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कटघोरा वनमण्डल के तानाखार में तेंदूपत्ता संग्रहण एवं शाखकर्तन कार्य प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

कोरबा ACGN:- कटघोरा वनमण्डल अंतर्गत सहकारी वन उपज समिति द्वारा वन परिक्षेत्र कटघोरा एवं एतमानगर तथा जिला वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित के संयुक्त तत्वावधान में तानाखार में तेंदूपत्ता संग्रहण एवं शाखकर्तन कार्य प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपप्रबंधक, वन परिक्षेत्र अधिकारी, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी, बड़ी संख्या में तेंदूपत्ता संग्राहक तथा आसपास की ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।


कार्यक्रम प्रारंभ होते ही उपस्थित सभी संग्राहकों, अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने जंगलों को आग से बचाने तथा वन संपदा की रक्षा करने की सामूहिक शपथ ली। सभी ने संकल्प लिया कि वे न तो स्वयं जंगल में आग लगाएंगे और न ही किसी को ऐसा करने देंगे, तथा आग की किसी भी घटना की सूचना तत्काल विभाग को देंगे। शपथ ग्रहण के पश्चात उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने अपने उद्बोधन में वन संरक्षण, आजीविका संवर्धन एवं शासन की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक ग्रामीणों तक पहुंचाने पर जोर दिया।


कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य को व्यवस्थित, गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाना था। प्रशिक्षण के दौरान संग्राहकों को कोमल एवं पूर्ण विकसित पत्तों की पहचान, सही तरीके से पत्ते तोड़ने की विधि, निर्धारित मानक के अनुसार बंडल तैयार करना, कार्टन पैकिंग, सुरक्षित भंडारण तथा शाखकर्तन की वैज्ञानिक पद्धति की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति से संग्रहण करने पर पत्तों की गुणवत्ता बेहतर रहती है, जिससे संग्राहकों को अधिक पारिश्रमिक प्राप्त होता है और वन संपदा को भी क्षति नहीं पहुंचती।


प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि शासन द्वारा तेंदूपत्ता की दर ₹5500 प्रति मानक बोरा निर्धारित की गई है। शाखकर्तन कार्य के लिए मजदूरी दर निर्धारित न होकर ₹70 प्रति मानक बोरा मानदेय के रूप में अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाता है। इच्छुक नए संग्राहकों को समिति की सदस्यता प्रदान करने की जानकारी भी दी गई, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवार इस रोजगार से जुड़ सकें।कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित सूचना पत्रकों के माध्यम से लघु वनोपज समर्थन मूल्य दर सूची की जानकारी दी गई, जिसमें हर्रा, बहेरा, आंवला, महुआ फूल, इमली, चिरौंजी, चार बीज, बेल गूदा, साल बीज, करंज बीज आदि के समर्थन मूल्य का उल्लेख था। साथ ही कोदो ₹3200, कुटकी ₹3350 एवं रागी ₹4290 प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य की जानकारी भी साझा की गई। संग्राहकों से अपील की गई कि वे अपनी उपज सहकारी समिति के माध्यम से ही विक्रय करें, ताकि उन्हें शासन द्वारा निर्धारित उचित मूल्य प्राप्त हो सके और बिचौलियों से बचा जा सके।


इसके अतिरिक्त तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए लागू बीमा सुरक्षा योजना, दुर्घटना सहायता, आंशिक निःशक्तता सहायता, शिक्षा प्रोत्साहन योजना एवं मेधावी छात्र पुरस्कार योजना की जानकारी भी दी गई। पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार सहायता राशि प्रदान किए जाने की प्रक्रिया समझाई गई।


उप प्रबंधक ने अपने संबोधन में कहा कि जंगल पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। वन हमें तेंदूपत्ता, महुआ, चार, हर्रा, बहेरा सहित अनेक लघु वनोपज प्रदान करते हैं, जो ग्रामीणों की आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। उन्होंने बताया कि पतझड़ के मौसम में सूखे पत्तों के कारण जंगलों में आग लगने की संभावना अधिक रहती है। जलती बीड़ी-सिगरेट फेंकना, महुआ बीनने में लापरवाही, शहद निकालने में आग का उपयोग अथवा जानबूझकर आग लगाना वनाग्नि के प्रमुख कारण हैं। यदि कहीं आग दिखाई दे तो शासन द्वारा जारी टोल फ्री नंबर 18002341416 पर तत्काल सूचना देने की अपील की गई।


वन परिक्षेत्र अधिकारी एतमानगर ने जानकारी दी कि एतमानगर, जटगा एवं पसान क्षेत्र हाथी प्रभावित क्षेत्र हैं। महुआ सीजन प्रारंभ होने के मद्देनजर संग्राहकों को समूह में जंगल जाने, हाथियों के विचरण क्षेत्र से दूर रहने एवं विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई।
कार्यक्रम के दौरान शाखकर्तन की सही तकनीक का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया, ताकि पेड़ों को न्यूनतम क्षति पहुंचे और भविष्य में बेहतर उत्पादन बना रहे। अंत में सभी संग्राहकों ने सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं जिम्मेदार तेंदूपत्ता संग्रहण का संकल्प दोहराते हुए वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की प्रतिबद्धता जताई।

प्रदीप मिश्रा

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