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आदिवासी अधिकारों को लेकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

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नुआपाड़ा, ओड़िशा

By ACGN 7647981711, 9303948009

संवाददाता :- स्वामी बिजया नंद जी महाराज

अवैध खनन, विस्थापन और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप, आदिवासी संगठनों ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग उठाई

नुआपाड़ा ACGN:- जिला आदिवासी कल्याण संघ तथा ओडिशा आदिवासी कल्याण महासंघ ने गुरुवार को राष्ट्रपति के नाम नुआपाड़ा कलेक्टर के माध्यम से एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर राज्य में आदिवासी विरोधी नीतियों, अवैध खनन, विस्थापन और अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों के कथित उल्लंघन के खिलाफ तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। ज्ञापन पूर्व राज्यसभा सांसद  निरंजन बीशी  के नेतृत्व में सौंपा गया।


ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि ओडिशा में आदिवासी समुदाय लगातार वनाधिकारों से वंचित हो रहे हैं तथा कई कल्याणकारी योजनाएं बंद होने से आदिवासियों में असंतोष बढ़ रहा है। संगठनों ने कहा कि बेरोजगारी और विस्थापन की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है और आदिवासी क्षेत्रों में संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी हो रही है।
संगठनों ने आरोप लगाया कि संविधान की पांचवीं अनुसूची, वनाधिकार कानून, पेसा कानून तथा एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों का कई आदिवासी क्षेत्रों में सही ढंग से पालन नहीं किया जा रहा है। ज्ञापन में कहा गया कि ग्रामसभा की अनुमति के बिना कई खनन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे आदिवासी समाज की जमीन और आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है।

ज्ञापन में ANWESHA योजना की पुनर्बहाली, एसटी एवं एससी नर्सिंग छात्रों की छात्रवृत्ति फिर से शुरू करने, विशेष भर्ती अभियान चलाने, वनाधिकार कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा पेसा कानून के तहत ग्रामसभा की शक्तियों की रक्षा करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
आदिवासी संगठनों ने सिजिमाली, तिजमाली, कुटरूमाली, खंडुआलमाली, बाफलिमाली और बलांगीर जिले के कई क्षेत्रों में कथित अवैध खनन पट्टों को रद्द करने की भी मांग की। संगठनों का कहना है कि इन परियोजनाओं के कारण आदिवासी समुदायों के सामने बड़े पैमाने पर विस्थापन का खतरा पैदा हो रहा है।
ज्ञापन में फर्जी जाति प्रमाणपत्र धारकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, आदिवासी आश्रम विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति, प्रत्येक ब्लॉक में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय की स्थापना तथा ट्राइबल सब प्लान और KBK फंड के सही उपयोग की मांग भी शामिल की गई।


संगठनों ने नुआपाड़ा जिला परिषद अध्यक्ष के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले को भी गंभीरता से उठाया। इसे महिलाओं की गरिमा, लोकतांत्रिक संस्थाओं और आदिवासी समाज का अपमान बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई। इसके अलावा आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी वीर शहीद माधो सिंह से जुड़ी गलत जानकारी प्रकाशित किए जाने पर भी चिंता व्यक्त की गई।
पूर्व सांसद  निरंजन बीशी ने कहा कि आदिवासी समाज जंगल, जल और जमीन के मूल संरक्षक हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की।

प्रदीप मिश्रा
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