“संत पर हमला केवल हत्या नहीं, सनातन की चेतना पर प्रहार” – महंत त्यागी जी महाराज
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राजनांदगांव छत्तीसगढ़
संत की हत्या पर संत समाज की पीड़ा : धर्म-संप्रदाय और जातिवाद की लड़ाई छोड़ राष्ट्रहित में एकजुट हो देश
डोंगरगढ़: छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित शनि धाम मुरमुंडा आश्रम के महंत तथा गोरखनाथ युवा वाहिनी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री महंत त्यागी जी महाराज ने गौ रक्षा के लिए समर्पित संत फरसा वाले बाबा की गौ तस्करों द्वारा वाहन चढ़ाकर की गई निर्मम हत्या पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक संत की हत्या नहीं है, बल्कि यह सनातन परंपरा, गौ संस्कृति और उस आध्यात्मिक चेतना पर हमला है जो भारत की आत्मा को जीवित रखती है।
महंत त्यागी जी महाराज ने अत्यंत भावुक स्वर में कहा कि संतों का अपना कोई निजी परिवार नहीं होता। पूरा सनातन समाज ही उनका परिवार होता है और गौ माता उनके लिए केवल एक पशु नहीं बल्कि धर्म, संस्कृति और करुणा का जीवंत प्रतीक है। गौ रक्षा करना संतों का धर्म है, क्योंकि गौ से ही गांव, संस्कृति और सनातन की जड़ें मजबूत होती हैं।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गौ तस्करों ने एक संत को वाहन से कुचल कर मार दिया, वह पूरे देश के लिए चिंता और शर्म का विषय है। यदि गौ रक्षा के लिए खड़े होने वाले संतों की सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं होगी तो यह समाज और शासन दोनों के लिए गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
महंत त्यागी जी महाराज ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से मांग की कि गौ तस्करी पर पूर्ण रोक लगाने और गौ रक्षा में लगे संतों व समाजसेवियों की सुरक्षा के लिए कठोर और प्रभावी कानून बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं पर केवल निंदा नहीं, बल्कि ठोस और कठोर कार्रवाई आवश्यक है ताकि भविष्य में कोई भी अपराधी ऐसी हिम्मत न कर सके।
संत समाज से आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि संत, साधु और सनातन समाज एकजुट होकर गौ माता, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए संगठित प्रयास करें।
महंत त्यागी जी महाराज ने राजनेताओं से भी एक स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जातिवाद के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति बंद होनी चाहिए। भारत की शक्ति उसकी एकता में है, और जब समाज को छोटी-छोटी पहचान में बांट दिया जाता है तो राष्ट्र कमजोर होता है।
उन्होंने कहा कि राजनीति का अर्थ केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं है, बल्कि समाज के लिए नई नीतियां बनाना और राष्ट्र को मजबूत करना है। इसलिए राजनेताओं को चाहिए कि वे समाज को जोड़ने का काम करें, न कि धर्म, संप्रदाय और जातिवाद के नाम पर उसे विभाजित करें।
महंत त्यागी जी महाराज ने देशवासियों से भी आह्वान करते हुए कहा कि यह समय आपसी विवादों और विभाजन से ऊपर उठने का है। सभी धर्म, संप्रदाय और जाति के लोग मिलकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें और भारत को एक सशक्त, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए कार्य करें।
अंत में उन्होंने फरसा वाले बाबा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान केवल एक घटना नहीं है, बल्कि यह समाज को जागृत करने वाला संदेश है। यदि समाज और शासन समय रहते नहीं जागे तो ऐसी घटनाएं संस्कृति और नैतिक मूल्यों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।
उन्होंने कहा “जब संत सुरक्षित होंगे, गौ माता सुरक्षित होगी और समाज एकजुट होगा, तभी राष्ट्र सशक्त होगा और भारत विश्व के सामने अपने सांस्कृतिक वैभव के साथ आगे बढ़ेगा।”
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