सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
निर्माण कार्यों की फील्ड में नियमित निगरानी के निर्देश, दोषी ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट
रायपुर ACGN:- प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ताहीन कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कहीं भी निर्माण कार्य में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने ये निर्देश मंत्रालय महानदी भवन में लोक निर्माण विभाग के कार्यों और गतिविधियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री अरुण साव सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सड़क निर्माण के बाद निरीक्षण करने के बजाय निर्माण के दौरान ही फील्ड में जाकर नियमित निगरानी की जाए ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह सड़क कुछ वर्ष पहले ही बनी थी लेकिन उसकी स्थिति तेजी से खराब हो गई है। यदि कोई सड़क चार वर्ष भी नहीं चलती तो यह गंभीर लापरवाही का विषय है। मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए निर्माण के दौरान ही सख्त निगरानी करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण कार्य हो रहे हैं, लेकिन आमजन को इसकी पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रमुख सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन मुख्यमंत्री और मंत्रियों के हाथों से कराए जाएं और उन्हें व्यापक रूप से जनता के सामने प्रस्तुत किया जाए ताकि विकास कार्यों की जानकारी लोगों तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि सड़क निर्माण के टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन तक की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार बहुत कम दर पर टेंडर ले लेते हैं, जिसके कारण समय पर और गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में ठेकेदार की जिम्मेदारी तय की जाए और यदि कार्य निर्धारित गुणवत्ता और समय-सीमा में पूरा नहीं होता तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
बैठक में यह भी बताया गया कि प्रदेश में लगभग 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं जहां बरसात के दौरान संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन गांवों को सड़क और पुल-पुलियों के माध्यम से जोड़ने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जाए ताकि लोगों को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
मुख्यमंत्री ने लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़–मिलूपारा–तमनार मार्ग के निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर देते हुए कहा कि इस क्षेत्र में बड़ी आबादी निवास करती है और यहां सड़क निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 सहित कई अन्य महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में शासकीय भवनों का निर्माण अब आधुनिक डिजाइन और नई तकनीक के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भवनों का डिजाइन उनकी उपयोगिता के अनुसार बनाया जाए और भूमि के बेहतर उपयोग के लिए क्षैतिज निर्माण के बजाय ऊर्ध्वाधर संरचनाओं को बढ़ावा दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आमजन के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं और लोग सड़क की गुणवत्ता को बहुत महत्व देते हैं। इसलिए लोक निर्माण विभाग को अपने कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखना होगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि ऐसा तंत्र विकसित किया जाए जिससे सड़कों में बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिल सके और उन्हें तुरंत ठीक किया जा सके।
प्रदीप मिश्रा
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