छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक उड़ान, 2028 तक नई पहचान का लक्ष्य
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
चित्रकोट, सिरपुर से लेकर धार्मिक पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग तक व्यापक कार्ययोजना; निजी निवेश, स्थानीय रोजगार और संस्कृति संरक्षण पर जोर
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की तैयारी तेज हो गई है। पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने मंगलवार को नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस वार्ता में विभागों की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की एक नई पहचान देश और दुनिया के सामने स्थापित करना है।
प्रेस वार्ता में पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे, संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की डीजीएम श्रीमती पूनम शर्मा उपस्थित रहीं।
मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ को प्रकृति ने चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे जलप्रपात, बस्तर और सरगुजा की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, सिरपुर जैसी ऐतिहासिक विरासत तथा मां दंतेश्वरी और मां महामाया जैसे प्रमुख आस्था केंद्रों की अमूल्य विरासत दी है। सरकार इन प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपदाओं को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के साथ देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की दिशा में काम कर रही है।

पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा
मंत्री ने बताया कि पिछले लगभग ढाई वर्षों में पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। फिल्म सिटी निर्माण के लिए 203 करोड़ 53 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। फिल्म पर्यटन और बड़े आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए फिल्म सिटी एवं कन्वेंशन सेंटर के विकास की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 350 करोड़ रुपये है।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को लीज-सह-विकास मॉडल के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित करने की योजना है। इससे लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
61 ट्रेनों से 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए अयोध्या-काशी के दर्शन
श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के अंतर्गत आईआरसीटीसी के सहयोग से अब तक 61 ट्रेनों का सफल संचालन किया जा चुका है। इनके माध्यम से 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या और काशी के दर्शन कराए गए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के नागरिकों के लिए धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाना है।
होमस्टे से स्थानीय परिवारों को जोड़ने की तैयारी
पर्यटन का वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचाने के लिए होमस्टे और स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और युवाओं को पर्यटन से जोड़ने के अवसर बढ़ेंगे। वर्तमान में लगभग 390 से अधिक टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट तथा 26 होटल पंजीकृत हैं।
पर्यटक गाइड, आतिथ्य, फिल्म निर्माण, पर्यटन संचालन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर कम से कम 500 स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

चित्रकोट और सिरपुर को मिलेगी नई पहचान
मंत्री ने कहा कि चित्रकोट को केवल जलप्रपात तक सीमित न रखते हुए विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सिरपुर के विस्तृत पर्यटन विकास के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। मैनपाट और जशपुर जैसे प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में भी पर्यटक सुविधाओं और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के लिए भोरमदेव कॉरिडोर के विकास को महत्वपूर्ण कदम बताते हुए मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने इसके लिए 145 करोड़ 99 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। रतनपुर महामाया मंदिर क्षेत्र सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों के विकास के प्रस्ताव भी भारत सरकार को भेजे गए हैं।
डिजिटल पर्यटन को दिया जा रहा विस्तार
आज का पर्यटक अपनी यात्रा की शुरुआत मोबाइल फोन से करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पर्यटन विभाग की नई वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग, डिजिटल सूचना और पर्यटन सुविधाओं को एकीकृत किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन बुकिंग से लगभग 6 करोड़ 48 लाख रुपये तथा पर्यटन इकाइयों से लगभग 31 करोड़ 75 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के अंतर्गत अगले पांच वर्षों में प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रस्तावित पर्यटन नीति-2026 में सतत विकास, निजी निवेश, समुदाय आधारित पर्यटन और स्थानीय भागीदारी को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर होगी छत्तीसगढ़ की ब्रांडिंग
छत्तीसगढ़ की पर्यटन पहचान को राष्ट्रीय सीमाओं से आगे ले जाने के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर भागीदारी, फिल्म एवं ओटीटी आधारित प्रचार, अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटरीच तथा अंतरराष्ट्रीय इन्फ्लुएंसर फैम टूर जैसे प्रयास प्रस्तावित हैं। इको-एथनिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन को प्रदेश की वैश्विक पहचान का आधार बनाने की तैयारी है।
कलाकारों और साहित्यकारों के कल्याण पर भी जोर
संस्कृति विभाग की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि “कलाकार कल्याण कोष चिकित्सा अनुदान” योजना के अंतर्गत पिछले ढाई वर्षों में 70 कलाकारों को लगभग 30 लाख 3 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 20 कलाकारों को 15 लाख 30 हजार रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
“मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना” के माध्यम से नृत्य, संगीत, लोकनाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी भाषा में लेखन तथा अन्य शिल्प एवं लोककलाओं से जुड़े कलाकारों और लेखकों को संरक्षण एवं आर्थिक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 87 कलाकारों को लगभग 19 लाख 8 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई है।
वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों की आर्थिक सुरक्षा के लिए संचालित मासिक वित्तीय सहायता योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 407 आर्थिक रूप से अभावग्रस्त वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों को 82 लाख 12 हजार रुपये की राशि पेंशन के रूप में दी गई है। वर्तमान वर्ष में अब तक 121 वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों को योजना का लाभ दिया जा चुका है।
बस्तर की संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाने की पहल
प्रदेश के विभिन्न जिलों में सूचीबद्ध 89 विशिष्ट मेला-मड़ई, उत्सव-महोत्सव एवं समारोहों का आयोजन जिला प्रशासन के सहयोग से पूरे वर्ष किया जा रहा है। एलडब्ल्यूई प्रभावित जिलों में जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए स्थानीय परंपराओं, तीज-त्योहार, यात्रा, मेला-मड़ई तथा ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धार्मिक स्थलों पर सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन के लिए “आदि पर्व” पंचांग तैयार किया जा रहा है।
बस्तर की लोकपरंपरा और जनजातीय संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाने के लिए पिछले दो वर्षों से ग्रामीण, ब्लॉक एवं जिला स्तर पर “बस्तर पंडुम” का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार दलों, मांझी-चालकी प्रतिनिधियों तथा पद्मश्री विभूतियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से आत्मीय भेंट एवं सम्मान का अवसर मिला।
“पावस प्रसंग”, “रंगतरंग”, “रंगपरब” और “लोकरंग पर्व” जैसे आयोजनों के माध्यम से शास्त्रीय नृत्य-संगीत, लोकवाद्य, लोकनाट्य तथा पंडवानी, भरथरी, ददरिया, जसगीत, करमा, पंथी, बांसगीत और देवारगीत जैसी पारंपरिक लोकविधाओं को मंच प्रदान किया जा रहा है।
संस्कृति का तैयार हो रहा डिजिटल आर्काइव
छत्तीसगढ़ की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के उद्देश्य से विस्तृत डिजिटल आर्काइव तैयार किया जा रहा है। इसके माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक स्मृतियों, लोक परंपराओं और विरासत को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित किया जाएगा।
कला और संस्कृति के क्षेत्र में काम कर रही अशासकीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 363 निजी संस्थाओं को 854 सांस्कृतिक आयोजनों के लिए 7 करोड़ 85 लाख 3 हजार रुपये की आर्थिक अनुदान राशि स्वीकृत की गई है।
नई फिल्म नीति की तैयारी
छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए “छत्तीसगढ़ फिल्म नीति-2021” में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया चल रही है। संशोधनों के साथ नवीन फिल्म नीति तैयार की जाएगी। इससे प्रदेश के प्राकृतिक और खूबसूरत स्थलों पर फिल्म निर्माण को प्रोत्साहन मिलने तथा पात्र फिल्मों को सब्सिडी का लाभ मिलने की संभावना है।
सिरपुर को विश्व धरोहर बनाने की दिशा में पहल
सिरपुर को विश्व धरोहर के रूप में स्थापित करने की पहल को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए मंत्री ने कहा कि यहां बौद्ध, जैन और हिंदू स्थापत्य परंपराओं का अद्भुत सह-अस्तित्व देखने को मिलता है। सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा यूनेस्को के मानकों के अनुरूप नॉमिनेशन डोजियर तैयार कर भारत सरकार को प्रस्तुत किया गया है।
प्रदेश के 63 राज्य संरक्षित स्मारकों के संरक्षण पर भी काम किया जा रहा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 12 राज्य संरक्षित स्मारकों में संरक्षण, उन्नयन और पर्यटकीय सुविधाओं के विकास के लिए फेसलिफ्टिंग की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
संग्रहालय और पुरखौती मुक्तांगन में नए आकर्षण
महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर के उन्नयन के लिए नई “रियासत गैलरी” की स्थापना तथा वर्तमान गैलरियों के उन्नयन एवं विकास का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो तथा संध्याकालीन कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसके लिए शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे जनजातीय नायकों के साथ छत्तीसगढ़ की मूर्त एवं अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर को केंद्र में रखकर स्क्रिप्ट तैयार की जा रही है।
छत्तीसगढ़ से संबंधित लगभग 12 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण कर रायपुर लाया गया है। इन डिजिटल अभिलेखों को वेब अभिलेखागार पोर्टल के माध्यम से आम नागरिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए कैटलॉग एवं मेटाडेटा तैयार किया जा रहा है।
2750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण
पुरातत्व विभाग द्वारा अब तक 11 पुरास्थलों का उत्खनन कराया जा चुका है। रायपुर जिले की आरंग तहसील में लखौली के पास रीवां के मृत्तिकागढ़ में हुए पुरातात्विक उत्खनन से लगभग 2750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण सामने आए हैं। उत्खनन में प्रारंभिक ऐतिहासिक काल से लेकर कलचुरी काल तक के अवशेष तथा विभिन्न राजवंशों के सोने, चांदी और तांबे के सिक्के मिले हैं।
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन और संस्कृति का विकास केवल नए पर्यटन स्थलों और आयोजनों तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार, आर्थिक गतिविधियों, कलाकारों के कल्याण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक, सांस्कृतिक, इको-एथनिक और आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार दीर्घकालिक योजना के साथ आगे बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ की संस्कृति और विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने का लक्ष्य है।
प्रदीप मिश्रा
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