कुदुरगढ़ महोत्सव 2026 : अंतिम दिवस पर पामगढ़ के मल्लखंभ खिलाड़ियों ने योग-शक्ति और साहस का अद्भुत प्रदर्शन
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता सौरभ साहू
पारंपरिक खेल और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करते हुए पामगढ़ के युवा खिलाड़ियों ने महोत्सव के समापन को बना दिया अविस्मरणीय
सूरजपुर जिले में आयोजित कुदुरगढ़ महोत्सव 2026 के समापन दिवस पर एक ऐसा दृश्य उपस्थित हुआ जिसने हर दर्शक के दिल को झकझोर दिया। पामगढ़ के प्रतिभाशाली मल्लखंभ खिलाड़ियों ने खंभे पर योग, संतुलन और साहसिक आसनों का ऐसा अद्भुत प्रदर्शन किया कि महोत्सव के अंतिम दिन को वास्तव में यादगार बना दिया।

मल्लखंभ, जो भारत की प्राचीन पारंपरिक खेल विधाओं में से एक है, में योग, कुश्ती और कलाबाजी का अनूठा संगम होता है। पामगढ़ के युवा खिलाड़ियों ने अपने असाधारण संतुलन, जटिल मुद्राओं और साहसिक करतबों से यह साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ की युवा पीढ़ी पारंपरिक खेलों को जीवंत रखने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। हर करतब पर उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साहपूर्ण जयकारों से खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इस अवसर पर मल्लखंभ खिलाड़ियों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे पारंपरिक खेल न केवल शारीरिक बल और मानसिक एकाग्रता का विकास करते हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का सेतु भी बनते हैं। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि शासन पारंपरिक खेलों के संवर्धन और खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।

वन विकास निगम और कुदुरगढ़ ट्रस्ट के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि कुदुरगढ़ महोत्सव का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं है, बल्कि इस पावन धरती की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और खेल परंपराओं को एक मंच पर जीवंत करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पामगढ़ के मल्लखंभ खिलाड़ियों ने महोत्सव के समापन को वास्तविक रूप से स्वर्णिम बना दिया।

मल्लखंभ के प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह केवल शारीरिक दक्षता का खेल नहीं है। इसमें मानसिक एकाग्रता, साहस, अनुशासन और पारंपरिक योग का अनूठा संगम होता है। पामगढ़ के खिलाड़ियों ने खंभे पर विभिन्न योग मुद्राएँ और कुशल संतुलन के करतब दिखाए, जो किसी भी साधारण दर्शक के लिए आश्चर्यजनक थे। उनके करतबों में शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता और साहस की झलक भी देखने को मिली।

महत्वपूर्ण यह है कि इस महोत्सव में खेलों के माध्यम से युवाओं में पारंपरिक खेलों के प्रति लगाव पैदा करना, उनके शारीरिक और मानसिक विकास को प्रोत्साहित करना और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देना मुख्य उद्देश्य था। जिले में आयोजित जिला स्तरीय वॉलीबाल और कबड्डी प्रतियोगिता के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले टीमों और प्रतिभागियों को कार्यक्रम के अंत में सम्मानित किया गया, जिससे प्रतियोगियों का मनोबल भी बढ़ा और युवा पीढ़ी में खेलों के प्रति उत्साह का संचार हुआ।

विशेषज्ञों का कहना है कि आज के आधुनिक युग में जहां युवा डिजिटल उपकरणों और आभासी खेलों की ओर अधिक आकर्षित हैं, पारंपरिक खेलों का यह मंच उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों और खेल परंपराओं से जोड़ने का अवसर देता है। मल्लखंभ जैसे खेल केवल शरीर को मजबूत नहीं बनाते, बल्कि उनमें मानसिक अनुशासन, साहस और धैर्य की भावना भी विकसित होती है।
कुदुरगढ़ महोत्सव ने यह भी स्पष्ट किया कि युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए सिर्फ मंच देना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए प्रशिक्षण, संसाधन, प्रोत्साहन और समयबद्ध योजना की आवश्यकता है। पामगढ़ के खिलाड़ियों ने यह दिखा दिया कि यदि स्थानीय स्तर पर युवा प्रतिभाओं को अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।

महोत्सव के दौरान आयोजित सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों ने यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की युवा पीढ़ी केवल आधुनिक खेलों और तकनीकी कौशल तक सीमित नहीं है। वे अपनी सांस्कृतिक धरोहर को भी सम्मान और गर्व के साथ जीवित रख सकते हैं। यह महोत्सव दर्शकों के लिए केवल मनोरंजन का साधन नहीं था, बल्कि यह पारंपरिक खेलों और संस्कृति के महत्व को समझने और सराहने का एक मंच भी था।
सवाल यही उठता है कि, क्या हमारी युवा पीढ़ी, जो आधुनिक दुनिया के दबाव और डिजिटल जीवनशैली के बीच अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भूलती जा रही है, पारंपरिक खेलों और योग जैसी प्राचीन विधाओं को संरक्षित करने और उन्हें नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में सक्षम होगी, या यह अद्भुत कला समय के साथ विलुप्त हो जाएगी, जबकि इसके संरक्षक और खिलाड़ी आज भी अपना सर्वस्व लगा रहे हैं?
शासन का महोत्सव में इस प्रकार का खेल आयोजन अत्यंत सराहनीय है जिससे लोगों में खेल के प्रति रुचि बढ़ेगी
प्रदीप मिश्रा
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