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धर्मांतरण से नहीं बदलती तकदीर, कर्म और संस्कार ही जीवन बदलते हैं: त्यागी जी महाराज

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राजनांदगांव छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009


भक्ति, संस्कार और सनातन की रक्षा के लिए समाज को एकजुट होने का आह्वान


राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ के समीप स्थित शनि धाम मुरमुंडा आश्रम में हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर महंत त्यागी जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए भगवान हनुमान के जन्म से लेकर उनकी अतुलनीय शक्ति, समर्पण और श्रीराम के प्रति उनकी अद्वितीय भक्ति की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान केवल एक देवता नहीं बल्कि साहस, सेवा, निष्ठा और अटूट भक्ति के प्रतीक हैं। श्रीराम के प्रति उनकी निस्वार्थ भक्ति आज भी समस्त मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। महंत त्यागी जी महाराज ने कहा कि आज भी इस धरती पर हनुमान जी का अस्तित्व है और वे स्वच्छंद रूप से विचरण करते हुए अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। सच्चे मन से श्रद्धा और विश्वास रखने वाले भक्तों को उनकी कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल भगवा वस्त्र पहन लेना या माथे पर तिलक लगा लेना ही सनातन धर्म की रक्षा नहीं है। सनातन की वास्तविक रक्षा तब होती है जब समाज एकजुट होकर अपने धर्म, संस्कृति और मूल्यों के प्रति जागरूक होता है और उन्हें अपने जीवन में उतारता है।
महंत त्यागी जी महाराज ने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा धर्मांतरण को लेकर बनाए गए नियमों की सराहना करते हुए कहा कि यह समाज में संतुलन और जागरूकता बनाए रखने की दिशा में एक आवश्यक कदम है। उन्होंने कहा कि आज कुछ लोग विभिन्न कारणों से अपने मूल धर्म को छोड़कर अन्य धर्मों की ओर जा रहे हैं, जबकि यदि वे अपने इतिहास और परंपराओं को देखें तो पाएंगे कि उनके पूर्वज इसी सनातन धर्म में पले-बढ़े और इसी संस्कृति से जुड़े रहे।
उन्होंने धर्मांतरण के विषय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि धर्म केवल पूजा-पद्धति का नाम नहीं है, बल्कि वह हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारे पूर्वजों की विरासत है। जब कोई व्यक्ति अपना धर्म छोड़ता है, तो वह केवल एक परंपरा नहीं बदलता बल्कि अनजाने में अपनी जड़ों और अपने इतिहास से भी दूर हो जाता है।
महंत त्यागी जी महाराज ने कहा कि कई बार लोगों को यह भ्रम दिया जाता है कि धर्म बदलने से जीवन की सभी समस्याएँ समाप्त हो जाएँगी और जीवन में चमत्कारी बदलाव आ जाएगा। लेकिन सत्य यह है कि जीवन में परिवर्तन धर्म बदलने से नहीं, बल्कि कर्म, आचरण और समय के साथ आते हैं। परिवर्तन तो प्रकृति का नियम है और यह हर व्यक्ति के जीवन में आता-जाता रहता है।
उन्होंने समाज से आह्वान किया कि लोगों को अपने धर्म के प्रति जागरूक किया जाए, उन्हें अपनी परंपराओं, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति की महानता के बारे में बताया जाए। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में अनेक ऐसी दिव्य शक्तियाँ और देवी-देवता हैं जो आज भी जागृत रूप में भक्तों का मार्गदर्शन और संरक्षण करते हैं।
प्रवचन के अंत में महंत त्यागी जी महाराज ने कहा कि हनुमान जी की भक्ति हमें यह सिखाती है कि धर्म केवल आस्था नहीं बल्कि सेवा, साहस, त्याग और समाज के प्रति जिम्मेदारी का मार्ग है। यदि हम इन मूल्यों को अपनाएँ, तो वही सनातन धर्म की सच्ची रक्षा होगी।
अंत में उन्होंने लोगों से सनातन धर्म की रक्षा और समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि डोंगरगढ़ के महंत त्यागी जी महाराज गोरखनाथ राष्ट्रीय संगठन मंत्री भी हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं और युवाओं से अपील की कि वे संगठन से जुड़कर सनातन धर्म की रक्षा, गौ रक्षा और नशा मुक्ति अभियान जैसे सामाजिक कार्यों में भागीदारी निभाएँ।

संगठन से जुड़ने और अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें –
महंत त्यागी जी महाराज, शनि धाम मुरमुंडा आश्रम, डोंगरगढ़, जिला राजनांदगांव, छत्तीसगढ़
संपर्क नंबर : 9244373590

“सनातन की रक्षा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि जागरूकता, संगठन और आचरण से होती है।”

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