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होली तक वृंदावन में रहेंगे पुरी शंकराचार्य, राष्ट्र और धर्म विषयों पर देंगे मार्गदर्शन

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वृंदावन, उत्तर प्रदेश

By ACGN 7647981711, 9303948009

राष्ट्रोत्कर्ष अभियान के तहत हरिहर आश्रम में प्रवास, प्रतिदिन दर्शन, दीक्षा और धर्मसभा का आयोजन

वृंदावन ACGN:- स्वामी निश्चलानंद सरस्वती इन दिनों अपने राष्ट्रोत्कर्ष अभियान के अंतर्गत श्रीधाम वृंदावन में प्रवास पर पहुंचे हैं। ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय गोवर्धन मठ पुरी के पीठाधीश्वर के रूप में प्रतिष्ठित शंकराचार्य का यह प्रवास होली तक निर्धारित किया गया है। परंपरा के अनुसार वे प्रत्येक वर्ष होली और शरद पूर्णिमा के अवसर पर वृंदावन स्थित हरिहर आश्रम, चैतन्य विहार में विराजमान रहते हैं, जहां देशभर से श्रद्धालु उनका आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।
प्रवास अवधि के दौरान प्रतिदिन पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे से दर्शन, दीक्षा एवं संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इन सत्रों में श्रद्धालु धर्म, राष्ट्र और अध्यात्म से जुड़े अपने प्रश्न सीधे शंकराचार्य के श्रीमुख से पूछकर वैदिक सिद्धांतों के अनुरूप समाधान प्राप्त कर रहे हैं। वहीं सायंकाल पांच बजे से आयोजित धर्मसभा में उनका आध्यात्मिक संदेश सुनने का अवसर मिल रहा है।
समसामयिक विषयों पर अपने वक्तव्य में शंकराचार्य ने राष्ट्र प्रमुख की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चा राजा वही है जिसे वृक्षों की वेदना, पर्वतों की वेदना और चींटी-चिड़ियों तक की पीड़ा का अनुभव हो। उन्होंने कहा कि आज के यांत्रिक युग में प्रकृति और प्राणियों की संवेदना को अनसुना किया जा रहा है। वृक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त नहीं कर सकते और छोटे जीव विरोध भी नहीं जता सकते, ऐसे में उनके संरक्षण की जिम्मेदारी समाज और शासन दोनों की है।
वर्तमान राष्ट्रीय परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को दिशाहीन करने का प्रयास हो रहा है। धर्म और ईश्वर को विकास में बाधक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि भारतीय शिक्षा प्रणाली में धर्म, नीति और अध्यात्म का समावेश आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कृषि, गोरक्षा, वाणिज्य और सेवा के क्षेत्र में भी विदेशी सोच का प्रभाव दिखाई दे रहा है, जो भारत की मूल आत्मा से मेल नहीं खाता।
संविधान और सनातन सिद्धांतों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के जीवन में दिव्यता दिखाई देती है तो उसके पीछे पूर्व जन्मों के श्रेष्ठ आचरण का प्रभाव होता है। वैदिक मूल्यों के पालन के बिना स्थायी दिव्यता संभव नहीं है।
अपने प्रवचन में उन्होंने कारक-कोटि के महापुरुषों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे विभूतियां शब्दब्रह्म और परब्रह्म में निष्णात होते हुए भी समाज के लिए आवश्यक कठोर दायित्वों का निर्वहन करती हैं। उन्होंने परशुराम जैसे उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकसंग्रह और धर्मरक्षा के लिए कभी-कभी कटनी-छंटनी जैसे कठिन कार्य भी करने पड़ते हैं।
वृंदावन में शंकराचार्य के प्रवास को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है और होली तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का क्रम जारी रहेगा।

प्रदीप मिश्रा
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