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RTI पर NTPC का जवाब ‘रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं’, प्रबंधन पर उठे सवाल

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009


मंदिर परिसर में कथित पेड़ कटाई की सूचना मांगने पर जवाब से असंतोष, अपील की तैयारी
कोरबा ACGN:- कोरबा स्थित NTPC Limited एक बार फिर सूचना के अधिकार के मामले को लेकर चर्चा में आ गया है। स्थानीय निवासी द्वारा आवासीय परिसर स्थित मंदिर क्षेत्र में कथित पेड़ कटाई को लेकर मांगी गई जानकारी के जवाब में कंपनी प्रबंधन ने पत्र जारी कर कहा है कि संबंधित परिसर टाउनशिप प्रशासन टीएडी के अंतर्गत नहीं आता और इस संबंध में कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।

मामला 17 नवम्बर 2025 से 21 नवम्बर 2025 के बीच मंदिर परिसर में पेड़ कटाई की अनुमति और उससे जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति मांगने से जुड़ा है। आवेदनकर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी मांगी थी। 27 जनवरी 2026 को जारी जवाब में एनटीपीसी के सीपीआईओ ने सूचित किया कि उक्त परिसर टीएडी के अधीन नहीं है, इसलिए मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।


जवाब सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। यदि संबंधित परिसर एनटीपीसी प्रशासन के अंतर्गत नहीं आता तो वह किसके अधीन है। क्या आवासीय क्षेत्र के भीतर होने वाली गतिविधियों की निगरानी का कोई स्पष्ट तंत्र नहीं है। यदि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है तो क्या इसका अर्थ यह माना जाए कि किसी प्रकार की अनुमति प्रक्रिया अपनाई ही नहीं गई। साथ ही सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत आवेदन को संबंधित प्राधिकरण को स्थानांतरित क्यों नहीं किया गया।
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अनुसार यदि मांगी गई सूचना संबंधित विभाग के पास उपलब्ध नहीं है तो उसे पांच दिनों के भीतर उचित प्राधिकरण को स्थानांतरित किया जाना चाहिए। केवल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कहना तभी स्वीकार्य माना जाता है जब अभिलेख वास्तव में अस्तित्व में न हो, अन्यथा इसे प्रशासनिक लापरवाही माना जा सकता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक उपक्रम होने के नाते एनटीपीसी से पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है। यदि सार्वजनिक क्षेत्र में पेड़ कटाई जैसी गतिविधियों का रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है तो यह पर्यावरणीय और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
सूत्रों के अनुसार इस मामले में अब प्रथम अपील दायर करने की तैयारी की जा रही है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गंभीर रूप ले सकता है।

प्रदीप मिश्रा
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