पत्थलगांव भूमि घोटाला: आरटीआई से उजागर हुआ संदिग्ध जमीन कारोबार
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जशपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
आदिवासी जमीनों के कथित दुरुपयोग और करोड़ों के लेनदेन की शिकायत पर जांच तेज, कलेक्टर स्तर पर फाइल की समीक्षा
जशपुर जिले के पत्थलगांव क्षेत्र में आदिवासी जमीनों से जुड़े एक कथित भूमि घोटाले का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। एक स्वतंत्र पत्रकार द्वारा की गई शिकायत और सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर यह मामला प्रकाश में आया है, जिसमें नरेश कुमार सिदार और आयुष अग्रवाल के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। आरोप है कि आदिवासी जमीनों के दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर उन्हें निवेश और व्यावसायिक उपयोग का माध्यम बनाया गया।
सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार आवेदन क्रमांक 220260312004476 पर 23 मार्च 2026 को जन सूचना अधिकारी द्वारा दिए गए जवाब में बताया गया है कि इस पूरे प्रकरण की फाइल अब जशपुर कलेक्टर के संज्ञान में है और मामले की समीक्षा की जा रही है। दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि 28 अगस्त 2025 को कुछ जमीनों को वाणिज्यिक स्वरूप में दर्ज कर उन्हें एचडीएफसी बैंक में गिरवी रखा गया, जिससे करोड़ों रुपये के लेनदेन की संभावना जताई जा रही है।
दस्तावेजों में सामने आया एक अन्य पहलू यह भी है कि नरेश कुमार सिदार की जाति संबंधी प्रविष्टियों को लेकर भी सवाल उठे हैं। कुछ राजस्व अभिलेखों में उन्हें गोंड जनजाति से संबंधित बताया गया है, जबकि अन्य दस्तावेजों में उरांव जनजाति का उल्लेख सामने आया है। इस विरोधाभास को लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं आदिवासी भूमि संबंधी नियमों को दरकिनार करने के लिए दस्तावेजों में बदलाव तो नहीं किया गया।
मामले में यह भी आरोप सामने आए हैं कि पत्थलगांव क्षेत्र की कुछ जमीनों को कृषि से वाणिज्यिक उपयोग में परिवर्तित कराया गया। आरोप लगाने वालों का कहना है कि आदिवासी जमीनों के डायवर्जन के लिए सख्त नियम होने के बावजूद इस प्रक्रिया में कई अनियमितताएं हुई हो सकती हैं।
इस प्रकरण में आयुष अग्रवाल की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। कुछ सूत्रों के अनुसार जमीनों के सौदों और कीमतों को लेकर कथित बातचीत से जुड़े ऑडियो सामने आने की बात कही जा रही है, जिसमें बड़े निवेशकों के लिए जमीन उपलब्ध कराने की चर्चा होने का दावा किया गया है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसका पंजीकरण क्रमांक पीएमओपीजी डी 2026 0007354 बताया गया है। शिकायत में मांग की गई है कि आदिवासी जमीनों से जुड़े इस कथित प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए और संदिग्ध संपत्तियों की वित्तीय जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। फिलहाल यह मामला राज्य शासन के लोक शिकायत निवारण विभाग में प्रक्रिया के अंतर्गत बताया जा रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच जारी है और स्थानीय लोगों की नजर अब इस बात पर है कि जांच के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो जिम्मेदारों के खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई होती है।
प्रदीप मिश्रा
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