‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ ने मुंगेली जिले में बाल विवाह उन्मूलन अभियान को दी नई गति
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मुंगेली, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
मुंगेली ACGN:- भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के अंतर्गत मुंगेली जिले में ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया गया। अभियान के समापन अवसर पर जिला समन्वयक ललित सिन्हा एवं रथ संयोजक अंशु चंद्रवंशी, मुंगेली जिले के कार्यकर्ता रतन कश्यप और सियाराम कश्यप ने बताया कि लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया से यह विश्वास मजबूत हुआ है कि बाल विवाह मुक्त मुंगेली और बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य जल्द ही हासिल किया जा सकता है।

अभियान का नेतृत्व और समर्थन
कृषक सहयोग संस्थान, जो 250 से अधिक संगठनों के राष्ट्रीय नेटवर्क “Just Rights for Children” का सहयोगी संगठन है, ने जिले भर में अभियान संचालित किया। ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। मुंगेली जिले में रथ को जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकांत पाण्डेय ने हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। रथ ने जिले के गांवों और कस्बों में जाकर दो लाख से अधिक लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक किया।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से पूर्व विशेष जागरूकता रैली
आज, दिनांक 7 मार्च 2026, लोरमी विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत नारायणपुर में शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। इसमें शिक्षक, छात्र-छात्राओं और ग्रामवासियों ने भाग लेकर जनजागरूकता फैलाने में सक्रिय योगदान दिया।

अभियान के तीन चरण
शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से विद्यार्थियों को जागरूक करना।
धर्मगुरुओं से अपील, कि वे विवाह संपन्न कराने से पहले वर-वधू की आयु की पुष्टि करें और बाल विवाह में शामिल न हों।
पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम, जिसमें स्थानीय समुदाय और सेवाप्रदाता जैसे कैटरर्स, सजावटकर्मी, बैंड-बाजा संचालक, घोड़ी सेवा प्रदाता आदि को कानून की जानकारी दी गई और बाल विवाह में सेवा न देने के लिए प्रेरित किया गया।
कृषक सहयोग संस्थान के निदेशक डॉ. एच.बी. सेन ने अभियान को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि बाल विवाह केवल सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है। यह बच्चियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है और उन्हें कुपोषण, अशिक्षा और गरीबी के चक्र में धकेलता है।
उन्होंने बताया कि सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से यह अभियान अब एक व्यापक जनभागीदारी वाला जनआंदोलन बन गया है। इसका उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक संदेश पहुंचाना है कि बाल विवाह रोकना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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