ब्लॉक स्तर पर विलुप्त खाद्य फसलों को पुनर्जीवित करेगी सरकार : मुख्यमंत्री
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भुवनेश्वर, ओड़िशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता:- ओड़िशा ब्यूरो – स्वामी बिजया नंद जी महाराज
प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि और किसानों के कल्याण पर बड़े फैसलों की घोषणा
भुवनेश्वर ACGN:- पूर्वांचल क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के दौरान ओड़िशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने अपने संबोधन में मिट्टी की सुरक्षा, प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और धीरे धीरे भूमि विषैली होती जा रही है, जिससे फसलों की उत्पादकता और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि श्री जगन्नाथ महाप्रभु के महाप्रसाद में अब ओड़िशा के जैविक चावल का उपयोग किया जा रहा है, जो राज्य की कृषि पहचान और किसानों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से अपील की कि पूर्वी भारत में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अनुसंधान किया जाए ताकि कृषि को टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सके।

उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार ब्लॉक स्तर पर पारंपरिक और विलुप्त हो रही स्थानीय खाद्य फसलों जिन्हें “फॉरगॉटन फूड्स” कहा जाता है, उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए विशेष अभियान चलाएगी। इसके तहत स्थानीय अनाज, मोटे अनाज और पारंपरिक फसलों को फिर से खेती में शामिल करने पर जोर दिया जाएगा ताकि किसानों की आय के साथ पोषण सुरक्षा भी मजबूत हो सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि “समृद्ध कृषक योजना” के तहत किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जा रहा है जिससे करीब 19 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं। इसके अलावा “सीएम किसान योजना” के माध्यम से 51 लाख से अधिक किसानों को सालाना 4000 रुपये की सहायता दी जा रही है और केंद्र की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के साथ मिलाकर किसानों को कुल 10 हजार रुपये वार्षिक सहायता प्राप्त हो रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों की प्रीमियम राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जा रही है ताकि किसानों पर आर्थिक बोझ कम हो सके। किसानों के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए “कृषि विद्यानिधि योजना” संचालित की जा रही है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है।
राज्य सरकार कृषि अवसंरचना को मजबूत करने के लिए सभी 58 उपखंडों में कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रही है। “मुख्यमंत्री कृषि उद्योग योजना” के तहत कृषि क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एक करोड़ रुपये तक की सब्सिडी भी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि ओड़िशा में 1800 से अधिक किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) सक्रिय हैं जिन्होंने पिछले दो वर्षों में 126 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। इसके साथ ही कोरापुट, कालाहांडी सहित छह जिलों में एक लाख एकड़ भूमि पर कॉफी बागानों का विकास किया जा रहा है और कोरापुट कॉफी की अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने के लिए ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत में कृषि विकास की अपार संभावनाएं हैं और यह सम्मेलन राज्यों के बीच बेहतर कृषि पद्धतियों के आदान प्रदान का महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि भुवनेश्वर सम्मेलन से तैयार होने वाला कृषि रोडमैप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “पूर्वोदय मिशन” को नई दिशा देगा और पूर्वी भारत को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
प्रदीप मिश्रा
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