ओड़िया संगीत के बादशाह प्रणव पटनायक का निधन, 88 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
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भुवनेश्वर, ओडिशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी बिजयानंद जी महाराज, ओड़िशा ब्यूरो
छह दशक से अधिक के संगीत सफर में 200 से ज्यादा फिल्मों को दी अपनी आवाज
भुवनेश्वर ACGN:- ओड़िया संगीत जगत के दिग्गज पार्श्व गायक प्रणव पटनायक का शुक्रवार को भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही ओड़िया संगीत और सिनेमा जगत में शोक की लहर दौड़ गई। संगीत प्रेमियों और कलाकारों ने उनके निधन को ओड़िया संगीत के एक गौरवशाली अध्याय का अंत बताया है।

20 जनवरी 1938 को जन्मे प्रणव पटनायक ओडिशा की सबसे प्रतिष्ठित और लोकप्रिय आवाजों में शुमार रहे। उन्हें अपने पिता तथा ओड़िशा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय लालमोहन पटनायक से काफी प्रेरणा मिली। उन्होंने गुरु कुणाल आदिनारायण के मार्गदर्शन में औपचारिक संगीत प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्ष 1958 में फिल्म ‘मां’ से उन्होंने पार्श्व गायन की दुनिया में कदम रखा और इसके बाद छह दशक से अधिक लंबे शानदार सफर में अपनी अलग पहचान बनाई।
प्रणव पटनायक ने 200 से अधिक ओड़िया फिल्मों के लिए अपनी आवाज दी। उन्होंने ओडिशा और देश के लगभग सभी प्रमुख संगीत निर्देशकों के साथ काम किया। उनकी गायकी की खासियत यह थी कि वे ओड़िशी, लोक, भक्ति, अर्धशास्त्रीय और पारंपरिक संगीत के साथ हिंदी गीतों तथा गजल में भी अपनी प्रतिभा का प्रभावी प्रदर्शन करते थे।
उनके शानदार करियर में अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान जुड़े। वे सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का राज्य फिल्म पुरस्कार सात बार जीतने वाले एकमात्र ओड़िया पार्श्व गायक रहे। ‘सिंदूरबिंदु’ (1976), ‘अस्तराग’ (1982), ‘झीअटी सीता परी’ (1983), ‘कन्यादान’ (1988), ‘प्रतिशोध अपराध नूंहैं’ (1989) और ‘आशा’ (1993) जैसी फिल्मों के लिए उन्हें यह सम्मान प्राप्त हुआ।
उनके प्रमुख सम्मानों में ओड़िशा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1997-98), बिग ओड़िया एंटरटेनमेंट अवॉर्ड (2010), प्रफुल्ल कर सम्मान (2011), जयदेव पुरस्कार (2016), गंगाधर रथ मेमोरियल अवॉर्ड (2017) और ओड़िया संगीत में आजीवन योगदान के लिए बालकृष्ण दास मेमोरियल अवॉर्ड (2023) शामिल हैं।
‘श्री लोकनाथ’, ‘स्वर्णमुखी’, ‘सिंदूर बिंदु’, ‘शेष श्रावण’, ‘चिह्नां अचिन्हा’ और ‘बतीघर’ जैसी फिल्मों के गीतों ने उन्हें लोकप्रियता के शिखर तक पहुंचाया। उनकी आवाज में रिकॉर्ड किए गए गीत लंबे समय तक संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय रहे और उनकी गायकी ने कई पीढ़ियों की संगीत स्मृतियों को समृद्ध किया।
अपने लंबे संगीत सफर के दौरान प्रणव पटनायक ने हेमलता, वाणी जयराम, एस. जानकी, पी. सुशीला, निर्मला मिश्र, भूपेंद्र सिंह, उषा मंगेशकर और हेमंती शुक्ला सहित अनेक प्रसिद्ध गायकों के साथ मंच और स्टूडियो साझा किया।
प्रणव पटनायक का निधन ओड़िया संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी आवाज में गाए गीत आने वाली पीढ़ियों तक संगीत प्रेमियों की यादों में जीवित रहेंगे और ओड़िया संगीत के इतिहास में उनका योगदान हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा।
प्रदीप मिश्रा
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