कोरबा में अडानी समूह के 1600 मेगावाट ताप विद्युत विस्तार पर पर्यावरणीय जनसुनवाई
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
विकास की रफ्तार और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच निर्णायक क्षण
कोरबा ACGN:- औद्योगिक पहचान वाले कोरबा जिले में एक बार फिर ऊर्जा विस्तार और पर्यावरणीय संतुलन को लेकर व्यापक चर्चा सामने आई है। अडानी समूह की सहयोगी इकाई मेसर्स कोरबा पावर लिमिटेड द्वारा संचालित ताप विद्युत परियोजना के तृतीय चरण में 1600 मेगावाट अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया है। यह विस्तार पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संशोधित प्रावधानों के अंतर्गत आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसके तहत 27 फरवरी 2026 को सरगबुंदिया में पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित की गई।

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में आयोजित यह जनसुनवाई प्रातः 11 बजे प्रारंभ होकर दोपहर 2 बजे तक चली। आयोजन छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा किया गया।
इसमें अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल, पर्यावरण अधिकारी अंकुर साहू, अनुविभागीय अधिकारी सरोज महिलांगे, परियोजना प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि तथा सरगबुंदिया, ढनढनी, खोड्डल, पहांदा और पताड़ी सहित आसपास के गांवों के ग्रामीण उपस्थित रहे। प्रशासन के अनुसार बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लेकर अपने सुझाव और आपत्तियाँ दर्ज कराईं।

परियोजना का विकास तीन चरणों में नियोजित है। प्रथम चरण की 2 गुणा 300 मेगावाट इकाइयाँ पहले से संचालित हैं, द्वितीय चरण की 2 गुणा 660 मेगावाट इकाइयाँ निर्माणाधीन हैं और अब तृतीय चरण में 2 गुणा 800 मेगावाट की अति उच्च दाब दक्ष तकनीक आधारित इकाइयाँ प्रस्तावित हैं। प्रस्तावित विस्तार के पूर्ण होने पर कुल उत्पादन क्षमता 3400 मेगावाट तक पहुँचाने की योजना है, जिससे क्षेत्र की औद्योगिक और ऊर्जा स्थिति और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।

जनसुनवाई का उद्देश्य परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों पर सार्वजनिक सुझाव प्राप्त करना था, लेकिन चर्चा का केंद्र स्थानीय रोजगार, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के विकास जैसे मुद्दों पर अधिक केंद्रित रहा। कई वक्ताओं ने इसे क्षेत्रीय विकास का अवसर बताया और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के साथ रोजगार देने की मांग रखी। वहीं कुछ सामाजिक प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने राख निस्तारण, वायु प्रदूषण, भूजल स्तर में गिरावट और जल स्रोतों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की।
परियोजना प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित इकाइयाँ अति उच्च दाब दक्ष तकनीक पर आधारित होंगी, जिससे ईंधन की खपत कम होगी और प्रदूषक उत्सर्जन में कमी आएगी। राख के सुरक्षित भंडारण और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था का भी आश्वासन दिया गया। प्रबंधन का दावा है कि नई तकनीक पुराने संयंत्रों की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल होगी।
गौरतलब है कि कोरबा जिला पहले से कोयला आधारित उद्योगों के कारण प्रदूषण की चुनौती झेल रहा है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल उत्पादन कंपनी एनटीपीसी वेदांता ग्रुप बालको से जुड़े पर्यावरणीय मामलों पर बहस होती रही है। साथ ही जीवनदायिनी हसदेव नदी की सुरक्षा और जल गुणवत्ता को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे परिदृश्य में यह नया विस्तार केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने का विषय नहीं, बल्कि पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और प्रशासनिक पारदर्शिता की भी कसौटी बन गया है।
परियोजना प्रमुख सी. वी. के. प्रसाद ने कहा कि इस विस्तार से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा तथा ग्रामों में शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना विकास के नए आयाम खुलेंगे। उन्होंने क्षेत्रीय विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए जनसुनवाई में भाग लेने वाले ग्रामीणों, अधिकारियों और सभी हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
जनसुनवाई की औपचारिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अब असली परीक्षा यह होगी कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन किस प्रकार व्यवहार में सुनिश्चित किया जाता है। स्थानीय नागरिकों की अपेक्षाएँ और आशंकाएँ दोनों बनी हुई हैं। आने वाले समय में निगरानी तंत्र की पारदर्शिता, प्रदूषण नियंत्रण की प्रभावशीलता और रोजगार संबंधी वादों की जमीनी हकीकत ही इस परियोजना की वास्तविक दिशा तय करेगी।
प्रदीप मिश्रा
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