फ्लाई ऐश प्रदूषण का मुद्दा संसद में उठा, सांसद ज्योत्सना महंत ने कोरबा के थर्मल पॉवर प्लांट और औद्योगिक प्रदूषण पर उठाए सवाल, स्थायी समाधान की मांग
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
कोरबा के थर्मल पॉवर प्लांट और औद्योगिक प्रदूषण को लेकर सांसद ने सरकार से मांगे ठोस जवाब, स्थायी समाधान की उठाई मांग
कोरबा:ACGN:- कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने संसद में कोरबा जिले में बढ़ती फ्लाई ऐश, लेगेसी ऐश और उद्योगों से फैल रहे प्रदूषण की गंभीर समस्या को उठाया। उन्होंने विशेष रूप से 100 प्रतिशत फ्लाई ऐश उपयोग का लक्ष्य पूरा न करने वाले विद्युत संयंत्रों से अब तक वसूले गए पर्यावरण मुआवजा और इस संबंध में की गई कार्यवाही की जानकारी मांगी। सांसद ने पिछले तीन वर्षों में कोरबा जिले के ऐश पॉन्ड में जमा लेगेसी ऐश की मात्रा और उसके वैज्ञानिक निपटान की समय-सीमा के बारे में भी विस्तार से सवाल किया।

सांसद ज्योत्सना महंत ने कहा कि कोरबा जिले में विद्युत संयंत्रों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला प्रदूषण न केवल स्थानीय पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है, बल्कि जल स्रोतों, कृषि और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रहा है। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संयंत्रों पर अब तक क्या कार्यवाही हुई और कितनी राशि के मुआवजा वसूले गए। सांसद ने वन क्षेत्रों और जनजातीय बस्तियों में हो रही अवैध ऐश डंपिंग को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी भी मांगी और कहा कि फ्लाई ऐश एक बड़ी समस्या बन चुकी है इसलिए इसके स्थायी समाधान की आवश्यकता है।
सरकार की ओर से केंद्रीय पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने सांसद को विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि 31 दिसंबर 2021 की अधिसूचना के अनुसार कोयला और लिग्नाइट आधारित ताप विद्युत गृहों को 100 प्रतिशत फ्लाई ऐश उपयोग करने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ में अब तक किसी ताप बिजली घर पर पर्यावरणीय मुआवजा अधिरोपित नहीं किया गया है। मंत्री ने बताया कि प्रथम तीन वर्षीय अनुपालन चक्र, यानी वित्त वर्ष 2022 से 2025 तक, राख उपयोग संबंधी किसी गैर-अनुपालन का पता नहीं चला।
मंत्री ने बताया कि थर्मल पॉवर प्लांटों को अप्रयुक्त संचित राख, अर्थात लेगेसी ऐश, का क्रमिक रूप से उपयोग करने के लिए निर्देशित किया गया है। 1 अप्रैल 2022 से अगले 10 वर्षों में इसका पूरी तरह उपयोग सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि हसदेव ताप विद्युत संयंत्र स्थित ऐश पॉन्ड को छोड़कर कोरबा जिले में अन्य बेमतलब के ऐश पॉन्ड को विद्युत कंपनी द्वारा फिर से प्राप्त किया गया है। वर्तमान में वहां संचित लेगेसी ऐश की कुल मात्रा 210.64 लाख मीट्रिक टन है।

सांसद ज्योत्सना महंत ने ऐश ट्रैकिंग और प्रबंधन के बारे में भी जानकारी मांगी। इस पर मंत्री ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा विकसित वेब पोर्टल पर मासिक राख उत्पादन और उपयोगिता की जानकारी अपलोड की जाती है। इसके अलावा ताप विद्युत संयंत्रों और सीपीसीबी द्वारा अधिकृत लेखा परीक्षकों से वार्षिक अनुपालन लेखा परीक्षा की रिपोर्ट तैयार करवाई जाती है।
सांसद ने पर्यावरणीय जुर्माने की राशि के उपयोग पर भी सवाल किया। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि 2021 की अधिसूचना के तहत एकत्रित किए गए पर्यावरण मुआवजा का उपयोग राख के सुरक्षित निपटान और राख आधारित उत्पादों व अनुसंधान के विकास में किया जाता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के थर्मल बिजली घरों पर पर्यावरणीय मुआवजा अब तक अधिरोपित नहीं किया गया है। इसलिए अब तक कोई मुआवजा वसूली नहीं हुई और इसका आबंटन वर्तमान में लागू नियमों के अनुसार किया जाएगा।
लोकसभा में सांसद ज्योत्सना महंत ने जोर देकर कहा कि फ्लाई ऐश और औद्योगिक प्रदूषण केवल कोरबा जिले की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के पर्यावरण और जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि इसके स्थायी समाधान के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे और नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा। सांसद ने इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय मंत्री से स्पष्ट और समयबद्ध जवाब की मांग की।
प्रदीप मिश्रा
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