विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में बड़ा कदम, मुख्यमंत्री के विभागों के लिए 10,617 करोड़ से अधिक की अनुदान मांगें पारित
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
सिंचाई, ऊर्जा, डिजिटल गवर्नेंस और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर सरकार का विशेष फोकस, दो वर्षों में 11 हजार करोड़ से अधिक की सिंचाई परियोजनाएं स्वीकृत
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ विधानसभा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विभागों से संबंधित 10 हजार 617 करोड़ 73 लाख 49 हजार रुपये की अनुदान मांगें पारित की गईं। इसमें सामान्य प्रशासन, जल संसाधन, खनिज साधन, ऊर्जा, जनसंपर्क, विमानन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और जिला परियोजनाओं सहित कई विभागों के लिए बजट का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार पिछले दो वर्षों से संकल्पित भाव से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटी हुई है और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की यात्रा अब तेजी से आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पहले दो बजटों की थीम ज्ञान और गति रही, जबकि इस बार बजट की थीम संकल्प रखी गई है। सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस और डिजिटल गवर्नेंस की नीति अपनाकर व्यवस्थागत लिकेज को समाप्त किया है। इसी का परिणाम है कि आम जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा अब सीधे जनकल्याणकारी योजनाओं में खर्च हो रहा है। उन्होंने बताया कि आबकारी विभाग का राजस्व पूर्व में 5 हजार 110 करोड़ रुपये था जो अब बढ़कर लगभग 11 हजार करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर लोकतंत्र और संविधान में विश्वास जताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन, सुरक्षा बलों की वीरता और प्रदेशवासियों के सहयोग से राज्य माओवादी हिंसा के अंधकार से बाहर निकल रहा है और अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, पुनर्निर्माण और विकास की नई शुरुआत हो रही है। नियद नेल्ला नार योजना के तहत 158 गांवों को शतप्रतिशत विद्युतीकृत किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में खनिज राजस्व की अहम भूमिका है। वर्ष 2021-22 में खनिज राजस्व 12 हजार 305 करोड़ रुपये था जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 14 हजार 592 करोड़ रुपये हो गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक 17 हजार करोड़ रुपये राजस्व प्राप्ति का अनुमान है। उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों को सुव्यवस्थित करते हुए पर्यावरण संतुलन बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य के कुल वन क्षेत्र के मात्र 0.96 प्रतिशत क्षेत्र में खनिज रियायतें स्वीकृत हैं और केवल 0.24 प्रतिशत वन क्षेत्र में ही खनन की अनुमति दी गई है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत दो वर्षों में लगभग 7 करोड़ पौधे लगाए गए हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को अग्रणी बनाने की दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 30 हजार मेगावाट है और कई नई परियोजनाओं के लिए निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों का कार्य प्रगति पर है। इसके साथ ही आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक मुफ्त बिजली, मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान के तहत लाखों घरेलू उपभोक्ताओं को राहत और किसानों के लिए डॉ. खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना के माध्यम से बड़ी सब्सिडी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने पिछले दो वर्षों में 11 हजार 107 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाएं स्वीकृत की हैं और लगभग 25 हजार हेक्टेयर नई सिंचाई क्षमता का सृजन किया गया है। बंद पड़ी योजनाओं को अटल सिंचाई योजना के माध्यम से पुनः शुरू किया गया है और 115 परियोजनाओं के पूर्ण होने से 76 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा। इस बार के बजट में नई सिंचाई योजनाओं और उनके रखरखाव के लिए 4 हजार 400 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रशासनिक कार्य संस्कृति में भी बदलाव ला रही है। मंत्रालय से लेकर मैदानी स्तर तक बायोमेट्रिक अटेंडेंस, ई-ऑफिस, ई-एचआरएमएस और स्पैरो जैसी व्यवस्थाओं से शासन अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बना है। 50 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस और 65 हजार से अधिक कर्मचारी ई-एचआरएमएस प्रणाली से जुड़ चुके हैं।
डिजिटल क्रांति को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के लिए 417 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री एआई मिशन के लिए 100 करोड़ रुपये रखे गए हैं जिसके माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों, आईटीआई और पॉलीटेक्निक में एआई डेटा लैब और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए 36 इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में विमानन अधोसंरचना का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। बिलासपुर एयरपोर्ट के अपग्रेडेशन से नाइट लैंडिंग की सुविधा मिलेगी और रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर तथा जगदलपुर एयरपोर्ट में भी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सीजी वायु योजना के माध्यम से बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर से हवाई सेवाओं का विस्तार किया जाएगा तथा रायगढ़ और कोरबा की हवाई पट्टियों के उन्नयन पर भी सरकार का विशेष ध्यान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रही है। रायपुर साहित्य उत्सव और प्रवासी छत्तीसगढ़िया सम्मेलन जैसे आयोजनों के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण और तकनीक के सहारे प्रशासनिक तंत्र को अधिक सक्षम और जनहितकारी बनाया जा रहा है ताकि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना जल्द साकार हो सके।
प्रदीप मिश्रा
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