे मातरम् की गूंज में दिखा राष्ट्र का सांस्कृतिक स्वरूप, राष्ट्रीय संगोष्ठी में हुआ गहन मंथन – Anjor Chhattisgarh News

Anjor Chhattisgarh News

सच की तह तक

वंदे मातरम् की गूंज में दिखा राष्ट्र का सांस्कृतिक स्वरूप, राष्ट्रीय संगोष्ठी में हुआ गहन मंथन

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊


कोलकाता, पश्चिम बंगाल

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- विनोद यादव कोलकाता

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में वंदे मातरम् को राष्ट्र, प्रकृति, भाषा, स्मृति और सभ्यतागत चेतना से जोड़कर देखने की हुई व्यापक चर्चा

कोलकाता ACGN:- देश की राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत में विशेष स्थान रखने वाले ‘वंदे मातरम्’ के स्थायी सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय महत्व को लेकर कोलकाता में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। 29 और 30 अगस्त 2026 को आयोजित इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वानों, साहित्यकारों और विषय विशेषज्ञों ने वंदे मातरम् के विविध आयामों पर अंतर-अनुशासनात्मक संवाद किया।


‘भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में वंदे मातरम् की पहचान’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी का आयोजन साहित्य अकादमी द्वारा भारतीय संग्रहालय, पूर्वी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (EZCC), संस्कृत कॉलेज एवं विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन साहित्यपथ और अखिल भारतीय साहित्य परिषद के सहयोग से किया गया।


संगोष्ठी में वंदे मातरम् के भूमि, भाषा, प्रकृति, ज्ञान, संस्कृति और करुणा के साथ गहरे संबंधों को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने का प्रयास किया गया। चर्चा का केंद्र यह रहा कि वंदे मातरम् को केवल देशभक्ति की भावना से जुड़ी रचना के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय समाज की व्यापक सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय कल्पना के महत्वपूर्ण पाठ के रूप में भी देखा जा सकता है।


प्रोफेसर नंदिनी साहू ने प्रस्तुत की अंतर-अनुशासनात्मक व्याख्या
उद्घाटन सत्र में माननीया कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू, हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल एवं अंग्रेजी की प्रोफेसर, मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने दूसरे दिन भी वक्ता एवं सत्र अध्यक्ष के रूप में अपनी सहभागिता निभाई।
अपने उद्घाटन संबोधन में प्रोफेसर साहू ने वंदे मातरम् की एक अंतर-अनुशासनात्मक व्याख्या प्रस्तुत करते हुए ग्रीन कल्चरल स्टडीज, ब्लू ह्यूमैनिटीज, हिंदू स्टडीज, भारतीय ज्ञान प्रणाली, लोक साहित्य और स्मृति संस्कृति जैसे विविध विषयों को एक साथ जोड़कर इसके व्यापक अर्थों को सामने रखा।
उन्होंने सहानुभूति, करुणा, लचीलेपन और समावेशिता जैसे मूल्यों पर विशेष जोर दिया। उनके अनुसार वंदे मातरम् को राष्ट्र और उसके पारिस्थितिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य के बीच संबंधों के माध्यम से भी समझा जा सकता है।


‘भूमि, जल, भाषा और करुणा’ के माध्यम से राष्ट्र की कल्पना
प्रोफेसर नंदिनी साहू की विद्वत्तापूर्ण प्रस्तुति का विषय ‘वंदे मातरम्: भूमि, जल, भाषा और करुणा के माध्यम से राष्ट्र की कल्पना’ रहा। इस प्रस्तुति में वंदे मातरम् को व्यापक सांस्कृतिक कल्पना के संदर्भ में स्थापित किया गया।
उन्होंने इसके माध्यम से यह विचार सामने रखा कि परिदृश्य पहचान का स्वरूप ले सकता है, प्रकृति स्मृति का आधार बन सकती है, भाषा अपनेपन की अनुभूति पैदा कर सकती है और करुणा सामूहिक जीवन का आधार बन सकती है।


           देशभर के विद्वानों ने साझा किए विचार
संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों एवं विविध अकादमिक विषयों का प्रतिनिधित्व करने वाले विद्वानों और साहित्यकारों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। उद्घाटन समारोह में साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक, साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. वरुण गुलाटी, डॉ. आशीष गिरी, डॉ. सायन भट्टाचार्य और डॉ. सुदीप बसु सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित रहे।
डॉ. माधव कौशिक एवं डॉ. वरुण गुलाटी ने संगोष्ठी के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करते हुए सार्थक बौद्धिक संवाद के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की संभावनाओं पर जोर दिया।


    देशभक्ति से आगे, सांस्कृतिक चेतना का व्यापक पाठ
संगोष्ठी के दौरान हुई चर्चाओं में वंदे मातरम् को केवल एक देशभक्ति रचना के पारंपरिक नजरिए से आगे ले जाकर राष्ट्र, प्रकृति, भाषा, स्मृति, पहचान और सभ्यतागत चेतना से जुड़े एक जटिल सांस्कृतिक पाठ के रूप में समझने का प्रयास किया गया।
दो दिवसीय इस बौद्धिक आयोजन ने यह रेखांकित किया कि वंदे मातरम् भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के साथ-साथ आज भी भारतीय सांस्कृतिक स्मृति और राष्ट्रीय चेतना के विमर्श में प्रासंगिक बना हुआ है।


संगोष्ठी ने विभिन्न विषयों और विचारधाराओं के विद्वानों को एक साझा मंच प्रदान करते हुए वंदे मातरम् के बहुआयामी अर्थों पर गंभीर विमर्श का अवसर दिया। इस प्रकार कोलकाता में आयोजित यह राष्ट्रीय संगोष्ठी साहित्य, संस्कृति, प्रकृति और राष्ट्र की अवधारणा के बीच संबंधों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बौद्धिक पहल के रूप में सामने आई।

प्रदीप मिश्रा
अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल ‘अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़’ हम लाते हैं निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबरें।
आपके क्षेत्र में भी कोई महत्वपूर्ण खबर, जनसमस्या या जनहित का मुद्दा हो तो हमें इस नंबर पर भेजें।
7647981711, 9303948009

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now