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दिव्यांग शासकीय अधिकारी-कर्मचारी संघ का कलेक्टर को विस्तृत ज्ञापन, पदोन्नति व सेवा शर्तों पर उठाए गंभीर सवाल

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

वरिष्ठता में कथित हेरफेर, दिव्यांग आरक्षण की अनदेखी और बायोमेट्रिक समय-सीमा में लचीलापन की मांग

कोरबा ACGN:- छत्तीसगढ़ दिव्यांग शासकीय अधिकारी-कर्मचारी संघ, जिला कोरबा ने कलेक्टर को दो अलग-अलग विषयों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच एवं सुधारात्मक आदेश जारी करने की मांग की है। संघ ने टी-संवर्ग व्याख्याता से प्राचार्य पदोन्नति प्रक्रिया में कथित अनियमितता, वरिष्ठता क्रम में हेरफेर, दिव्यांग आरक्षण की अवहेलना तथा जन्मतिथि की उपेक्षा जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही आधार-फेस आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली में दिव्यांग कर्मचारियों को युक्तियुक्त छूट प्रदान करने की भी मांग की है।


संघ द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि अस्थि बाधित दिव्यांग कर्मचारी श्री सतीश कुमार गुप्ता, व्याख्याता, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय केरवाद्वारी, करतला, जिला कोरबा में पदस्थ हैं। टी-संवर्ग व्याख्याता वरिष्ठता सूची में उनका नाम क्रमांक 455/1167 पर दर्ज रहा है तथा अभिलेखों के अनुसार उनकी वास्तविक सामान्य वरिष्ठता क्रमांक 810 है।
ज्ञापन के अनुसार पदोन्नति प्रक्रिया के दौरान उनके वरिष्ठता क्रमांक को संदिग्ध तरीके से 1167 से 1183 और पुनः 1189 प्रदर्शित किया गया, जो नियमविरुद्ध और तथ्यात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण है। संघ ने कहा है कि वर्ष 2023 की अंतिम वरिष्ठता सूची के आधार पर प्राचार्य पदोन्नति की कार्यवाही की गई, लेकिन उसी सूची में दर्ज वरिष्ठता को दुष्प्रभावित कर संबंधित दिव्यांग अधिकारी को पदोन्नति से वंचित कर दिया गया।
संघ ने यह भी रेखांकित किया है कि वरिष्ठता विवाद की स्थिति में सामान्यतः जन्मतिथि को निर्णायक आधार माना जाता है, किंतु इस प्रकरण में जन्मतिथि को पूर्णतः नजरअंदाज किया गया। पाँच वर्षीय गोपनीय चरित्रावली और चल-अचल संपत्ति विवरणी नवंबर 2024 में विधिवत जमा होने के बावजूद पुरानी सूची से पदोन्नति की गई। साथ ही लगभग 400 अतिरिक्त नाम सूची में जोड़े जाने पर भी संघ ने सवाल उठाते हुए इसकी तथ्यात्मक जांच की मांग की है।
ज्ञापन में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 33, सामान्य प्रशासन विभाग के पदोन्नति आरक्षण संबंधी परिपत्र तथा संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह मामला प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन और समान अवसर के अधिकार की अवहेलना का प्रतीक है। संघ ने मांग की है कि उच्च स्तरीय विभागीय जांच समिति गठित कर वास्तविक वरिष्ठता क्रमांक 810 पुनर्स्थापित किया जाए और नियम अनुसार दिव्यांग आरक्षण सहित पदोन्नति प्रदान की जाए। साथ ही 30 दिवस के भीतर कारणयुक्त लिखित आदेश जारी किया जाए।

इसी क्रम में संघ ने आधार-फेस आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम के संबंध में भी ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में कहा गया है कि 6 जनवरी 2026 की समय-सीमा बैठक में प्रातः 10 बजे तक अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश दिए गए हैं, किंतु जिले के विभिन्न विभागों में कार्यरत अनेक दिव्यांग कर्मचारी शारीरिक, दृष्टि, श्रवण एवं अन्य दिव्यांगताओं के कारण नियमित आवागमन में कठिनाइयों का सामना करते हैं। परिवहन की अनुपलब्धता, सहायक पर निर्भरता और स्वास्थ्य संबंधी बाधाएं उनके लिए अतिरिक्त चुनौती बनती हैं।
संघ ने अधिनियम की धारा 20, 23 एवं 3(5) का हवाला देते हुए कहा है कि सेवा शर्तों में युक्तियुक्त सुविधा प्रदान करना शासन की वैधानिक जिम्मेदारी है। इसलिए दिव्यांग कर्मचारियों को प्रातः 10 बजे की समय-सीमा में लचीलापन दिया जाए, बायोमेट्रिक उपस्थिति में विलंब को दंडात्मक कार्रवाई से पृथक रखा जाए तथा आवश्यकता अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था जैसे लचीला समय, मैनुअल प्रविष्टि या विभागीय प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
संघ पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह पत्र अंतिम निवेदन के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यदि निर्धारित समयावधि में न्यायोचित और विधिसम्मत कार्यवाही नहीं की जाती है तो वे राज्य आयुक्त दिव्यांगजन एवं सक्षम न्यायिक मंचों के समक्ष विधिक कार्यवाही प्रारंभ करने को बाध्य होंगे। संघ ने जिला प्रशासन से समावेशी प्रशासन और दिव्यांग-अनुकूल कार्यसंस्कृति के अनुरूप त्वरित एवं निष्पक्ष निर्णय लेने की अपेक्षा व्यक्त की है।

प्रदीप मिश्रा
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