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धान के बदले ताले, भूख के बदले भवन: किसान टूट रहा, सत्ता जश्न में,  युवा कांग्रेस के विरोध को पुलिस बल से कुचला गया

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कोरबा छत्तीसगढ़

By ACGN 7647 9817119303 948009


कोरबा! छत्तीसगढ़ में जहां किसान आज भी अपना धान बेचने के लिए दफ्तरों, समितियों और टोकन सिस्टम के बीच भटकने को मजबूर है, वहीं सत्ता पक्ष भव्य कार्यालयों के शिलान्यास और समारोहों में व्यस्त नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कोरबा प्रवास के दौरान भाजपा के नए कार्यालय भवन के भूमिपूजन कार्यक्रम के विरोध में युवा कांग्रेस का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा।

जिला कांग्रेस कार्यालय से शांतिपूर्ण ढंग से निकले युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार की किसान-विरोधी, जनविरोधी और संवेदनहीन नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए काला झंडा दिखाने का प्रयास किया। लेकिन लोकतांत्रिक विरोध को सुनने के बजाय पुलिस ने तत्काल बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।


युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस लॉरी में ठूंसकर लगभग तीन किलोमीटर दूर कुसमुंडा थाना ले जाया गया, जहां उन्हें घंटों बैठाए रखा गया। जैसे ही मुख्यमंत्री का काफिला कोरबा से रवाना हुआ, सभी कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया गया। यह घटनाक्रम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पूरी कार्रवाई जनसुरक्षा नहीं, बल्कि सत्ता की असहमति से सुरक्षा के लिए की गई।


यह विरोध ऐसे समय में सामने आया है जब छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और अफसरशाही की गिरफ्त में है। हजारों किसान आज भी टोकन नहीं मिलने के कारण अपना धान नहीं बेच पाए हैं, जबकि सरकार द्वारा घोषित अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी है। कर्ज़, भूख और मानसिक दबाव में फंसे कई किसान आत्महत्या का प्रयास कर चुके हैं, जिनमें से कुछ आज भी अस्पतालों में ज़िंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे हैं।


युवा कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार किसानों की पीड़ा, आत्महत्याओं और बदहाल व्यवस्था पर संवेदनशील होने के बजाय एसी हॉल, मंच और कार्यालयों के शिलान्यास में व्यस्त है।

इसी जनआक्रोश का प्रतीक बना उनका नारा
“किसान मर रहा है और कार्यालय सज रहा है।”
युवा कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में लोकतंत्र अब सिर्फ भाषणों और पोस्टरों तक सीमित रह गया है, जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि सवाल उठाने वालों को पुलिस के ज़रिए चुप कराया जा रहा है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि किसानों को उनका हक़, धान खरीदी में पारदर्शिता और दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।
इस विरोध प्रदर्शन में विकास सिंह, राकेश पंकज, नवीन कुकरेजा, सुनील निर्मलकर, धनंजय दीवान, कुणाल आजाद, मधुसुदन दास, विवेक श्रीवास और मिनिकेतन गवेल विशेष रूप से शामिल रहे।

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