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ढपढप में आस्था का महासागर : दिव्य हनुमंत कथा में उमड़ी श्रद्धालुओं की अपार भीड़

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कोरबा छत्तीसगढ़

By ACGN 7647 9817119303 948009

ढपढप में दिव्य हनुमंत कथा : भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना का भव्य संगम

कोरबा/बांकीमोंगरा। कोरबा जिले के बांकीमोंगरा क्षेत्र के ग्राम ढपढप में आयोजित पांच दिवसीय दिव्य श्री हनुमंत कथा इन दिनों पूरे क्षेत्र में भक्ति और आध्यात्मिकता का केंद्र बनी हुई है। देशभर में प्रसिद्ध कथा वाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही इस कथा को सुनने के लिए लाखों श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंच रहे हैं। कथा के तीसरे और चौथे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप दे दिया। कोरबा, कटघोरा, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, रायगढ़ सहित दूर-दराज के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे। पूरा वातावरण “जय श्रीराम” और “जय बजरंगबली” के जयघोष से गूंज उठा।


रायगढ़ से कोरबा तक हुआ भव्य स्वागत
कथा के लिए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री विशेष विमान से रायगढ़ पहुंचे। रायगढ़ के जिंदल हवाई पट्टी पर आयोजकों और श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया। इसके बाद जब उनका काफिला रायगढ़ से कोरबा के लिए रवाना हुआ तो रास्ते में उरगा और छुरी सहित कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं और जयकारों के साथ उनका स्वागत किया। श्रद्धालुओं के बीच यह भावना भी देखने को मिली कि छत्तीसगढ़ उनके लिए विशेष आत्मीयता का स्थान रखता है।


पहले दिन का संदेश : भक्ति ही जीवन की शक्ति
कथा के प्रथम दिन धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान हनुमान के जीवन से जुड़े प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में भक्ति सबसे बड़ी शक्ति होती है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य के भीतर विश्वास और भगवान के प्रति समर्पण होता है, तब जीवन की बड़ी से बड़ी कठिनाइयों का सामना भी सहज हो जाता है।
महाराज श्री ने श्रद्धालुओं से कहा कि भगवान हनुमान केवल शक्ति के प्रतीक नहीं बल्कि सेवा, विनम्रता और समर्पण के भी प्रतीक हैं।


दूसरे दिन का संदेश : संस्कारों से बनता है मजबूत समाज
कथा के दूसरे दिन महाराज श्री ने समाज में संस्कारों की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि परिवार में बच्चों को धर्म, संस्कृति और नैतिकता के संस्कार दिए जाएं तो समाज अपने आप मजबूत बनता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में केवल भौतिक प्रगति ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक विकास भी उतना ही आवश्यक है।उन्होंने श्रद्धालुओं को नियमित रूप से राम नाम और हनुमान चालीसा का पाठ करने की प्रेरणा दी।


तीसरे दिन का संदेश : साहस और विश्वास से मिलती है सफलता
कथा के तीसरे दिन महाराज श्री ने भगवान हनुमान की समुद्र यात्रा और सुरसा प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि जीवन की हर बाधा को साहस, बुद्धि और विश्वास से पार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ होता है और भगवान का स्मरण करता है, तब मार्ग की कठिनाइयां स्वयं दूर होने लगती हैं। इस दिन कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा परिसर भक्ति में डूबा नजर आया।


चौथे दिन का संदेश : धर्म जोड़ता है समाज को
कथा के चौथे दिन महाराज श्री ने सनातन धर्म की व्यापकता और उसकी सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि यह जीवन जीने की एक महान पद्धति है जो समाज को जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि धर्म के मार्ग पर चलकर समाज में प्रेम, सेवा और सद्भाव का वातावरण बनाएं।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ सरकार के कृषि मंत्री रामविचार नेताम और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे भी कथा स्थल पर पहुंचे और कथा श्रवण किया।


सुंदरकांड पाठ बना विशेष आकर्षण
कथा के दौरान आयोजित सामूहिक सुंदरकांड पाठ ने पूरे आयोजन को और भी दिव्य बना दिया। हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर सुंदरकांड का पाठ किया। पीले वस्त्रों में उपस्थित श्रद्धालुओं के कारण पूरा परिसर पीताम्बर रंग में रंग गया। भक्ति गीतों और जयकारों के बीच श्रद्धालु भगवान हनुमान की स्तुति में भावविभोर दिखाई दिए।

आयोजन के बीच ईमानदारी की प्रेरक घटना
इतनी बड़ी भीड़ के बीच एक प्रेरणादायक घटना भी सामने आई जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। कथा स्थल पर आदर्श नगर की प्रीति मिश्रा और रेणु गुप्ता को लगभग तीन लाख रुपये कीमत का सोने का चेन मिला।
दोनों महिलाओं ने ईमानदारी का परिचय देते हुए इसे आयोजन समिति और पत्रकारों के माध्यम से सुरक्षित लौटाने की पहल की।
इस घटना ने यह संदेश दिया कि सच्ची भक्ति केवल पूजा में नहीं बल्कि ईमानदारी और सदाचार में भी दिखाई देती है।

प्रशासन और आयोजन समिति की बेहतर व्यवस्था
लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए आयोजन समिति और प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्था की गई। सुरक्षा, यातायात नियंत्रण, पेयजल और बैठने की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया। पुलिस और प्रशासन के सहयोग से कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो रहा है।


आस्था का बना विशाल उत्सव
ग्राम ढपढप में आयोजित यह दिव्य हनुमंत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का विराट उत्सव बन गई है। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि समाज में सनातन परंपरा और भगवान हनुमान के प्रति गहरी श्रद्धा आज भी उतनी ही मजबूत है।


भक्ति, सेवा और सद्भाव का यह वातावरण पूरे क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रहा है और यह आयोजन लोगों के लिए लंबे समय तक प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

प्रदीप मिश्रा
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