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एशियाई खेलों का पदक जीतना मेरा अधूरा सपना – मीराबाई चानू

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

खेलो इंडिया जनजातीय खेलों के उद्घाटन में बोलीं ओलंपिक रजत पदक विजेता, भार वर्ग परिवर्तन को बताया बड़ी चुनौती

छत्तीसगढ़ में आयोजित खेलो इंडिया जनजातीय खेल 2026 के उद्घाटन अवसर पर टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता सेखोम मीराबाई चानू ने अपने खेल जीवन के सबसे बड़े अधूरे लक्ष्य एशियाई खेलों में पदक जीतने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सपना अभी भी उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे इसे पूरा करने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं। पिछले एक दशक से भारतीय भारोत्तोलन की अग्रणी खिलाड़ी रही मीराबाई चानू ने ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों में कई पदक हासिल किए हैं, लेकिन एशियाई खेलों का पदक अभी भी उनके खाते में नहीं जुड़ सका है। वर्ष 2014 में इंचियोन एशियाई खेलों में उन्होंने पहली बार भाग लिया था जहां वे नौवें स्थान पर रहीं। वर्ष 2018 में जकार्ता एशियाई खेलों में पीठ की चोट के कारण वे भाग नहीं ले सकीं जबकि वर्ष 2022 के हांगझोउ एशियाई खेलों में कूल्हे की चोट ने उनके पदक के सपने को अधूरा छोड़ दिया।


मीराबाई चानू ने कहा कि एशियाई खेलों में प्रतियोगिता का स्तर बहुत ऊंचा होता है और यही इसे सबसे कठिन बनाता है, लेकिन उनका लक्ष्य वहां पदक जीतना है। नियमों में बदलाव के कारण उन्हें 48 किलोग्राम और 49 किलोग्राम भार वर्ग के बीच संतुलन बनाना होगा। जुलाई से अगस्त तक होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में वे 48 किलोग्राम वर्ग में भाग लेंगी जबकि सितंबर से अक्टूबर तक जापान के नागोया में आयोजित एशियाई खेलों में 49 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी।
हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय भारोत्तोलन प्रतियोगिता में मीराबाई चानू ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 48 किलोग्राम वर्ग में तीन नए राष्ट्रीय कीर्तिमान बनाए। उन्होंने स्नैच में 89 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 116 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 205 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया जो उनके खेल जीवन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है।


उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने खेलो इंडिया जनजातीय खेलों की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे आने का बड़ा अवसर देगा। उनके अनुसार देश के उत्तर पूर्व और जनजातीय क्षेत्रों में अपार प्रतिभा है और ऐसे आयोजन उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और सुविधाओं के लिए स्थापित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र और राज्य उत्कृष्टता केंद्रों की भी प्रशंसा की और कहा कि इनसे भारतीय खेलों को नई दिशा और मजबूती मिल रही है।

प्रदीप मिश्रा
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