जनगणना-2027 राष्ट्र निर्माण की आधारशिला : विष्णु देव साय
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रायपुर छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
राष्ट्रीय दायित्व को गंभीरता, सटीकता और संवेदनशीलता से निभाने का आह्वान
रायपुर। भारत की जनगणना-2027 के सफल संचालन हेतु आयोजित राज्य एवं संभाग स्तरीय अधिकारियों के प्रशिक्षण सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने प्रदेश के संभागायुक्तों, कलेक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व को पूर्ण गंभीरता, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ निभाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 की जनगणना स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी। यह प्रशासन की विश्वसनीयता और शासन की पारदर्शिता की कसौटी भी है। यदि आंकड़ों में त्रुटि या अधूरापन होगा तो विकास योजनाओं का लक्ष्य भटक सकता है। एक भी व्यक्ति या परिवार छूट जाना विकास की धारा में रिक्त स्थान छोड़ देगा।
उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी। मोबाइल एप और वेब पोर्टल के माध्यम से डेटा संकलन किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बनेगी। छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक संचालित होगा। यह कार्य प्रदेश के 33 जिलों, 252 तहसीलों और 19,978 गांवों में संपन्न किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-गणना की सुविधा जनभागीदारी को सशक्त बनाएगी। जनता का विश्वास ही जनगणना की सफलता की धुरी है। यह प्रक्रिया विकसित और आत्मनिर्भर भारत-2047 की नींव को सुदृढ़ करेगी।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि जनगणना एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें तथ्यों का व्यवस्थित और प्रमाणिक संकलन किया जाता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने प्रगणकों के प्रशिक्षण में सपोर्टिव सुपरविजन की तकनीक अपनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि मैदानी स्तर पर कार्यरत कर्मियों को निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जाए, ताकि त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हो सके।
नई भवन अनुज्ञाओं को पूर्व से ट्रेस करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि मकान सूचीकरण के दौरान कोई भी संरचना छूटनी नहीं चाहिए। सीमावर्ती जिलों के संदर्भ में वर्ष 2001 के अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने आगाह किया कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में चले गए व्यक्तियों की गणना में दोहराव से बचने के लिए विशेष सावधानी बरती जाए।

इस अवसर पर भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक और सांख्यिकीय कार्यों में से एक है। यह लोकतंत्र की आधारशिला है और नीति-निर्माण की दिशा तय करती है। उन्होंने बताया कि भारत में पहली संगठित जनगणना वर्ष 1872 में प्रारंभ हुई थी और आगामी जनगणना देश की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी।
उन्होंने कहा कि 150 वर्षों की परंपरा वाली भारतीय जनगणना गांव, कस्बे और वार्ड स्तर तक प्राथमिक आंकड़ों का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएं, परिसंपत्तियां, जनसांख्यिकीय विवरण, धर्म, अनुसूचित जाति-जनजाति, भाषा, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रव्रजन और प्रजनन से संबंधित सूक्ष्म एवं विश्वसनीय आंकड़े संकलित किए जाते हैं।
गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने कलेक्टरों को जनगणना-2027 से संबंधित कार्यों के बारे में विस्तार से दिशा-निर्देश दिए। राज्य स्तरीय संभागायुक्त-कलेक्टर सम्मेलन में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त तथा अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
जनगणना-2027 केवल संख्याओं की गणना नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की नीतियों की रचना है। यह वह दर्पण है जिसमें शासन स्वयं को देखता है और वही मानचित्र है, जिस पर भविष्य की विकास यात्रा अंकित होती है।
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