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अफीम का जाल, बुलडोजर की चोट और राजनीति में हलचल: दुर्ग से कुसमी तक नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

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दुर्ग/बलरामपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009


दुर्ग में अवैध कब्जे पर बुलडोजर, भाजपा नेता विनायक ताम्रकार निलंबित, बलरामपुर के कुसमी में 2–3 एकड़ में मिली अफीम की खेती से मचा हड़कंप


छत्तीसगढ़ में अवैध नशे के कारोबार और उससे जुड़े नेटवर्क को लेकर हाल के दिनों में सामने आए घटनाक्रमों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। दुर्ग जिले में अफीम की खेती के मामले में कार्रवाई के बाद अब सरगुजा संभाग के बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड के ग्राम त्रिपुरी में भी लगभग 2 से 3 एकड़ जमीन में अफीम की खेती मिलने का मामला सामने आया है। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और खेतों में लगी अफीम की फसल की जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह खेती जमीन को लीज पर लेकर की गई थी, जिसकी गहराई से जांच की जा रही है।

कुसमी में दो-तीन एकड़ पर अफीम की खेती सोशल मीडिया पर वायरल फोटो


इस पूरे मामले ने प्रशासनिक तंत्र के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है। इससे पहले दुर्ग जिले में सामने आए अफीम की खेती के मामले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार का नाम चर्चा में आने के बाद शासन और प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। इसी बीच जिला प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम समोदा में बुलडोजर चलाकर शासकीय भूमि पर किए गए कब्जे को हटाया।

दुर्ग में हुई अतिक्रमण पर प्रशासनिक कार्यवाही


कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर प्रशासनिक टीम ने जेसीबी की मदद से शासकीय भूमि पर किए गए कब्जे को हटाकर जमीन को मुक्त कराया। जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत दुर्ग अंतर्गत ग्राम समोदा, राजस्व निरीक्षक मंडल जेवरा सिरसा, तहसील एवं जिला दुर्ग में स्थित शासकीय घास भूमि खसरा नंबर 778, रकबा 0.13 हेक्टेयर पर अवैध रूप से पक्का दुकान बनाकर टीन शेड लगाया गया था। इसके अलावा सीमेंट पोल लगाकर तार से घेरा भी किया गया था। बताया गया कि उक्त शासकीय भूमि पर ग्राम के ही ब्रजेश ताम्रकार पिता गिरजाशंकर ताम्रकार द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर निर्माण कार्य किया गया था, जिसे प्रशासन ने हटाकर सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया।


प्रशासन की इस कार्रवाई को कई लोग उस पूरे घटनाक्रम से जोड़कर भी देख रहे हैं, जिसमें भाजपा नेता विनायक ताम्रकार का नाम अफीम की खेती के मामले में चर्चा में आया था। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ यह कार्रवाई नियमों के तहत की गई है।

वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी संगठनात्मक स्तर पर कार्रवाई करते हुए विनायक ताम्रकार को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निलंबित कर दिया। प्रदेश कार्यालय से जारी आदेश में कहा गया कि उनके आचरण और कृत्य से पार्टी की छवि धूमिल हुई है, जो अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।

उधर बलरामपुर जिले के कुसमी क्षेत्र में अफीम की खेती मिलने से प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। पुलिस और राजस्व विभाग की टीम लगातार जांच कर रही है कि खेतों में की गई इस अवैध खेती के पीछे कौन लोग शामिल हैं और यह नेटवर्क किन लोगों तक जुड़ा हुआ है। यदि यह मामला किसी संगठित गिरोह से जुड़ा हुआ पाया जाता है तो इसमें और बड़े खुलासे होने की संभावना भी जताई जा रही है।


इन घटनाओं ने समाज और राजनीति दोनों के सामने एक गंभीर सवाल भी खड़ा कर दिया है। कई बार देखा जाता है कि कुछ लोग नेताओं के साथ फोटो खिंचवाकर या पार्टी पदाधिकारी के रूप में अपनी पहचान बनाकर प्रभावशाली बनने की कोशिश करते हैं और उसी प्रभाव का उपयोग अवैध गतिविधियों को बचाने या बढ़ावा देने के लिए करते हैं। ऐसे मामलों के सामने आने के बाद यह आवश्यक हो गया है कि किसी भी व्यक्ति को संगठन में जिम्मेदारी देने या सार्वजनिक मंचों पर प्रमुखता देने से पहले उसकी पृष्ठभूमि और गतिविधियों की पूरी जानकारी ली जाए, ताकि सत्ता और संगठन की साख पर किसी भी प्रकार की आंच न आए।

प्रदेश में अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

आरोप-प्रत्यारोप के बीच सरकार ने दिए सख्त निर्देश
इसी बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अवैध अफीम खेती के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में सर्वे कर जांच करने के आदेश दिए हैं और 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करने को कहा है।

अफीम खेती मामले पर तेज हुई सियासत, विपक्ष ने भाजपा कार्यालयों का किया घेराव

भाजपा कार्यालय का घेराव करने जाते कांग्रेसी

वहीं विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर पूरे प्रदेश में भाजपा कार्यालयों का घेराव करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार एक ओर नशे के खिलाफ अभियान चलाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर नशे के कारोबार को संरक्षण भी दे रही है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि पहले भाजपा शराबबंदी के मुद्दे को लेकर पूर्ववर्ती सरकार पर लगातार हमला करती रही, लेकिन अब स्वयं सत्ता में आने के बाद नशे के कारोबार पर नियंत्रण करने में विफल नजर आ रही है।


विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि अफीम की अवैध खेती के मामले में भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में चलाया जा रहा नशा मुक्ति अभियान तभी सफल होगा जब शासन, प्रशासन और आम नागरिक मिलकर इस दिशा में गंभीरता से काम करें। केवल सरकारी कार्रवाई ही नहीं बल्कि समाज की जागरूकता और जिम्मेदारी से ही नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। यदि समाज, राजनीति और प्रशासन मिलकर सतर्कता बरतें तो छत्तीसगढ़ को नशा मुक्त बनाने की दिशा में यह एक मजबूत कदम साबित हो सकता है।

प्रदीप मिश्रा
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