नक्सल हिंसा पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचे डॉ. प्रेमसाईं
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नारायणपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- नारायणपुर ब्यूरो
दंडवन, छिनारी और कलेपाल में पीड़ित परिवारों से की मुलाकात, आर्थिक सहायता, राशन एवं वस्त्र देकर दिया संबल
नारायणपुर ACGN:- अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों में जहां कभी नक्सल हिंसा का भय ग्रामीणों की जिंदगी पर भारी पड़ता था, वहीं अब सेवा और संवेदना के माध्यम से विश्वास की नई तस्वीर सामने आ रही है। मां मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर परम पूज्य गुरुजी डॉ. प्रेमसाईं महाराज ने नारायणपुर प्रवास के दौरान दंडवन, छिनारी और कलेपाल पहुंचकर नक्सल हिंसा में अपने परिजनों को खो चुके परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने पीड़ित परिवारों की स्थिति जानी और आर्थिक सहायता के साथ राशन सामग्री एवं वस्त्र प्रदान कर उनके साथ खड़े होने का संदेश दिया।
गुरुजी ने दंडवन में पंचम दास मानिकपुरी, छिनारी में सुखलाल गावड़े और कलेपाल में मानकु पोटाई के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने परिवारों की पीड़ा सुनी और वर्तमान परिस्थितियों की जानकारी ली। इस दौरान पंचम दास मानिकपुरी एवं सुखलाल गावड़े के परिजनों को 31-31 हजार रुपये तथा मानकु पोटाई के परिजनों को 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इसके अलावा जरूरत के अनुसार राशन सामग्री और वस्त्र भी सहयोग स्वरूप दिए गए।

परिवार के सदस्य की कमी कोई सहयोग पूरी नहीं कर सकता
डॉ. प्रेमसाईं महाराज ने कहा कि परिवार के किसी सदस्य को खोने के बाद उसकी कमी दुनिया का कोई भी सहयोग पूरा नहीं कर सकता। आर्थिक सहायता का उद्देश्य उसका प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर उन्हें यह भरोसा दिलाना है कि वे अकेले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इन परिवारों की वास्तविक स्थिति और उनकी आवश्यकताओं को समझना जरूरी है तथा उनकी समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाकर हर संभव सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

नक्सल हिंसा में मारे गए ग्रामीणों को बताया शहीद
डॉ. प्रेमसाईं महाराज ने कहा कि देश और क्षेत्र की सुरक्षा में तैनात जवानों के शहीद होने पर शासन, प्रशासन और समाज उनके परिवारों के साथ खड़ा होता है। इसी तरह नक्सल हिंसा में मारे गए निर्दोष ग्रामीणों की पीड़ा और संघर्ष को भी समझने की आवश्यकता है। उन्होंने हिंसा में जान गंवाने वाले ग्रामीणों को इस लड़ाई के नायक और शहीद बताते हुए समाज से उनके परिवारों के सम्मान और सहयोग की अपील की।
पीड़ित परिवारों के बीच गुरुजी की मौजूदगी से ग्रामीणों में भावुकता के साथ उत्साह भी देखने को मिला। उन्होंने ग्रामीणों को दर्द निवारक तेल तथा मां बगलामुखी माता के यज्ञ की भभूत प्रदान की और परिवार के सदस्यों से आत्मीय संवाद किया। दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचकर सेवा की इस पहल से ग्रामीणों को यह भरोसा मिला कि उनकी पीड़ा और समस्याओं को सुनने वाला कोई है।

शिक्षा के जरिए बदलेंगे अबूझमाड़ के बच्चों के भविष्य
डॉ. प्रेमसाईं महाराज का सेवा कार्य केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। नक्सलवाद के कारण वर्षों तक प्रभावित रहे क्षेत्रों में वे बच्चों के बीच पहुंचकर उन्हें शिक्षा के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जरूरतमंद बच्चों को किताबें, स्कूल बैग, चप्पल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर उनका उत्साह बढ़ाया जा रहा है।
उनका कहना है कि अब परिस्थितियां बदल रही हैं और बच्चों को नियमित रूप से स्कूल जाना चाहिए। शिक्षा के माध्यम से बच्चे अपने भविष्य को बेहतर बनाने के साथ अपने क्षेत्र और समाज का नाम भी रोशन कर सकते हैं।
गढ़बेंगाल राम मंदिर निर्माण समिति को 50 हजार का सहयोग
नारायणपुर प्रवास के दौरान डॉ. प्रेमसाईं महाराज गढ़बेंगाल स्थित राम मंदिर भी पहुंचे। यहां उन्होंने मंदिर निर्माण समिति के सदस्यों और श्रद्धालुओं से मुलाकात की। मंदिर निर्माण के लिए उन्होंने 50 हजार रुपये की सहयोग राशि प्रदान की तथा शीघ्र ही 50 हजार रुपये और सहयोग देने का आश्वासन दिया।

सेवा को बनाया साधना का माध्यम
अबूझमाड़ और बस्तर के दुर्गम क्षेत्रों में जरूरतमंदों के बीच लगातार पहुंचकर सेवा करने वाले डॉ. प्रेमसाईं महाराज की कार्यशैली क्षेत्र में अलग पहचान बना रही है। वे सेवा कार्यों में स्वयं आगे रहते हैं और जरूरतमंदों की सहायता को अपनी साधना का माध्यम मानते हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, पीड़ित परिवारों की सहायता तथा धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से वे ग्रामीणों के बीच सकारात्मकता और विश्वास का संदेश पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

बीहड़ों में पहुंच रही संवेदना
अबूझमाड़ के जिन दुर्गम इलाकों में कभी भय और हिंसा का माहौल रहा, वहां सेवा और संवेदना का पहुंचना बदलाव का संदेश देता है। नक्सल हिंसा से टूटे परिवारों के बीच जाकर उनकी पीड़ा सुनना, उन्हें सम्मान देना और यथासंभव सहयोग करना केवल राहत का प्रयास नहीं, बल्कि वर्षों से हिंसा का दंश झेल रहे परिवारों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में भी एक पहल है।
प्रदीप मिश्रा
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