सादगी, संतोष और पर्यावरण का संदेश देती कवियत्री मंजुला श्रीवास्तव की मार्मिक कविता
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By ACGN 7647981711, 9303948009
कवयित्री मंजुला श्रीवास्तव
आज के समय में जीवन की भागदौड़, दिखावे और अनावश्यक प्रतिस्पर्धा ने हमारे जीवन की सहजता और आनंद को कहीं न कहीं कम कर दिया है। जबकि सच्चा सुख सादगी, संतोष और प्रकृति के अनुकूल जीवन जीने में ही छिपा होता है। छोटी-छोटी आदतों और सरल विकल्पों को अपनाकर हम न केवल अपने जीवन को सहज और शांत बना सकते हैं, बल्कि पर्यावरण की रक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इसी कवियित्री मंजुला श्रीवास्तव द्वारा रचित यह कविता इसी भाव को व्यक्त करती हमें सादगीपूर्ण जीवन और संतुलित सोच की ओर प्रेरित करती है।
सादगी अपनाएँ, जीवन में शांति और खुशी पाएँ
जीवन में आनंद
जीवन में आनंद लाना हो तो
जिओ सरल होके
सरलता अपना लो
हर तरीके से
उदाहरणों से समझाती हूँ
एक-एक करके।
अपना लो स्टील की थाली कटोरियों वाली
ना होगी झंझट ज्यादा बर्तनों की सफ़ाई वाली
साथ ही रखने की जगह भी लगेगी कम
और खाने वालों की भी नहीं होती कोई उलझन।
रोज का जीवन हो
या फिर बात हो अतिथि सत्कार की
स्टील की कटोरियों वाली थाली सदा है सुहाती
बचाती ना केवल यह टूट-फूट से
चीनी मिट्टी या बोन चाइना की
अपितु करे सुरक्षा पर्यावरण की, देकर स्थिरता
कम कर जरूरत अधिक बर्तनों के क्रय की।
चाय-कॉफी के कप हो ना इतने महँगे
कि टूटने पर उनके दिल हमारा टूटे
या फिर नौकरानी पर गुस्सा बेमतलब का फूटे।
मिट्टी के कुल्हड़ या चीनी मिट्टी के कप
सहजता से गरिमा समेटे
हो पर्यावरण सुरक्षा और जेब भी अपनी ना फूँके।
ऐसे ही छोटे-छोटे बदलावों से
करें अपना जीवन शांत-सुगम
जीवन को दें प्राथमिकता
ना अपनाएँ कृत्रिम रंग-ढंग।
रहें खुश सीमित संसाधनों से
होड़ में पड़कर जीवन को ना फूँके
जीवन है अनमोल, रहे सदा अपनों के।
✍️कवियित्री – मंजुला श्रीवास्तव,नई दिल्ली
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