15वें वित्त का घोटाला या सिस्टम की साजिश? सड़कों पर उतरे सरपंच-सचिव, प्रशासन पर उठे तीखे सवाल
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गौरेला–पेंड्रा–मरवाही, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
OTP और ई-ग्राम स्वराज में गड़बड़ी के आरोपों के बीच आंदोलन की चेतावनी, 3 दिन में कार्रवाई नहीं तो ताला बंदी और चक्का जाम
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 15वें वित्त आयोग की राशि में कथित गड़बड़ी का मामला अब सियासी और प्रशासनिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। लंबे समय से ठोस कार्रवाई नहीं होने और एकतरफा निर्णयों के आरोपों के बीच सरपंच संघ और सचिव संघ ने संयुक्त रूप से आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। जिलेभर से पहुंचे पंचायत प्रतिनिधियों ने रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय का रुख किया और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों की संख्या में सरपंच और सचिव सड़क पर उतर आए। हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर निकली रैली से शहर का माहौल गरमा गया और प्रशासनिक हलचल भी तेज हो गई। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि 15वें वित्त की राशि के लेनदेन में गंभीर गड़बड़ी हुई है, लेकिन असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई के बजाय पंचायत स्तर के सचिवों को निशाना बनाया जा रहा है।

प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार गौरेला को सात बिंदुओं का विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि 15वें वित्त आयोग की राशि के ट्रांसफर से जुड़ी सभी फाइलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही भुगतान पाने वाले वेंडरों, किए गए कार्यों और सामग्री आपूर्ति की वास्तविकता की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
संघ ने गंभीर आरोप लगाया कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल में सरपंच और सचिवों के मोबाइल नंबर की जगह कंप्यूटर ऑपरेटर का नंबर दर्ज कर दिया गया था। इसके कारण भुगतान से जुड़े OTP ऑपरेटर को प्राप्त होते रहे और कथित रूप से बिना पंचायत प्रतिनिधियों की जानकारी के बड़े पैमाने पर भुगतान किए गए। आरोप यह भी है कि कई मामलों में बिना किसी कार्य और सामग्री आपूर्ति के ही लाखों-करोड़ों रुपये वेंडरों को जारी कर दिए गए।
मामले में आठ सचिवों के निलंबन से विवाद और गहरा गया है। संघ का कहना है कि पंचायत स्तर के प्रतिनिधियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि वास्तविक जिम्मेदार—वेंडर, ऑपरेटर और संबंधित अधिकारी—अब भी कार्रवाई से दूर हैं। डिजिटल सिग्नेचर (DSC) की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। संघ का कहना है कि जब डीएससी का अप्रूवल जनपद स्तर से होता है तो अन्य पंचायतों के डीएससी से भुगतान होना पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

इधर प्रशासन द्वारा आठ ग्राम पंचायतों के बैंक खाते सील कर दिए जाने से विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि इसका सीधा असर ग्रामीण जनता पर पड़ रहा है और निर्दोष पंचायतों को इसकी सजा भुगतनी पड़ रही है।
सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष लालचंद सोनवानी ने आरोप लगाया कि कार्रवाई विधि विरुद्ध है और असली आरोपी अब भी बचाए जा रहे हैं। वहीं सचिव संघ के जिला अध्यक्ष किशन राठौर ने कहा कि कुछ ऐसे सचिवों पर भी कार्रवाई की गई है जो उस समय संबंधित पंचायतों में पदस्थ ही नहीं थे, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
तहसीलदार गौरेला ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए भरोसा दिलाया कि सभी बिंदुओं को गंभीरता से लिया जाएगा और जांच के लिए उच्च कार्यालय को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि सरपंच और सचिव संघ ने प्रशासन को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। यदि निलंबित सचिवों को बहाल नहीं किया गया और वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 26 मार्च से जिलेभर में काम बंद-कलम बंद हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है। आगे की रणनीति के तहत 30 मार्च को जनपद पंचायत गौरेला में ताला बंदी और 31 मार्च को सेमरा तिराहा में चक्का जाम का ऐलान भी किया गया है।
जब करोड़ों की राशि का लेनदेन सिस्टम के जरिए हुआ तो असली जिम्मेदार कौन है—पंचायत प्रतिनिधि, ऑपरेटर या फिर पूरा प्रशासनिक तंत्र?
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबरों और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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