छत्तीसगढ़ को ऊर्जा राजधानी बनाने की तैयारी तेज
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
ऊर्जा सचिव डॉ. रोहित यादव ने बताईं उपलब्धियां, 3.4 लाख करोड़ निवेश वाली नई परियोजनाओं की दी जानकारी
रायपुर ACGN:- ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने नया रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में पत्रकारों से चर्चा करते हुए प्रदेश की ऊर्जा उपलब्धियों और आने वाली योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने साफ कहा कि छत्तीसगढ़ को देश की ऊर्जा राजधानी बनाने की दिशा में सरकार गंभीरता से काम कर रही है और उत्पादन से लेकर पारेषण और वितरण तक हर स्तर पर व्यापक योजना लागू की जा रही है।

डॉ. यादव ने बताया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी, एनटीपीसी और निजी उत्पादकों को मिलाकर प्रदेश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 30 हजार 671.7 मेगावाट है। इसमें 28 हजार 824 मेगावाट ताप विद्युत, 220 मेगावाट जल विद्युत और सोलर, बायोमास सहित अन्य स्रोतों से 2 हजार 47 मेगावाट क्षमता शामिल है। ताप विद्युत क्षेत्र में राज्य उत्पादन कंपनी की 2 हजार 840 मेगावाट, एनटीपीसी और निजी क्षेत्र की 20 हजार 299 मेगावाट तथा कैप्टिव पावर प्लांट्स की 5 हजार 266 मेगावाट क्षमता है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार का फोकस अब ताप विद्युत पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने पर है। नेट जीरो कार्बन लक्ष्य के तहत वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में जल विद्युत और पंप स्टोरेज परियोजनाएं अहम भूमिका निभाएंगी। राज्य सरकार ने पंप स्टोरेज नीति 2023 लागू की है, जिसके तहत 8 हजार 300 मेगावाट क्षमता के छह स्थलों की पहचान की गई है। इनमें से पांच की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। निजी क्षेत्र में भी लगभग 5 हजार मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं पर काम जारी है।

ऊर्जा सचिव ने बताया कि एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और राज्य उत्पादन कंपनी के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से लगभग 2 हजार मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। कोरबा में फ्लोटिंग सोलर प्लांट, बंद राखड़ बांध पर सौर संयंत्र और 500 मेगावाट-ऑवर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की स्थापना प्रस्तावित है। प्रदेश में 32 हजार 100 मेगावाट क्षमता की नई परियोजनाओं के लिए विभिन्न संस्थाओं के साथ एमओयू किए गए हैं, जिनसे करीब 3.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
उन्होंने बताया कि कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों और मड़वा में 800 मेगावाट की इकाई पर काम प्रगति पर है। पारेषण क्षेत्र में उपकेंद्रों की संख्या 132 से बढ़कर 137 हो गई है और 5 हजार 200 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क स्थापित कर 131 उपकेंद्रों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा गया है।
वितरण क्षेत्र में भी तेजी आई है और प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या 65 लाख से अधिक हो चुकी है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, पीएम कुसुम, डॉ. खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना और बीपीएल उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से लाखों परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नियद नेल्ला नार योजना के तहत सैकड़ों गांवों तक बिजली पहुंचाई गई है।
क्रेडा के माध्यम से पिछले दो वर्षों में हजारों सोलर सिंचाई पंप, पेयजल पंप और सोलर हाईमास्ट स्थापित किए गए हैं। डॉ. यादव ने कहा कि संतुलित ऊर्जा मिश्रण, तकनीकी आधुनिकीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के जरिए छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर और अग्रणी ऊर्जा राज्य बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों के सवालों के जवाब भी दिए और अगले तीन वर्षों की कार्ययोजना साझा की।
कार्यक्रम में सीएसपीडीसीएल के एमडी भीम सिंह कंवर, सीएसपीजीसीएल के एमडी एस के कटियार, सीएसपीटीसीएल के एमडी राजेश कुमार शुक्ला सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
प्रदीप मिश्रा
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