बिजली कंपनी में पदोन्नति को लेकर बढ़ी चर्चा, मेरिट और वरिष्ठता के आधार पर उठे कई सवाल
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
सहायक अभियंता से कार्यपालन अभियंता पदोन्नति सूची जारी होने के बाद विभागीय हलकों में बढ़ी हलचल, प्राप्त जानकारी के अनुसार अंतिम ग्रेडेशन सूची सार्वजनिक न होने से बनी असमंजस की स्थिति
छत्तीसगढ़ की सरकारी विद्युत व्यवस्था से जुड़ी प्रमुख कंपनी छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी मर्यादित में इंजीनियरों की पदोन्नति को लेकर विभागीय हलकों में चर्चा तेज हो गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 17 अप्रैल 2026 को सहायक अभियंता (एई) से कार्यपालन अभियंता (ईई) पद के लिए जारी की गई पदोन्नति सूची के बाद इंजीनियरों के बीच मेरिट, वरिष्ठता और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर कई प्रकार के सवाल उठाए जा रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पदोन्नति सूची के जारी होने के बाद विभाग के भीतर वरिष्ठता क्रम और मेरिट रैंक के आधार को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। कई इंजीनियरों का कहना है कि पदोन्नति प्रक्रिया में वरिष्ठता निर्धारण और मेरिट के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित किया गया है, इस विषय में विभाग की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसी कारण विभागीय स्तर पर असमंजस की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।

वर्ष 2018 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा बताया जा रहा है मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह पूरा प्रकरण वर्ष 2018 में हुई इंजीनियरों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा बताया जा रहा है। उस समय जारी भर्ती विज्ञापन के तहत अभ्यर्थियों का चयन लिखित परीक्षा और निर्धारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से किया गया था। चयन परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार की गई थी और उसी मेरिट सूची के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों में यह उल्लेख किया गया था कि प्रशिक्षण और परिवीक्षा अवधि पूर्ण होने के बाद स्थायी वरिष्ठता निर्धारित की जाएगी और चयन परीक्षा में प्राप्त अंक वरिष्ठता निर्धारण के प्रमुख आधार होंगे। इसी आधार पर अभ्यर्थियों की मेरिट रैंक तय की गई थी।
लेकिन हाल ही में जारी पदोन्नति सूची के बाद कुछ इंजीनियरों के बीच यह चर्चा सामने आ रही है कि मेरिट रैंक और वर्तमान पदोन्नति क्रम के बीच स्पष्ट सामंजस्य दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

कुछ अधिकारियों के नामों को लेकर विभागीय चर्चा
प्राप्त जानकारी के अनुसार विभागीय हलकों में कुछ अधिकारियों के नामों को लेकर भी चर्चा की जा रही है। उपलब्ध विभागीय अभिलेखों के आधार पर वर्ष 2019 में जारी वरिष्ठता सूची में ओमप्रकाश रात्रे का स्थान सत्रहवें क्रमांक पर बताया जाता है, जबकि हाल ही में जारी पदोन्नति सूची में उन्हें सातवें क्रमांक पर पदोन्नति मिलने की चर्चा विभागीय स्तर पर की जा रही है।
इसी प्रकार इंजीनियर राजीव त्रिपाठी के पदोन्नति क्रम को लेकर भी विभागीय हलकों में चर्चा की बात सामने आई है। हालांकि यह सभी बातें विभाग के भीतर चल रही चर्चाओं के आधार पर बताई जा रही हैं और इनकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की ओर से सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है।
मेरिट और वरिष्ठता को लेकर विशेषज्ञों की राय
प्रशासनिक और तकनीकी मामलों से जुड़े जानकारों का कहना है कि जब किसी विभाग में एक ही विज्ञापन के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाती है तो सामान्यतः चयन परीक्षा में प्राप्त मेरिट रैंक को वरिष्ठता निर्धारण का प्रमुख आधार माना जाता है। इसके बाद सेवा अवधि, कार्य प्रदर्शन और विभागीय नियमों के आधार पर आगे की पदोन्नति प्रक्रिया तय की जाती है।
जानकारों के अनुसार यदि किसी पदोन्नति प्रक्रिया में वरिष्ठता क्रम में परिवर्तन दिखाई देता है तो उसके पीछे विभागीय नियमों, सेवा अभिलेखों या प्रशासनिक कारणों का उल्लेख सामान्यतः पदोन्नति आदेश में किया जाता है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभाग द्वारा स्पष्ट जानकारी जारी करना भी आवश्यक माना जाता है।
ग्रेडेशन सूची को लेकर भी उठ रहे प्रश्न
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पूरे प्रकरण में एक महत्वपूर्ण पहलू अंतिम ग्रेडेशन सूची को लेकर भी सामने आया है। प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार किसी भी विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया से पहले अंतिम ग्रेडेशन सूची जारी करना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जाती है।
ग्रेडेशन सूची जारी होने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी वरिष्ठता के संबंध में दावा या आपत्ति प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से वरिष्ठता से जुड़े विवादों को पहले ही स्पष्ट कर लिया जाता है।
लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मामले में पदोन्नति आदेश जारी होने तक अंतिम ग्रेडेशन सूची सार्वजनिक रूप से जारी नहीं की गई थी। इसी कारण कुछ इंजीनियरों का कहना है कि उन्हें अपनी वरिष्ठता से संबंधित संभावित आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर नहीं मिल पाया।

विभागीय पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी यह भी मानते हैं कि यदि पदोन्नति प्रक्रिया से पहले ग्रेडेशन सूची सार्वजनिक कर दी जाती तो वरिष्ठता से जुड़े कई प्रश्न स्वतः स्पष्ट हो सकते थे। इससे पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर उत्पन्न हो रही चर्चाओं और असमंजस की स्थिति को भी काफी हद तक रोका जा सकता था।
हालांकि इस पूरे मामले में अभी तक संबंधित विभाग की ओर से कोई औपचारिक बयान या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। इसलिए पदोन्नति सूची से जुड़ी कई बातें अभी विभागीय चर्चाओं और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही सामने आ रही हैं।
प्रशासनिक समीक्षा की संभावना भी बताई जा रही
प्रशासनिक मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि किसी पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर वरिष्ठता या नियमों के पालन पर प्रश्न उठते हैं तो ऐसे मामलों में विभागीय स्तर पर समीक्षा की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारी प्रशासनिक या न्यायिक स्तर पर भी अपनी आपत्ति प्रस्तुत कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार पारदर्शिता और स्पष्ट प्रशासनिक प्रक्रिया किसी भी सरकारी संस्था की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए ऐसे मामलों में विभाग द्वारा स्पष्ट जानकारी जारी करना आवश्यक समझा जाता है।
विभागीय स्पष्टीकरण का इंतजार
फिलहाल प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पूरे प्रकरण को लेकर विभागीय हलकों में चर्चा जारी है। इंजीनियरों और कर्मचारियों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हुई हैं कि संबंधित विभाग इस मामले में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करता है या नहीं और पदोन्नति प्रक्रिया से जुड़े प्रश्नों पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष • निर्भीक • जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता
अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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