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केरल की सियासत में बढ़ती तल्खी: क्या राहुल गांधी इंडिया ब्लॉक को कर रहे कमजोर?

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नागरिक परिक्रमा

By ACGN 7647981711, 9303948009

आलेख संजय पराते

रायपुर। देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर टिप्पणी करते हुए छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय किसान सभा से जुड़े टिप्पणीकार संजय पराते ने कहा है कि आज देश में राजनीतिक रणनीतियों और कॉरपोरेट हस्तक्षेप दोनों ही गंभीर बहस का विषय बन चुके हैं। उन्होंने केरल की राजनीति में कांग्रेस की भूमिका और कर्नाटक के दूध बाजार में कॉरपोरेट कंपनियों की दखलंदाजी पर सवाल उठाए हैं।
केरल में संतुलन खोते राहुल गांधी
संजय पराते के अनुसार केरल की राजनीति में माकपा और कांग्रेस दोनों ही इंडिया ब्लॉक की पार्टियां हैं, लेकिन राज्य में सत्ता के लिए सीधी टक्कर इन्हीं दोनों के बीच है। केरल का राजनीतिक इतिहास लंबे समय से यह रहा है कि कभी माकपा तो कभी कांग्रेस सत्ता में आती रही है।
हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में माकपा ने इस परंपरा को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की। यह केरल के इतिहास में पहली बार हुआ कि किसी पार्टी को लगातार दूसरी बार सत्ता मिली। अब आगामी विधानसभा चुनाव में माकपा तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस पिछले दस वर्षों से सत्ता से बाहर रहने के बाद वापसी की उम्मीद लगाए हुए है।
पराते का कहना है कि यदि कांग्रेस इस बार भी सत्ता में नहीं आती और माकपा तीसरी बार जीत हासिल करती है, तो कांग्रेस को पश्चिम बंगाल जैसा राजनीतिक इतिहास दोहराए जाने का डर है, जहां माकपा ने लगातार 35 वर्षों तक शासन किया था। इसी कारण केरल में चुनावी मुकाबला काफी तीखा होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस पूरे देश में भाजपा के विकल्प के रूप में उभरना चाहती है, तो उसे अपने सहयोगी दलों के साथ संतुलित व्यवहार करना चाहिए। विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते इंडिया ब्लॉक को मजबूत करने की जिम्मेदारी कांग्रेस पर ही है, लेकिन हाल के बयानों से ऐसा नहीं लगता कि कांग्रेस इस जिम्मेदारी को गंभीरता से निभा रही है।
पराते ने कहा कि हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बयान दिया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को गिरफ्तार करना चाहिए। उनके अनुसार इस प्रकार के बयान राजनीतिक रूप से अपरिपक्व और चुनावी बयानबाजी का उदाहरण हैं।
उन्होंने कहा कि माकपा लंबे समय से केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का विरोध करती रही है और स्वयं कांग्रेस भी कई राज्यों में इन एजेंसियों की कार्रवाई का सामना कर चुकी है। ऐसे में कांग्रेस का यह रुख विपक्षी एकता को कमजोर कर सकता है।
पराते ने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में कई राज्यों में कांग्रेस के नेताओं ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा है। असम के वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पहले कांग्रेस में महत्वपूर्ण पदों पर रहे थे। इसी तरह कई अन्य नेता भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के कारण भाजपा के लिए कांग्रेस एक प्रकार का “फीडर संगठन” बनती दिखाई दे रही है।
संजय पराते के अनुसार केरल में पिछले दस वर्षों के वामपंथी शासन के दौरान राज्य में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है, जबकि कांग्रेस शासनकाल में राज्य में माराड जैसे गंभीर सांप्रदायिक दंगे हुए थे।
उन्होंने यह भी कहा कि केरल की जनता राजनीतिक रूप से काफी जागरूक है और वह राज्य के विकास, सांप्रदायिक सद्भाव और राजनीतिक परिस्थितियों को समझती है। इसलिए आने वाले चुनावों में जनता का फैसला काफी महत्वपूर्ण होगा।

संजय पराते

(टिप्पणीकार संजय पराते अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं।संपर्क : 94242-31650)

प्रदीप मिश्रा
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