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विद्यालय में बच्चों ने बनाए पक्षियों के लिए कृत्रिम घोंसले, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

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बिलासपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009


राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत व्यावसायिक प्रशिक्षण से विद्यार्थियों में कौशल, संवेदनशीलता और रचनात्मकता का विकास

बिलासपुर ACGN:- विकासखंड बिल्हा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महमंद में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत विद्यार्थियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण के तहत पक्षियों के लिए कृत्रिम घोंसला निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील बनाना रहा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताया गया कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पेड़ों की कमी के कारण पक्षियों के प्राकृतिक आवास लगातार समाप्त होते जा रहे हैं। ऐसे में कृत्रिम घोंसले बनाकर उन्हें सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने सूखी घास, तिनके, नारियल की जटा, जूट की रस्सी और अन्य पर्यावरण अनुकूल सामग्रियों की मदद से घोंसले तैयार किए। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों ने बेकार वस्तुओं का बेहतर उपयोग करना भी सीखा।


प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को घोंसला बनाने की पूरी प्रक्रिया सिखाई गई, जिसमें आधार तैयार करना, घास और तिनकों की बुनाई करना, घोंसले को कटोरी के आकार में ढालना और प्रवेश के लिए छोटा छेद बनाना शामिल रहा। विद्यार्थियों ने बड़ी उत्सुकता और लगन के साथ इस गतिविधि में भाग लिया, जिससे उनमें रचनात्मकता, धैर्य और एकाग्रता का विकास हुआ।


विद्यालय की वरिष्ठ व्याख्याता श्रीमती शांति सोनी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं बल्कि व्यावहारिक कौशल भी सिखाना आवश्यक है। इस प्रकार के प्रशिक्षण से बच्चों में आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती है और वे प्रकृति तथा जीव-जंतुओं के प्रति अधिक जिम्मेदार बनते हैं।


कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे अपने द्वारा बनाए गए घोंसलों को विद्यालय परिसर, पेड़ों की डालियों और अपने घरों की बालकनी में सुरक्षित स्थानों पर लगाएंगे तथा पक्षियों के लिए पानी और दाना भी उपलब्ध कराएंगे। इस पहल से न केवल पक्षियों को सुरक्षित आश्रय मिलेगा बल्कि आसपास के वातावरण में जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन भी बना रहेगा।

प्रदीप मिश्रा
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