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हिंसा से विकास की राह की ओर कदम, आत्मसमर्पित माओवादियों को मिला नया जीवन और रोजगार

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

कांकेर बना प्रशिक्षण के बाद रोजगार उपलब्ध कराने वाला पहला जिला, कलेक्टर ने सौंपे नियुक्ति पत्र

रायपुर, छत्तीसगढ़। मानव समाज में सकारात्मक परिवर्तन ही वह शक्ति है जो जीवन को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करती है। यही बदलाव अब उन लोगों के जीवन में भी दिखाई दे रहा है जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। उत्तर बस्तर कांकेर जिले में जिला प्रशासन की पहल से आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों को प्रशिक्षण के बाद रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पहल के साथ कांकेर जिला प्रशिक्षण उपरांत रोजगार देने वाला बस्तर संभाग का पहला जिला बन गया है।

जिला प्रशासन द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों को पहले विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया गया। यह प्रशिक्षण भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम मुल्ला (चौगेल) स्थित प्रशिक्षण कैम्प में दिया गया, जहां उन्हें स्वरोजगार और कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियों में पारंगत बनाया गया। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद प्रशासन के प्रयासों से उन्हें निजी संस्थानों में रोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है।


इस क्रम में जिला कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मंडावी ने कलेक्टर कक्ष में आयोजित कार्यक्रम के दौरान चार आत्मसमर्पित माओवादी और नक्सल पीड़ितों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इनमें पुनर्वासित सगनूराम आंचला तथा नक्सल पीड़ित रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल हैं। इन सभी को निजी फर्म में रोजगार दिया गया है, जहां उन्हें प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपये मानदेय के साथ अन्य वित्तीय सुविधाएं भी प्राप्त होंगी।
पुनर्वासित सगनूराम आंचला ने बताया कि शिक्षा और सही-गलत की समझ के अभाव में वह माओवादी संगठन से जुड़ गया था, लेकिन मुख्यधारा में लौटने के बाद जीवन की वास्तविक खुशियों और समाज में सम्मानजनक जीवन का महत्व समझ में आया। उन्होंने शासन और प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें जीवन जीने का सही उद्देश्य मिल गया है।


इसी प्रकार नक्सल हिंसा से प्रभावित बीरसिंह मंडावी ने कहा कि ग्राम मुल्ला (चौगेल) के प्रशिक्षण कैम्प ने उन्हें नया जीवन दिया है। यहां उन्हें निःशुल्क प्रशिक्षण देकर कुशल और आत्मनिर्भर बनाया गया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के बाद जिला प्रशासन द्वारा रोजगार उपलब्ध कराए जाने से भविष्य के प्रति नई आशा जगी है और वे अब समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
प्रदेश सरकार की पुनर्वास नीति और जिला प्रशासन की पहल से प्रभावित होकर कई लोग हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इस पहल के माध्यम से पुनर्वासितों को अपनी प्रतिभा निखारने और उसे नई दिशा देने का अवसर मिल रहा है। शासन की इस सकारात्मक पहल का प्रत्यक्ष लाभ आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल पीड़ित परिवारों को मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार हो रहा है।

प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबरों और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़

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