संजय पार्क में लापरवाही का कहर: 15 हिरणों की दर्दनाक मौत वन विभाग पर उठे गंभीर सवाल
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अम्बिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता सौरभ साहू
सुरक्षा की घोर चूक से संरक्षित हिरणों की मौत ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, ग्रामीण और पर्यावरण प्रेमियों में गुस्सा
अम्बिकापुर स्थित संजय पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां वन विभाग और पार्क प्रबंधन की कथित लापरवाही के चलते 15 हिरणों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना ने न केवल स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों को स्तब्ध कर दिया है बल्कि वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, संजय पार्क के हिरण बाड़े की सुरक्षा में गंभीर चूक हुई। रात के समय बाड़े का गेट खुला रह गया, जिससे आवारा कुत्तों का झुंड हिरणों पर हमला करने के लिए अंदर घुस गया। इस हमले में 14 हिरणों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक हिरण ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बाड़े की सुरक्षा व्यवस्था में यह अस्वीकार्य चूक पार्क प्रबंधन और वन विभाग की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
घटना ने वन्यजीव संरक्षण की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। संरक्षित क्षेत्र में भी यदि जानवर सुरक्षित नहीं हैं, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी यह सवाल कर रहे हैं कि क्या वन्यजीवों के लिए बनाए गए संरक्षित क्षेत्रों में उन्हें संरक्षण की वास्तविक सुविधा मिल रही है, या यह केवल कागजी प्रक्रिया है।
घटना के तुरंत बाद वन विभाग ने कार्रवाई शुरू की। डिप्टी रेंजर सहित चार कर्मचारियों को निलंबित किया गया और संबंधित रेंजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच के आदेश भी दिए गए हैं। मृत हिरणों का पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार किया गया। सुरक्षा सुनिश्चित करने और संभावित जोखिमों को कम करने के लिए संजय पार्क को अस्थायी रूप से आम जनता के लिए बंद कर दिया गया है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा नहीं है। यह वन्यजीव संरक्षण प्रणाली में मौजूद संरचनात्मक और प्रशासनिक कमजोरी का संकेत है। बाड़े की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक केवल कर्मचारियों की व्यक्तिगत लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे प्रबंधन और निगरानी तंत्र की विफलता को दर्शाती है। वन विभाग और पार्क प्रबंधन को यह समझना होगा कि यदि सुरक्षा मानकों में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसे हादसे दोहराए जा सकते हैं।
स्थानीय वन्यजीव प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अब समय आ गया है कि वन्यजीवों की सुरक्षा केवल दिखावटी आदेशों और कागजी कार्रवाई तक सीमित न रह जाए। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि पार्क में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए, गार्डिंग व्यवस्था की समीक्षा की जाए और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि केवल मानव संसाधनों और नियमों का होना पर्याप्त नहीं है। कर्मचारियों की जवाबदेही, प्रशिक्षित निगरानी टीम और तकनीकी सुरक्षा उपायों का सही संयोजन ही वन्यजीवों की वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पार्कों और संरक्षित क्षेत्रों में CCTV निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक गेट लॉकिंग और नियमित इंस्पेक्शन जैसी व्यवस्थाओं का होना आवश्यक है।
संजय पार्क की यह घटना प्रशासन और वन विभाग के लिए चेतावनी के रूप में सामने आई है। यह दर्शाती है कि यदि लापरवाही की कीमत वन्यजीवों की जान देकर चुकाई जाती रही, तो संरक्षण व्यवस्था का आधार ही कमजोर पड़ जाएगा। हिरणों की मौत सिर्फ़ वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल नहीं खड़ा करती, बल्कि यह हमारे समाज के प्रति जिम्मेदारी और नैतिकता की परीक्षा भी है।
और अंत में सवाल यही उठता है कि, क्या वन विभाग और प्रशासन अपने “रक्षक” कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की हिम्मत दिखाएंगे, या इस दर्दनाक घटना को भी कागजी रिपोर्टों और दायराओं के पीछे दबा देंगे, जबकि संरक्षित वन्यजीव अपनी जान की कीमत चुका चुके हैं?
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबरों और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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