बालको स्थानीय प्रबंधन की नाकामी से वेदांता ग्रुप की साख पर सवाल, कोरबा की सड़कें बनीं खतरे का पर्याय
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जिला – कोरबा (छत्तीसगढ़)
By ACGN | 7647981711, 9303948009
हसदेव नदी के नए पुल पर खड़े कोयला लोड ट्रक, ध्यानचंद चौक से परसाभाटा चौक तक गड्ढों और राख से जूझता मुख्य मार्ग, हर दिन हादसों से डरती जनता
कोरबा, ACGN :- कोरबा में बालको प्रबंधन की लापरवाही अब सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल की प्रतिष्ठा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जिस बालको को वेदांता ग्रुप ने देश की औद्योगिक आत्मनिर्भरता और विकास का प्रतीक बनाया, आज उसी बालको का स्थानीय प्रबंधन कोरबा की जनता के लिए अभिशाप बनता जा रहा है।

शहर का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ध्यानचंद चौक से बालको की ओर जाने वाली सड़क आज पूरी तरह बदहाल स्थिति में है। ध्यानचंद चौक के पास बने नए पुल के आसपास रोजाना भारी संख्या में कोयला लोड ट्रक खड़े कर दिए जाते हैं, जबकि यही मार्ग शहर का मुख्य आवागमन रास्ता है। ट्रकों की अव्यवस्थित पार्किंग से सड़क संकरी हो जाती है और दिनभर जाम व अफरा-तफरी का माहौल बना रहता है।
सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, उखड़ी हुई परत, राख और कोयले की धूल से हालात और भयावह हो चुके हैं। उड़ती जहरीली धूल के कारण न केवल सांस लेना मुश्किल हो रहा है, बल्कि दृश्यता भी प्रभावित हो रही है। स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और बालको डरी व आसपास के क्षेत्रों में रोज़ आना-जाना करने वाले लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं। बच्चों को स्कूल भेजना अभिभावकों के लिए चिंता का कारण बन गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग पर प्रतिदिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। दोपहिया वाहन गड्ढों और राख के कारण फिसल रहे हैं, वहीं भारी वाहनों की आवाजाही से छोटे वाहन और पैदल राहगीर हमेशा खतरे में रहते हैं। कई लोग घायल हो चुके हैं और अनेक वाहनों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन इसके बावजूद बालको प्रबंधन की ओर से न तो सड़क सुधार के ठोस प्रयास दिखाई दे रहे हैं और न ही ट्रकों के संचालन व पार्किंग को लेकर कोई सख्त व्यवस्था।
जनता का कहना है कि बालको के नाम पर केवल उपलब्धियों और सीएसआर की तस्वीरें सामने लाई जा रही हैं, जबकि जमीनी हकीकत खून, धूल और डर से भरी हुई है। यह स्थिति सीधे तौर पर अनिल अग्रवाल की उस छवि को नुकसान पहुंचा रही है, जिन्हें देश एक संवेदनशील और दूरदर्शी उद्योगपति के रूप में जानता है। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या बालको का स्थानीय प्रबंधन अनिल अग्रवाल की सोच और जिम्मेदारियों को समझने में पूरी तरह विफल हो चुका है।
कोरबा की जनता अब साफ शब्दों में चेतावनी दे रही है कि यदि तत्काल सड़क मरम्मत, नियमित पानी का छिड़काव, राख उठाव, कोयला लोड ट्रकों पर नियंत्रण और जनसंवाद नहीं किया गया, तो यह जनआक्रोश आंदोलन और घेराव में बदल सकता है। यह लड़ाई अब सिर्फ सड़क की नहीं, बल्कि सुरक्षित जीवन, सम्मान और अधिकार की है, और जनता अब चुप रहने के मूड में नहीं है।
प्रदीप मिश्रा
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