छत्तीसगढ़ में आदिवासी नेतृत्व गढ़ रहा है विकास के नए सोपान
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(मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के जन्मदिवस पर विशेष)
By ACGN 7647981711, 9303948009
रायपुर, / छत्तीसगढ़ की सुरम्य वादियों में बसे जशपुर जिला के ग्राम बगिया में 21 फरवरी को जन्मे मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सरलता, संवेदनशीलता और दृढ़ नेतृत्व के प्रतीक माने जाते हैं। आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाले श्री साय ने अपने दो वर्ष के मुख्यमंत्रित्व काल में राज्य को विकास, सुशासन और जनकल्याण की नई दिशा प्रदान की है। उनका नेतृत्व यह प्रमाणित करता है कि जब शासन संवेदनशील हाथों में हो और निर्णय जनहित को केंद्र में रखकर लिए जाएं, तो विकास की राह स्वतः प्रशस्त हो जाती है।
मुख्यमंत्री श्री साय का जीवन संघर्ष, समर्पण और समाज सेवा की प्रेरक यात्रा रहा है। वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं, इसलिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषकों की समस्याओं को निकटता से समझते हैं। यही कारण है कि उनकी सरकार ने किसानों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। हाल ही में केबिनेट बैठक में राज्य में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अंतर राशि का भुगतान होली पर्व से पूर्व एकमुश्त करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25 लाख 24 हजार 339 किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है।
कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान के मूल्य के अंतर की राशि के रूप में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का भुगतान होली से पहले किया जाएगा। पिछले दो वर्षों में इस योजना के माध्यम से किसानों को 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है। इस वर्ष के भुगतान के साथ यह आंकड़ा 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा। प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है, जो देश में सर्वाधिक है। इस निर्णय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार हुआ है और बाजारों में भी सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में राज्य की औद्योगिक प्रगति भी उल्लेखनीय रही है। नवीन औद्योगिक नीति के तहत अब तक 7 लाख 83 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ निवेश के लिए एक भरोसेमंद और उभरता हुआ औद्योगिक केंद्र बन रहा है।
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” घोषित किया गया है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। 42 हजार 878 महिला स्व-सहायता समूहों को आसान ऋण के माध्यम से 129.46 करोड़ रुपये का लाभ दिया गया है। प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के अंतर्गत 4.81 लाख महिलाओं को 237 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। 19 लाख से अधिक महिलाओं को पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है।
महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर तथा महिला हेल्पलाइन 181 की स्थापना की गई है। पंचायत स्तर पर 52.20 करोड़ रुपये की लागत से 179 महतारी सदनों का निर्माण कराया जा रहा है। नवा रायपुर में 200 करोड़ रुपये की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण प्रस्तावित है, जहां महिला समूहों के उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहन मिलेगा।
भूमिहीन कृषि मजदूरों के कल्याण के लिए दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के अंतर्गत 5.62 लाख श्रमिकों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है। आवास और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में 26 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं।
स्वच्छ पेयजल को प्राथमिकता देते हुए 41 लाख से अधिक घरों तक नल जल पहुंचाया गया है। गुणवत्तापूर्ण जल आपूर्ति के लिए 77 जल परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं तथा 70 समूह जल प्रदाय योजनाओं से 3208 गांव लाभान्वित हो रहे हैं। राज्य के शत-प्रतिशत गांवों के विद्युतीकरण की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना के माध्यम से बस्तर क्षेत्र रेल नेटवर्क से जुड़ रहा है। जगदलपुर-विशाखापट्नम तथा रायपुर-विशाखापट्नम सड़क परियोजनाएं विकास के नए द्वार खोल रही हैं। प्रदेश के 32 नगरीय निकायों में नॉलेज बेस्ड सोसायटी हेतु लाइट हाउस निर्माण की पहल की जा रही है, जिससे युवाओं को आधुनिक शिक्षा और डिजिटल संसाधनों की सुविधा मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने “नियद नेल्ला नार”, “अखरा निर्माण योजना” और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने का कार्य भी किया है। वे समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं। उनका मानना है कि विकास तभी सार्थक है जब उसका लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री श्री साय का अब तक का कार्यकाल यह सिद्ध करता है कि यदि नेतृत्व ईमानदार, समर्पित और जनभावनाओं से जुड़ा हो तो विकास की राह कठिन नहीं रहती। उनके जन्मदिवस के अवसर पर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी नेतृत्व केवल शासन नहीं कर रहा, बल्कि विकास के नए सोपान गढ़ रहा है और प्रदेश को समृद्धि की ओर अग्रसर कर रहा है।
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