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डोंगरगढ़ मुरमुंडा आश्रम में गौ संरक्षण का संकल्प

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राजनांदगांव छत्तीसगढ़ 

By ACGN 7647981711, 9303948009 

डोंगरगढ़ के समीप स्थित शनि धाम से महंत त्यागी जी महाराज का संदेश

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ के समीप स्थित मुरमुंडा आश्रम (शनि धाम) में आयोजित एक आध्यात्मिक एवं सामाजिक संवाद कार्यक्रम में गोरखनाथ युवा वाहिनी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री महंत त्यागी जी महाराज ने गौ माता के महत्व, उपयोगिता और संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवनधारा है। इसी कारण हमारे शास्त्रों में गाय को “माता” कहा गया है। उन्होंने शासन से मांग की कि गाय को “राष्ट्र माता” का दर्जा दिया जाना चाहिए, क्योंकि गाय का दूध किसी एक धर्म, जाति या संप्रदाय के लिए नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव समाज के लिए समान रूप से उपयोगी है।

गाय को माता क्यों कहा जाता है?

महंत त्यागी जी महाराज ने बताया कि पोषण का स्रोत: गाय का दूध शिशु से लेकर वृद्ध तक सभी के लिए पोषक तत्वों से भरपूर है। इससे दही, घी, मक्खन, छाछ जैसे अनेक उत्पाद बनते हैं जो स्वास्थ्यवर्धक हैं।

धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व: भारतीय परंपरा में गौ पूजन, गौ सेवा और गोवर्धन पूजा जैसी परंपराएं गाय के प्रति श्रद्धा का प्रतीक हैं।

मातृत्व का भाव: जिस प्रकार माता अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है, उसी प्रकार गाय मानव जीवन को पोषण और सहारा देती है।

गोबर और कंडों के वैज्ञानिक व पर्यावरणीय लाभ

त्यागी जी महाराज ने विस्तार से बताया कि गाय का गोबर केवल अपशिष्ट नहीं, बल्कि प्रकृति का अमूल्य वरदान है

शुद्धता का प्रतीक: प्राचीन समय में घरों की लिपाई-पुताई गाय के गोबर से की जाती थी, जिससे वातावरण शुद्ध रहता था और कीटाणु नष्ट होते थे।

हवन और धार्मिक कार्य: आज भी यज्ञ-हवन में गाय के कंडों का उपयोग किया जाता है।

पर्यावरण संरक्षण: गोबर के कंडों का धुआं वातावरण को शुद्ध करने में सहायक माना जाता है और यह प्रदूषण नहीं फैलाता।

जैविक खाद: गोबर प्राकृतिक खाद के रूप में भूमि की उर्वरता बढ़ाता है।

गोबर से उत्पाद: दीये, कंडे, जैविक खाद, धूपबत्ती, गौ-काष्ठ आदि उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जो पर्यावरण संरक्षण में सहायक हैं।

छत्तीसगढ़ के हर जिले में मॉडल गौशाला का लक्ष्य

महंत त्यागी जी महाराज ने बताया कि गोरखनाथ युवा वाहिनी छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले में गौशाला निर्माण का संकल्प लेकर कार्य कर रही है। इन गौशालाओं को “मॉडल गौशाला” के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां गौ माता की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित होगा। आवारा एवं घुमंतू पशुओं को आश्रय दिया जाएगा। लगभग 10 से 12 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। गोबर आधारित उत्पादों का निर्माण कर पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वे स्वयं प्रदेश के प्रत्येक जिले का भ्रमण कर जनजागरण अभियान चला रहे हैं और समाज को गौ सेवा के लिए संगठित कर रहे हैं।

शासन से सहयोग की अपील

महंत त्यागी जी महाराज ने शासन से आग्रह किया कि गोरखनाथ युवा वाहिनी शासन के मंशानुरूप कार्य करने को इच्छुक है और गौ संरक्षण के लिए हरसंभव सहयोग देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि शासन का सहयोग प्राप्त हो, तो यह अभियान प्रदेशव्यापी जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

समाज से एकजुट होने का आह्वान

उन्होंने ग्रामीणों और आमजन से अपील की कि सभी मिलकर “गोरखनाथ गौ आश्रम” के निर्माण में सहयोग दें, ताकि सड़कों पर भटकते पशुओं को सुरक्षित आश्रय मिल सके और साथ ही युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हों।

त्यागी जी महाराज ने कहा कि “सनातन धर्म और गौ माता की रक्षा तभी संभव है, जब हम सब एकजुट होकर आगे बढ़ें।”

उन्होंने गोरखनाथ युवा वाहिनी से जुड़ने के इच्छुक लोगों से संपर्क करने की अपील करते हुए कहा कि समाज की सहभागिता से ही यह अभियान सफल होगा।

संपर्क हेतु:

महंत त्यागी जी महाराज 9244373590

राष्ट्रीय संगठन मंत्री, गोरखनाथ युवा वाहिनी डोंगरगढ़, जिला राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)

यह संदेश केवल आस्था का नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और सामाजिक समरसता का भी आह्वान है।

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