जशपुर में फलों की क्रांति: अब सेब की खेती से बदल रही किसानों की तकदीर
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जशपुर छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
चाय, नाशपाती और स्ट्रॉबेरी के बाद अब सेब उत्पादन में भी जशपुर बना नई पहचान
जशपुर: छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उद्यानिकी और नकदी फसलों के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। यहां के किसान अब धान और पारंपरिक फसलों के साथ-साथ चाय, नाशपाती, लीची, स्ट्रॉबेरी और अब सेब की खेती में भी सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन, उद्यानिकी विभाग और नाबार्ड द्वारा किसानों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसका सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है।
जशपुर जिले की जलवायु और प्राकृतिक वातावरण उद्यानिकी फसलों के लिए अनुकूल माना जाता है। इसी वजह से यहां के किसान तेजी से फसल विविधिकरण की ओर बढ़ रहे हैं। किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले दो-ढाई वर्षों में जिले के कई गांवों में फलोत्पादन का दायरा तेजी से बढ़ा है।

जशपुर में वर्ष 2023 से सेब उत्पादन की शुरुआत हुई थी और आज यह खेती लगभग 410 एकड़ क्षेत्र में फैल चुकी है। जिले के लगभग 410 किसान सेब की खेती कर रहे हैं। मनोरा और बगीचा विकासखंड सहित शैला, छतौरी, करदना और छिछली पंचायतों में लगाए गए सेब के पौधों में इस वर्ष अच्छी गुणवत्ता और बड़े आकार के फल प्राप्त हुए हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि जशपुर में उत्पादित सेब स्वाद और गुणवत्ता के मामले में कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के सेबों को टक्कर दे रहे हैं।

रूरल एजुकेशन एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष श्री राजेश गुप्ता के अनुसार जिले के किसान एक-एक एकड़ भूमि पर सेब की खेती कर बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है और किसानों का रुझान पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी की ओर बढ़ा है।

नाशपाती उत्पादन में भी जशपुर प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना चुका है। जिले में लगभग 3,500 एकड़ भूमि में नाशपाती के बाग लगाए गए हैं, जिनसे 3,500 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। सन्ना, पंडरापाठ, कंवई, महुआ, सोनक्यारी, मनोरा, धवईपाई और गीधा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नाशपाती उत्पादन हो रहा है। यहां उत्पादित नाशपाती दिल्ली, उत्तरप्रदेश और ओडिशा सहित कई राज्यों में भेजी जा रही है। जिले में प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख 75 हजार क्विंटल नाशपाती का उत्पादन हो रहा है, जिससे किसानों को प्रति एकड़ एक से डेढ़ लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है।

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं और आधुनिक खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
जशपुर में चाय की खेती पहले से होती रही है और यहां की चाय पत्ती अपनी गुणवत्ता के लिए जानी जाती है। अब सेब और नाशपाती उत्पादन की सफलता के बाद जशपुर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के नए फल उत्पादन केंद्र के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
प्रदेश सरकार की योजना आने वाले वर्षों में इन फसलों के रकबे को और बढ़ाने की है, ताकि जशपुर को उद्यानिकी हब के रूप में विकसित किया जा सके और किसानों की आर्थिक स्थिति को और मजबूत बनाया जा सके।
प्रदीप मिश्रा
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