मोस्ट वांटेड शुक्रू और पापा राव समेत 22 से अधिक माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण
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भुवनेश्वर/बीजापुर, ओडिशा–छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
ओड़िशा ब्यूरो स्वामी विजयानंद जी महाराज
कंधमाल से बीजापुर तक सरेंडर की लहर, सुरक्षा बलों की कार्रवाई से उग्रवादियों में बढ़ा दबाव
वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में अलग-अलग घटनाओं में मोस्ट वांटेड माओवादी नेताओं समेत 22 से अधिक उग्रवादियों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया है।
ओडिशा के कंधमाल जिले में मोस्ट वांटेड माओवादी नेता शुक्रू ने मंगलवार को चार अन्य माओवादियों के साथ आत्मसमर्पण किया। ओडिशा पुलिस के एंटी नक्सल एडीजी संजीव पंडा ने इसकी पुष्टि की है। शुक्रू पर 55 लाख रुपये का इनाम घोषित था और वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था। आत्मसमर्पण के दौरान उसने एके–47 राइफल भी जमा कराई।

सूत्रों के अनुसार उसे पकड़ने के लिए कालाहांडी, कंधमाल और रायगढ़ा की सीमा से लगे घने जंगलों में कई दिनों से व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा था। ड्रोन निगरानी और विशेष बलों की मदद से उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। उस पर हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कमांडर अन्वेष की हत्या का भी आरोप है।

वहीं पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में 17 माओवादियों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण किया, जिनमें मोस्ट वांटेड नेता पापा राव भी शामिल है। पापा राव को मंगू दादा और सुधाकर के नाम से भी जाना जाता है और वह ओडिशा, महाराष्ट्र तथा छत्तीसगढ़ में सक्रिय रहा है। बताया जाता है कि वह वर्ष 2010 में दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले में भी शामिल रहा था, जिसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।
राज्य सरकार के अनुसार 15 मार्च 2026 तक कुल 96 माओवादी और मिलीशिया सदस्य आत्मसमर्पण कर चुके हैं। 31 मार्च 2026 की निर्धारित समय सीमा को देखते हुए सरकार को विश्वास है कि ओडिशा को पूरी तरह माओवादी प्रभाव से मुक्त करने की दिशा में यह अभियान निर्णायक साबित होगा।
प्रदीप मिश्रा
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